ममता की कोई कीमत नहीं होती ! – सुदर्शन सचदेवा

ममता की कोई कीमत नहीं होती मदर्स-डे का दिन था। पूरा शहर रंग-बिरंगे पोस्टरों, फूलों और ऑफरों से सजा हुआ था। “मां के लिए यह गिफ्ट खरीदिए…” “मां को स्पेशल महसूस कराइए…” हर दुकान पर भीड़ थी। उधर, राहुल भी ऑफिस से लौटते हुए सोच रहा था कि इस बार मां को क्या दूं। पिछले … Read more

ममता की कोई कीमत नहीं – राहुल कुमार

दौलत के तराज़ू में ममता का मोल कहाँ तुलता है, माँ के आँचल सा सुकून दुनिया में कहाँ मिलता है। चुका सके जो माँ का कर्ज़, ऐसा कोई धन बना नहीं, इस निस्वार्थ समर्पण की, सच में कोई कीमत नहीं। ​शाम ढल रही थी। घर के आंगन में तुलसी के पौधे के पास दीया जलाते … Read more

ममता की क़ीमत नहीं होती – रश्मि वैभव गर्ग

कृष्णकली नाम था उसका ..प्यार से सब कली ही बुलाते थे। ग़रीबी के साये में ही आँख खोली थी उसने। कली अपने माँ बाप की सबसे बड़ी संतान थी।उससे छोटी तीन बहिनें और थी। जीवन की कठिनाइयों में शिक्षा प्रायः गौण ही हो जाती है। दसवीं की परीक्षा में कली पूरक आई थी। पिता पर … Read more

रिश्तों की कीमत – तृप्ति देव 

कहते हैं कि घर तब तक घर नहीं बनता जब तक उसमें निस्वार्थ प्रेम की सांसें न गूंजें।  गाँव के आखिरी छोर पर बनी एक जर्जर मिट्टी की झोपड़ी सिर्फ एक ढहती हुई छत नहीं, बल्कि एक अटूट रिश्ते की गवाह थी। उस आंगन में नीम के पेड़ के नीचे बंधी रहती थी— “गौरी”। सफेद … Read more

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