रजत की झंकार

 माँ की बातें समीर के दिल में किसी तीर की तरह चुभ गईं। उसे अचानक एहसास हुआ कि पिछले कई महीनों से नंदिनी ने उससे कोई ज़िद नहीं की, वो पहले की तरह खिलखिला कर नहीं हंसी। उसने अपनी पत्नी को एक मशीन की तरह घर का काम करते हुए तो देखा, लेकिन उसकी आत्मा … Read more

कोख का कलंक

अंजलि पिछले हफ्ते ही अपनी बीमार माँ को देखने के लिए अपने मायके भोपाल गई हुई थी। घर में सिर्फ सुमित्रा देवी और रोहन थे। सुमित्रा देवी को लगा कि अंजलि की गैरमौजूदगी में रोहन को समझाना आसान होगा। रात के खाने के बाद, जब रोहन हॉल में बैठकर अपना लैपटॉप बंद कर रहा था, … Read more

स्मृतियों का आँगन: एक बेटी का भ्रम

 निशा जब महज़ आठ वर्ष की थी, तब एक भीषण सड़क दुर्घटना ने उससे उसके माता-पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया था। नियति का यह आघात इतना गहरा था कि उस नन्ही सी जान को समझ ही नहीं आया कि उसकी दुनिया अब हमेशा के लिए वीरान हो चुकी है। ऐसे अंधकारमय समय … Read more

दर्द – खुशी  

मै सुधा जिसके जीवन में सब है एक खुशहाल परिवार।प्यार करने वाला पति मोहन दो बेटे वरुण और अमन एक प्यारी सी बेटी नीतू सब हैं पर फिर भी एक दर्द है जो मुझे कचोटा है कि मैं मोहन जैसे सजन व्यक्ति को दुख दे रही हूं उन्हें मैने धोखा दिया है।वो कई बार कहते … Read more

दिखावे का पुण्य

 आरव ने अपनी मासूम लेकिन तेज आवाज में, जो उस शांत कमरे में गूंज उठी, पूछा, “मम्मी, आप इन आंटी लोगों को इतनी नरम-नरम रोटियां और खीर क्यों दे रही हो? जब दादी हमारे साथ रहती थीं, तब तो आप उन्हें हमेशा कहती थीं कि बुढ़ापे में ज्यादा नखरे नहीं करने चाहिए। जब दादी के … Read more

नींव के पत्थर: एक बेटी के सपनों की उड़ान

“तुम्हारे सपने शादी के साथ ही खत्म हो जाने चाहिए थे स्मिता ,” समीर ने कठोरता से कहा। उनकी ये बहस बाहर तक सुनाई दे रही थी। स्मिता  की सास, सुमित्रा देवी, भी वहाँ आ गईं। जब उन्हें पता चला कि बहू बाहर जाकर काम करना चाहती है, तो उन्होंने भी आसमान सिर पर उठा … Read more

अधूरी चौखट

 “मुझे आपकी दौलत या आपके रुतबे से कोई मतलब नहीं है ठाकुर साहब,” समर की आवाज में एक अजीब सी दृढ़ता और दर्द था। “मैं बस इतना बताने के लिए फोन कर रहा हूँ कि जिस बेटी को आपने अपनी झूठी शान के लिए मृत मान लिया था, वो आज सच में मौत के दरवाजे … Read more

टूटती बेड़ियाँ: एक बेटी के आत्मसम्मान की कहानी

 सावित्री देवी पिछले कई दिनों से अपनी बेटी के इस बदलते हुए रूप को बहुत करीब से देख रही थीं। एक माँ की नज़र से भला बच्चे का दुःख कैसे छिप सकता है? कई बार उन्होंने डाइनिंग टेबल पर या सुबह की चाय के वक्त नेहा से कुरेद-कुरेद कर पूछने की कोशिश की थी, लेकिन … Read more

पसीने से लिखी तकदीर

बेटी की बातें सुनकर सावित्री का दिल छलनी हो गया। एक माँ के लिए अपने जीते-जी बच्चे के भविष्य पर ऐसा कुठाराघात सहना बहुत मुश्किल था। उसे लगा कि बाहर जाकर उन ढोंगी बाबा को खूब खरी-खोटी सुनाए, लेकिन घर की मर्यादा और सास के डर से वह खून का घूंट पीकर रह गई। उसने … Read more

बस, अब बहुत हो गया मम्मी जी – मंजू ओमर

अरे कुछ ना पूछो कमला बहू एक नंबर की कामचोर है काम करने में तो उसका मन ही नहीं लगता। बस जी चुराती रहती है हर काम को,,जरा मौका लगा नहीं की बस कमरे में बैठ जाती है जाकर। अच्छा भाभी जी मुझे तो पता था कि आपकी बहू खूब अच्छे से काम संभालती है … Read more

error: Content is protected !!