समझदार पत्नी

शादी को अभी महज़ डेढ़ साल ही बीता था, लेकिन इस छोटे से अरसे में ही नंदिनी  ने विशाल के घर को पूरी तरह से अपना बना लिया था। विशाल के घर की परिस्थितियां आम घरों जैसी नहीं थीं। शादी से करीब एक साल पहले ही विशाल की माँ, सुशीला जी को लकवे का एक … Read more

पछतावा

रात के ग्यारह बज चुके थे। पूरे घर में खामोशी छा गई थी। सास-ससुर को दवाइयां देकर सुलाने, ननद और देवर के नखरे उठाकर उन्हें मनपसंद भोजन कराने, और अंत में पति को खाना परोसने के बाद, मीरा ने रसोई समेटी थी। हमेशा की तरह बर्तन मांजने के बाद जो थोड़ा-बहुत ठंडा खाना बचा था, … Read more

एक दूसरे का सम्मान

सुधा अपने शहर के उस बड़े से मकान में पिछले छह सालों से बिल्कुल अकेली रह रही थी। पति के गुजर जाने के बाद जिंदगी जैसे एक ठहरा हुआ पानी बन गई थी। उनकी इकलौती बेटी, शिखा, पिछले कुछ सालों से नौकरी के सिलसिले में बेंगलुरु में रह रही थी। सुधा का ज्यादातर समय पुरानी … Read more

बेटे की शादी

सुशीला बहन, तुम्हारी नजर में कोई ऐसी सीधी-सादी और घरेलू लड़की है क्या, जो मेरे सुमित को संभाल सके? हम दहेज में एक पैसा नहीं मांगेंगे, बस लड़की हमारे बेटे को सुधार दे।” सुशीला तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए चहक उठी, “अरे मेरे मायके के पड़ोस में एक बहुत ही गरीब लेकिन … Read more

राखी

पिताजी की आवाज रुंध गई थी। उन्होंने आगे कहा, “जब मैं विमला की भेजी हुई इस साधारण सी सूती राखी को अपनी कलाई पर बांधता हूं, तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरी छोटी बहन ने अपना सारा दर्द, अपना सारा संघर्ष इस धागे में पिरोकर मुझे भेज दिया है। यह राखी मुझे याद दिलाती … Read more

ईंट की दीवारें

“दीदी, तू आ गई! मुझे लगा तू भी मुझसे पराई हो गई।” मयंक रो पड़ा। स्मृति भी बाहर आ गई और शालिनी के पैर छूकर रोने लगी। शालिनी ने दोनों को बिठाया और भरे हुए गले से पूछा, “मयंक, ये सब क्या है? बाबूजी और अम्मा के जाने के बाद तुम दोनों ने इस घर … Read more

चाँदी की पायल

नेहा अपनी बालकनी में सूखते हुए कपड़े उतार रही थी कि तभी उसकी नज़र नीचे वाले घर के अहाते में पड़ी। नीचे के हिस्से में मिस्टर और मिसेज़ शर्मा रहते थे, जिन्हें पूरी कॉलोनी वाले प्यार से ‘रघु अंकल’ और ‘कल्याणी आंटी’ कहते थे। नेहा ने देखा कि कल्याणी आंटी बड़ी बेचैनी से मुख्य द्वार … Read more

दिल के दरवाजे

“अंकल… मुझे माफ कर दीजिए… अंजलि… अंजलि को लेबर पेन हो रहा है। कोई गाड़ी नहीं है, नेटवर्क नहीं है, मेरी कोई मदद नहीं कर रहा। वो मर जाएगी अंकल… प्लीज मेरी मदद कीजिए!” सिद्धार्थ फूट-फूट कर रोने लगा और उनके पैरों में गिर पड़ा। तभी पीछे से कौशल्या जी हाथ में शॉल और कुछ … Read more

नेकी वापस लौटते हैं

“जी, आप किसे ढूँढ रहे हैं?” दीनानाथ जी ने अपनी कांपती हुई आवाज में पूछा। नौजवान की आँखें दीनानाथ जी की जर्जर हालत देखकर छलक पड़ीं। वो बिना कुछ बोले सीधे उनके पैरों पर गिर पड़ा और फफक-फफक कर रोने लगा। “ये क्या कर रहे हैं आप? उठिए… कौन हैं आप?” दीनानाथ जी पीछे हटते … Read more

 ऊपर वाले का दरवाजा

सुमेधा को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। दस दिन का वह नर्क, वह पल-पल मरने का एहसास, वह रातों की नींद और आंसुओं का सैलाब… सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया था। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। डॉक्टर माथुर ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “देखिए मिसेज … Read more

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