मेरा घर सचमुच किसी स्वर्ग से कम नहीं है

“तुम कहते हो कि वो चिड़चिड़ी हो गई है? ज़रा सोचो, जिस लड़की को तुम शादी से पहले रेस्टोरेंट, सिनेमा और पार्क में घुमाते थे, पत्नी बनने के बाद तुम उसे कहां ले जाते हो? रिश्तेदारी की शादियों में जहां उसे घूंघट निकालकर सबकी जी-हुज़ूरी करनी होती है, मुंडन में, पूजा-पाठ में, या फिर किसी … Read more

संयुक्त परिवार

रघुनाथ जी ने मीरा के सिर पर हाथ रखते हुए उसे बीच में ही टोक दिया। “नहीं बेटी, गलती तुम्हारी नहीं थी। तुमने तो अपने पिता को दिया हुआ वादा आठ सालों तक बहुत ही खूबसूरती से निभाया। गलती मेरी थी जो मैं ये समझ नहीं पाया कि प्यार से सींचा हुआ पौधा जब बड़ा … Read more

बेटी को सीख – संगीता अग्रवाल

सुमित्रा जी ने एक गहरी सांस ली और कहा, “अच्छा! तो वहां तेरी ननद आनी चाहिए थी अपनी माँ की सेवा करने के लिए, क्योंकि तू थक गई थी? और यहाँ? यहाँ तू ननद बनकर आई है, तो तेरी भाभी को तेज बुखार में भी तेरी और तेरे बच्चों की गुलामी करनी चाहिए? ये कैसा … Read more

नन्हा सा फ़रिश्ता

लगभग पाँच सालों के एक लंबे अंतराल के बाद मेरा अपनी कॉलेज की सबसे करीबी दोस्त स्मृति के घर जाना हुआ। हम दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग शहरों में होने के कारण मिलना बहुत मुश्किल हो गया था, लेकिन इस बार जब मुझे देहरादून के एक सेमिनार में हिस्सा लेने का मौका मिला, तो मैंने सोच … Read more

घर को घर रहने दो

देविका जी को हर चीज़ एकदम परफेक्ट चाहिए होती थी। रोहन और अनन्या को अपने ही घर में किसी मेहमान की तरह रहना पड़ता था। सोफे पर बैठकर खाना मना था, क्योंकि कवर गंदे हो जाएंगे। बिस्तर पर सिलवटें नहीं पड़नी चाहिए। खिलौने खेलने के तुरंत बाद उनके डिब्बे में पैक हो जाने चाहिए। दोस्तों … Read more

झूठे रुतबे की बुनियाद

और फिर एक रात वह हुआ जिसने दोनों परिवारों की बची-खुची इज्जत को भी खाक में मिला दिया। विक्रम उस रात बहुत ज्यादा शराब पीकर घर आया था। किसी बिजनेस डील में उसे भारी नुकसान हुआ था और उसका सारा गुस्सा काव्या पर फूट पड़ा। काव्या भी उस वक्त अपने किसी दोस्त के साथ वीडियो … Read more

पश्चाताप का हाहाकार – बीना ‌शुक्ला अवस्थी

पर्वतेश सूनी ऑखों से सामने आई ० सी० यू० में भर्ती पत्नी ममता को देख रहे थे। ममता को पॉच दिन में लगातार तीन हार्ट अटैक आ चुके थे। वह अब एक जिन्दा लाश से अधिक कुछ नहीं थी। डॉक्टर ने भी कह दिया है कि अचानक मिले आघात से ममता के ठीक होने की … Read more

निस्वार्थ कर्म

शहर के जाने-माने रिटायर्ड बैंक अधिकारी सुधीर बाबू अपनी ईमानदारी और दरियादिली के लिए पूरे मोहल्ले में मशहूर थे। उनके दरवाजे से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता था। किसी की बेटी की शादी हो, किसी के बच्चे की फीस भरनी हो या किसी के इलाज का खर्च उठाना हो, सुधीर बाबू हमेशा अपनी हैसियत … Read more

सच्ची मुस्कान

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई थी। “हमारा पड़ोसी है ना रोहन… वो हमारी बहुत मदद करता है।” आंटी के ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं? मैं उनकी मदद करता था? मैं तो वो इंसान था जो उनसे बचने के लिए सीढ़ियों में छिप जाता था। मैं वो था जो उन्हें अपना … Read more

घरवाला

क्या तुम्हें कभी ऐसा नहीं लगता कि तुम एक ‘औरत’ का काम कर रहे हो? या शिखा तुम पर हुक्म चला रही है?” समीर ने झिझकते हुए वह सवाल पूछ ही लिया जो उसके मन में अटका था। अभिनव ज़ोर से हंस पड़ा। उसकी हंसी में कोई बनावट नहीं थी। “औरत का काम? खाना पकाना … Read more

error: Content is protected !!