रेशमी धागों की चुभन
लाल सुर्ख रंग, उस पर चमकता हुआ असली ज़री का सुनहरा काम और रेशम की वो मखमली छुअन… मालती की गोद में रखी वो बनारसी साड़ी किसी नवविवाहिता के सपनों जैसी हसीन लग रही थी। लेकिन मालती की आँखों से गिरते आंसुओं की अनवरत धारा उस रेशम पर गिरकर गहरे धब्बे बना रही थी। अभी … Read more