बहू की समझदारी – रंजना गुप्ता

यह कहानी है एक ऐसे परिवार की, जहाँ संपत्ति और संपन्नता तो थी, लेकिन आपसी तालमेल और समझदारी की कमी थी। इस कहानी के केंद्र में है एक बहू, जिसने अपनी सूझबूझ, धैर्य और बुद्धिमत्ता से न केवल बिखरते हुए परिवार को संभाला, बल्कि सबको यह सिखाया कि असली समझदारी क्या होती है। ​सुंदरपुर गाँव … Read more

मां की ममता – खुशी

मां की ममता की कोई कीमत नहीं होती दीदी आपने मेरे बच्चों को सगी मां से बढ़कर प्यार दिया।ये तो बड़ी मामा करते नहीं थकते फिर आज ये बेरुखी क्यों ।भाभी मैं मानती हूं मेरी गलती है पर आपके प्रथम की शादी आपके बिना नहीं ही सकती आप नहीं आई तो ये रिश्ता टूट जाएगा।प्रथम … Read more

जीना सीखे – कंचन श्रीवास्तव आरज़ू

आज ब्रेकरी की दुकान पर अचानक की मुलाकात ने रोमा का भ्रम दूर कर दिया ।रेखा की बातें सुनकर लगा कि इंसान की हिम्मत,साहस और धैर्य उसके जीवन को बदल सकता है ।उसका सोचना गलत था कि हम सफ़र के गुजरने के बाद उम्र बोझ लगने लगती है सब कुछ होने के बावजूद भी जिंदगी … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – मंजू ओमर

पापा आप तो आप खाली हो नौकरी से रिटायर हो चुके हो फिर क्यों सुबह-सुबह नहा धोकर तैयार होकर बैठ गए हो। आराम से उठिए इतनी जल्दी उठ कर सबको परेशान करने की क्या जरूरत है। आपके साथ-साथ मम्मी को भी सुबह उठना पड़ता है। हां बेटा सही कह रहा है लेकिन 40 साल नौकरी … Read more

*ममता की कोई कीमत नहीं* – तोषिका

मां इस डायरी में तुम हमेशा क्या लिखती रहती हो? सावी ने अपनी मां सावित्री से पूछा। जब मैं ये दुनिया छोड़ कर जाऊं, तब तुम इसको पढ़ सकती हो, मुस्कुराते हुए सावित्री बोली। सावी अपनी मां को बचपन से लिखते हुए देखती आ रही है, पर आज तक उसको यह नहीं पता था कि … Read more

नई सोच – रश्मि वैभव गर्ग

सुम्मी …बुलाते थे सब उसको प्यार से। सुषमा नाम तो सिर्फ़ स्कूल में ही सुनती थी वह। अपने बहिन ,भाइयों में सबसे बड़ी होने की वजह से बचपन से ही ज़िम्मेदारी लेना उसके स्वभाव में ही आ गया था। पिता के यहाँ छोटा ही परिवार था ,लेकिन उसको पारिवारिक तालीम अच्छी तरह से मिली थी।जैसे … Read more

एक बहू की समझदारी – राहुल कुमार

परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल सजाया है, बिखरते हुए एक आँगन को प्रेम से पुनः संवारा है। बहू की पावन समझदारी ने मिटा दिया हर फासला, अनुभव और नई उमंगों का अद्भुत सेतु बनाया है। ​बनारस के पुराने मोहल्ले में स्थित शर्मा निवास अपनी पुरानी ईंटों और लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजों के लिए जाना … Read more

जो तुमको हो पसंद – लतिका श्रीवास्तव

शालू कितनी देर लगाओगी नाश्ता लाने में दुकान से ग्राहक लौट जाएंगे कैलाश जी ने थोड़ा खीज कर कहा तो शालू रसोई से प्लेट लिए भागती आती दिखाई दी। तुम्हे पता है मेरी दुकान सबसे पहले खुलती है।लेकिन जब मैं ही घर से देर से निकलूंगा तो कैसे खुलेगी… कैलाश जी ने प्लेट में रखा … Read more

परवरिश की मर्यादा – शुभ्रा बैनर्जी 

बिस्तर से लग चुकीं थीं मां।छाती में कफ बैठ गया था।खांसी ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही थी।सुधा ने हर जतन किए, पर स्वास्थ्य में सुधार हो ही नहीं रहा था। होमियोपैथी की दवा भी खिलाई, जो कि उन्हें कभी पसंद नहीं थी। अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा, ऐसा डॉक्टर ने बोला।सुधा हर … Read more

ममता की कोई कीमत नहीं ! – डाॅ संजु झा

रामलाल की नींद आधी रात को अचानक किसी बच्चे के रोने की आवाज से खुल गई।वे एक नजर अपनी सोई हुई पत्नी और नमिता पर डालते हैं और चुपके से दरवाजा खोलकर बाहर निकल जाते हैं। दिसंबर माह में कड़ाके की ठंढ़ पड़ रही थी। उन्होंने खुद को ऊनी शाॅल से अच्छी तरह लपेटा और … Read more

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