रिश्तों के रंग – खुशी
हमारे मोहल्ले में एक बाबा आता था सबके घर नहीं पर गिने चुने घरों में वो भिक्षा लेता था।उनमें एक हमारा घर भी था।मेरी दादी मेरी मां कमला को बहुत गुस्सा करती थी कि क्यों देती हैं इस बूढ़े को रोज खाना बाकी लोग तो फिर भी बचा खुचा देते थे मां जैसे ही आवाज … Read more