रिश्तों की जमा-पूंजी – प्रतिमा श्रीवास्तव

पिता जी का देहांत हो गया था और इतनी भीड़ रिश्तेदारों और जान पहचान वालों की थी की गली खचाखच भरी हुई थी। हर किसी की आंखें नम थीं और सब के पास कोई ना कोई बात उनसे जुड़ी हुई थी। हम सब भाई बहन ये सब देखकर ताज्जुब कर रहे थे की पापा ने … Read more

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