पिया वही जो दुल्हन मन भाए

इधर रोजी के लिए तीन सप्ताह मानो तीन दिन की भांति उड़े जा रहे थे। जिस दिन संबंध तय हुआ रोजी की मनःस्थिति बिल्कुल बदल गई। अब तक जिसे वह लापरवाही से ले रही थी, आज वही बात जीवन की सबसे गंभीर घटना बन गई। विवाह का क्या अर्थ होता है, वह पापा-मम्मी के जीवन … Read more

समझौता नहीं समझदारी – गीता वाधवानी

 “पल्लवी क्या हुआ बड़ी थकी थकी और उदास सी लग रही हो “अपनी टेबल पर काम कर रही पल्लवी से उसकी कलीग तारा ने पूछा। तारा उसकी फ्रेंड भी थी और कलीग भी।   पल्लवी-” अरे यार कुछ नहीं, बस वही रोज-रोज का समझौता,एडजेस्ट कितना करूं और कब तक करूं, ऐसे कैसे चलेगा? ”   तारा-” चल … Read more

क्षमा का अमृत

गले में शब्द जैसे अटक गए हों, सुधीर कुछ बोल ही नहीं पाया। माधवराव ने फल और मिठाइयों का थैला रोहन के हाथ में दिया। फिर वे सुधीर के बिल्कुल करीब गए, अपने दोनों हाथ जोड़े और भारी, भर्राई हुई आवाज में बोले, “सुधीर मेरे भाई… इतने सालों में मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है। … Read more

एहसास का आईना

कौशल्या देवी की आंखों से पछतावे के आंसू बह निकले। वे वहीं जमीन पर बैठ गईं और रोने लगीं। “मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई दीनानाथ जी। सच में, मैं अपनी सत्ता और अधिकार के नशे में इतनी अंधी हो गई थी कि मैंने यह सोचने की कोशिश ही नहीं की कि श्रुति के माता-पिता … Read more

आँगन की देहरी और आसमान

मालती देवी धीरे-धीरे चलकर अंजलि के पास आईं। उन्होंने उसके सिर पर अपना झुर्रियों भरा, कांपता हुआ हाथ रखा। “मत रो अंजलि बहू। यह दुनिया ऐसी ही है। जब औरत कमज़ोर होती है, तो उसे रौंद देती है, और जब वह मज़बूत बनती है, तो उसे बदचलन कहने लगती है। जा, उठकर मुँह-हाथ धो ले। … Read more

खामोशी की गहराई

अमन रोते हुए बोला, “जीजाजी, मुझे माफ कर दीजिए। मैं दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ख हूँ। मैंने हमेशा आपको गलत समझा। मुझे लगा कि जो लोग मीठी-मीठी बातें करते हैं, हंसी-मजाक करते हैं, वही अच्छे होते हैं। मैं आपको बोरिंग और घमंडी समझता रहा। लेकिन आज मुझे समझ आया कि बातें तो कोई भी कर … Read more

बोए बीज बबूल के

शालिनी के पास इस मासूम लेकिन तीर की तरह चुभते हुए सच का कोई जवाब नहीं था। वह पत्थर की मूरत बनकर खड़ी रही। तभी नीरज, जो अब तक चुपचाप यह सारा तमाशा देख रहा था, आगे आया। उसने रोती हुई निधि  को अपनी गोद में उठाया, उसे चुप कराया और फिर शालिनी की तरफ … Read more

इंसानियत का स्पर्श

 सुहासिनी देवी ने एक गहरी सांस ली और बहुत ही शांत लेकिन गंभीर स्वर में बोलीं, “राधिका, तुम्हें याद है सुबह तुमने शांति के साथ कैसा बर्ताव किया था? तुमने कहा था ना कि वह एक नौकरानी है, अनपढ़ है, उसे कोई तमीज नहीं है। उसने तुम्हारे बिखरे कमरे को समेटने की ही तो कोशिश … Read more

हैसियत का आईना

 वसुंधरा देवी ने एक व्यंग्यात्मक और दर्प पूर्ण हंसी हंसते हुए कहा, “अरे रश्मि, तुम भी कैसी बात करती हो! इन लोगों का स्टैंडर्ड काजू कतली और पिस्ते वाला थोड़े ही है। इन्हें ये महंगी चीजें पचती भी नहीं हैं। इनके लिए तो ये बाजार की मीठी सोनपापड़ी ही बहुत है। आखिर हमें क्लास का … Read more

जश्न के पीछे का सन्नाटा

 लेकिन तभी हॉल के मुख्य दरवाज़े पर एक अजीब सा शोर हुआ। दरबान किसी को अंदर आने से रोक रहे थे, और वह व्यक्ति ज़ोर-ज़ोर से गालियां बक रहा था। “अरे हटो… मेरा बेटा है वो… मुझे रोकोगे तुम? मैं बाप हूँ उसका, आईएएस का बाप!” आवाज़ सुनकर सुमेधा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। … Read more

error: Content is protected !!