कब तक चुप रहोगे – परमादत्त झा
बस माफ करें बाबूजी , बहुत हो गया -यह रमण था जो अपनी बहन कविता के लिए बोल रहा था। वह मेरे लिए मर चुकी है ,उसका नाम मत लो , पंडित की बेटी होकर मुसलमान की लुगाई बन गई।मेरा नाम डुबो दिया -पंडित दीनदयाल का गुस्सा मानो फट गया और रूलाई बाहर आ गई। … Read more