कुछ बंधन तोड़ देना ही अच्छा होता है – कायनात परवीन
गाँव की चौपाल पर जब भी बेटियों की शिक्षा या उनके सपनों की बात होती, तो बुज़ुर्गों का एक ही जवाब होता—”लड़कियों की हद घर की चारदीवारी तक ही ठीक है।” मीरा भी इसी गाँव की एक सीधी-साधी लड़की थी, जिसके सपनों का आसमान बहुत बड़ा था, लेकिन उसके पाँव में ‘परंपराओं और सामाजिक बंदिशों’ … Read more