कब तक चुप रहोगे – विनीता सिंह
गाँव के आखिरी छोर पर एक छोटा-सा घर था। घर की दीवारें मिट्टी की थीं, लेकिन उनमें रहने वालों के सपने बहुत बड़े थे। उस घर में रघु अपनी पत्नी सीता और बारह साल के बेटे मोहन के साथ रहता था। रघु गाँव के जमींदार के खेत में मजदूरी करता था। दिनभर तपती धूप में … Read more