वह रानी रंग की साड़ी: एक खामोश प्रेम की गवाही
यह पढ़ते ही दोनों ननद-भौजाई एक दूसरे के गले लगकर जोर-जोर से रोने लगीं। सुमित्रा जी ने अपनी मौत की तैयारी भी जैसे पहले से ही कर रखी थी, ताकि जाने के बाद भी उनके बच्चों को कोई तकलीफ न हो। रोने की आवाज सुनकर विकास और पीछे-पीछे रघुनाथ जी भी भारी कदमों से कमरे … Read more