रिश्तों की उलझन
सुमित्रा जी ने नीलिमा को गले से लगा लिया और ममता भरे स्वर में कहा, “बहू, तू हमारी बेटी जैसी है। नए घर में आकर खुद को ढालना आसान नहीं होता, हम तेरी परेशानी समझते हैं। इस घर पर जितना सौरभ का हक है, उतना ही तेरा भी है। तेरे माता-पिता हमारे समधी हैं, उनका … Read more