उजास की ओर
भानुप्रताप जी की आँखों से एक बूँद टपककर मीरा की हथेली पर गिर गई। उन्होंने कांपते हाथों से उसके सिर के बिखरे बालों को सहलाया, “पगली, काश मेरे बस में होता कि मैं समय के चक्र को बाँध लेता और आजीवन तेरी हिफाज़त करता। पर यह काया तो नश्वर है न बेटी। आज नहीं तो … Read more