कुल कलंकिनी। – मधु वशिष्ठ

            बैंक्विट हॉल में अपने भाई राहुल की शादी की रिसेप्शन में रीना ही सबका स्वागत करने के लिए गेट पर खड़ी थी। डीजे पर रीना का बेटा नाच रहा था। रीना का डायमंड का लंबा हार, बाहर खड़ी लंबी सी कार , उसका मेकअप करा हुआ  सुंदर और मासूम चेहरा देखकर आज उसके चाचा चाचा और बूआ उसे          

कुलकलंकिनी नहीं समझ पा रहे थे अपितु  वह मुस्कुरा कर उसे        

अभिवादन करते हुए रिसेप्शन में आ जा रहे थे।

     आइए आपको रीना से मिलाएं। विवाह से पहले रीना एक तीन भाइयों वाले संयुक्त परिवार का हिस्सा थी जिसमें कि। रीना के ताई चाचा और उन सबके बच्चे सम्मिलित थे परंतु यह बाहर वालों को नहीं पता था कि खाना सबका अलग-अलग ही बनता है। उस तीन मंजिल मकान में रीना दूसरी मंजिल पर रहती थी।

उसकी उम्र तब 10 वर्ष ही रही होगी जबकि रीना की मां की मृत्यु हो गई थी। पिता का टूर एंड ट्रेवल्स का काम था और उन्हें अक्सर बाहर ही रहना पड़ता था। मां की मृत्यु के बाद 10 वर्ष की रीना और 5वर्ष का उसका भाई, वह खुद ही भाई को तैयार करके स्कूल जाती और वापस आने पर अगर शांताबाई ने खाना नहीं बनाया होता

तो उस नन्ही बच्ची ने एक मां के जैसे घर और भाई को। वह संभालना सीख लिया था। खाने को संयुक्त परिवार में चाचा ताई सब थे परंतु वह रीना के माता-पिता तो नहीं थे ना, हां रीना पर एक सीसी टीवी जैसी नजर जरूर रखी जाती। थी। पिता के टूर पर जाने के बाद राहुल को तैयार करती और फिर दोनों स्कूल जाते।

      रीना के पापा को बच्चों को इस तरह से अकेला छोड़ना पसंद तो ना था परंतु काम तो करना ही था ना, रीना की मम्मी की मृत्यु के बाद उन्हें भी बीपी शुगर अस्थमा जैसी बीमारियों ने घेर लिया और दूर-दूर तक टूर पर जाने से उनकी भी तबीयत खराब होने लगी थी इस कारण उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया गया। अब वह बेहद अवसादग्रस्त हो चुके थे।

रीना ने दसवीं पास कर ली थी और राहुल भी सातवीं क्लास में था। एक दिन रीना के पिता भी जब सोए तो सुबह उठ ही ना पाए। उनकी मृत्यु के बाद घर में सबके होते हुए भी इन दोनों का जीवन बेहद मुश्किल हो गया था ।कोई भी उनकी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं था। राहुल की स्कूल की पढ़ाई का खर्चा भी था और रोजमर्रा का जीवन भी जीना था।

नजदीक ही  कपड़ों का बड़ा शोरूम था , जीवन यापन के लिए रीना ने वहां ही काम करना शुरू कर दिया था। राहुल को भी उसने कॉलेज में दाखिल तो करवा दिया था परंतु उसके अपने घर वाले ही उसके देर से आने पर उसे उल्टा सीधा बोलना अपना कर्तव्य ही समझते थे। रीना बिना किसी की सुने लगन से अपना काम कर रही थी। राहुल के कॉलेज के एडमिशन में बहुत पैसे लगे थे तभी एक दिन पता चला कि उसने अधेड़ उम्र के आदमी से ही विवाह कर लिया है।

सब उसे कुल कलंकिनी बोलने लगे थे और कोई भी उससे बात नहीं करता था परंतु रीना को इन बातों से कोई परवाह नहीं थी। वह अपने भाई को अच्छे से पढ़ा रही थी और कभी-कभी वह अकेली ही घर आती थी। उसके साथ में उसका पति कभी घर नहीं आया। 

            राहुल के कॉलेज पूरा करने तक रीना के एक बेटा भी हो चुका था। क्योंकि घर एक ही था और चाचा और ताऊ की बेटियां भी थी इसलिए  चाची और ताई उसके घर आने पर केवल भुनभुनाती रहती थी परंतु उसका कुछ कर तो पाती नहीं थी। रीना के ही कारण लोग राहुल से भी कटने लगे थे। सेकंड ईयर के बाद राहुल भी अपने फ्लोर में ताला लगाकर कहीं चला गया था। अब सब की नजर ही उनके फ्लोर पर थी। 

          रीना ने राहुल को भी अपने पास ही बुला लिया था। रीना के पति वर्मा जी का भी  बहुत बड़ा शोरूम था। रीना जहां काम करती थी वर्मा जी  उस शोरूम में आया जाया करते थे और वहीं से उनकी रीना से मुलाकात हो गई थी। वर्मा जी की पत्नी मानसिक और शारीरिक बीमारियों से ग्रस्त थीं और उन्हें हर वक्त के लिए एक अटेंडेंट चाहिए थी, रीना को अपने भाई के कॉलेज में एडमिशन के लिए अधिक पैसे चाहिए थे वर्मा जी ने उन्हें अपनी पत्नी के केयर टेकर के तौर पर रखा और उन्हें अच्छी पेमेंट करी। उन्होंने ही राहुल को अच्छे कॉलेज में एडमिशन भी करवाया। रीना वर्मा जी की पत्नी का बहुत अच्छे से ख्याल रखती थी। वर्मा जी भी जीवन में अकेले ही थे , वर्मा जी की पत्नी ने मृत्यु से पहले रीना से यह वादा लिया था कि वह वर्मा जी का जीवनपर्यत ख्याल रखें और उनकी पत्नी की मृत्यु के उपरांत वर्मा जी ने रीना से विवाह भी कर लिया था क्योंकि वहां भी लोग रीना को शक की नजर से ही देखते थे। रीना के एक पुत्र भी हुआ और बाद में राहुल को भी रीना ने अपने पास ही बुला लिया था। उसकी कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद वर्मा जी ने राहुल को भी एक इलेक्ट्रिक के समान का शोरूम खुलवा दिया था। अपनी मेहनत के दम पर राहुल भी  बहुत तरक्की कर रहा था। उसने भी अब अपना एक अलग ही फ्लैट और गाड़ी ले ली थी। रीना ने राहुल के लिए भी बहुत अच्छे घर की लड़की देख ली थी और बहुत शानदार बैंक्विट में उसकी शादी होनी थी। विवाह के शुभ अवसर पर रीना बड़ी सी गाड़ी में अपनी चाची और ताई को राहुल के विवाह का कार्ड देने के लिए आई थी। 

        चाची और ताई तो उनका वैभव देखकर ही हैरान हो रहे थे, वह जिसे कि सब लोग कुल कलंकिनी कहते थे , आज उसके मुकाबले का कोई कुल में था ही नहीं। उनकी बड़ी गाड़ी, रीना का पहना हुआ हीरे का हार, राहुल का विनम्र व्यवहार, वह सब उसे देखते ही रह गए।

     आज बैंकटहॉल में तो इतना भव्य आयोजन देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गई, आज उन्हें रीना कुल कलंकिनी  नहीं लग रही थी अपितु उन्हें अपने आप पर शर्म आ रही थी कि उनके सहारे के बिना भी रीना ने अपने घर को अपने भाई को कितनी ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। पूरा परिवार उनके इस आयोजन में जहां बड़े-बड़े संभ्रांत लोग आए थे अपने आप को उनका सबसे करीबी साबित करने में लगे हुए थे। 

          पाठकगण किसी भी परिस्थिति में किसी की सहायता करे बिना किसी को कोई भी नाम देना ठीक है क्या?

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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