आँधी में जलती मशाल

शारदा अपनी बेटियों से हमेशा एक बात कहती थी, “मेरी बच्चियों, समाज कहेगा कि लड़की की असली मंजिल उसकी शादी है। लेकिन मैं कहती हूँ कि लड़की की पहली मंजिल उसकी आत्मनिर्भरता है। जब तुम्हारे हाथ में अपनी कलम और अपने पैरों पर खड़े होने की ताकत होगी, तो दुनिया का कोई भी तूफान तुम्हें … Read more

घर की धड़कन

अनामिका की आँखों से पश्चाताप के आँसू बह निकले। उसने रुंधे गले से कहा, “भाभी, हमें माफ कर दीजिए। हम अपनी डिग्रियों और नौकरियों के अहंकार में अंधी हो गई थीं। हम सोचते थे कि सिर्फ पैसा कमाना ही सबसे बड़ी योग्यता है। पर आज आपने हमारी आँखें खोल दीं। हम कुछ घंटे भी इस … Read more

स्वाभिमान की महक

तान्या ने माँ के दोनों हाथ अपने हाथों में थाम लिए। उसकी आँखों में गुस्सा और दर्द दोनों साफ झलक रहे थे। “मम्मी, आखिर कब तक? कब तक आप इस घर में एक बेनाम मजदूर की तरह जीती रहेंगी? क्या आपकी अपनी कोई पहचान नहीं है? क्या आपका अपना कोई सम्मान नहीं है? आप क्यों … Read more

उजास की ओर एक कदम

 यह सब सुनकर जयंत की मुट्ठियों में खून उतर आया। उसका मन किया कि वह अभी जाकर उस दरिंदे का गिरेबान पकड़ ले। लेकिन जयंत जानता था कि केवल गुस्से से काम नहीं चलेगा। अगर उसने कोई कानूनी या सामाजिक तमाशा खड़ा किया, तो यह पुरुष प्रधान समाज उस वहशी को सजा देने से पहले … Read more

अनकहा समर्पण

यह डिबिया उन्होंने कल शाम को ही खरीदी थी। कल करवा चौथ से ठीक एक दिन पहले की शाम थी। दीनानाथ जी बाजार गए थे और न जाने किस अंतःप्रेरणा से उनके कदम एक पुरानी सुनार की दुकान पर रुक गए थे। उन्होंने अपनी पेंशन के बचे हुए पैसों से सोने की एक पतली सी, … Read more

जब घर फिर से मुस्कुरा उठा

 मानस ने उसके आँसू पोंछे और कहा, “तू नकारा नहीं है समर्थ। तू तो हम सबमें सबसे ज्यादा संवेदनशील है। ज़िंदगी में ठोकरें सबको लगती हैं। कल से हम दोनों मिलकर तेरे विषयों की पढ़ाई शुरू करेंगे। मैं देखता हूँ कि तू कैसे पास नहीं होता!” समर्थ के दिल से जैसे कई मन का बोझ … Read more

आँगन में धूप की दस्तक

उस मासूम बच्ची के इन भोले शब्दों ने सुभद्रा जी के संयम का बाँध तोड़ दिया। वे वहीं सोफे पर बैठ गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। उनके हाथ-पांव सुन्न पड़ गए थे। उन्हें लग रहा था कि यह सांसें यहीं थम जाएंगी। जिस घर में अभी-अभी हँसी की गूँज थी, वहाँ फिर से वही अंतहीन, … Read more

मुखौटे के पीछे का सच

यह सुनते ही जैसे राजेश्वरी देवी के पैरों तले से जमीन खिसक गई। उनके सीने पर एक जोरदार हथौड़ा लगा। बिजली की कौंध में उन्होंने उस लड़के के चेहरे को ध्यान से देखा। वही सांवला चेहरा, वही बेबस आँखें, जो उस दिन उनकी कार के पीछे हांफती हुई दौड़ी थीं। राजेश्वरी देवी का पूरा शरीर … Read more

अनकहे समझौतों की महक

मां के हाथ से दाल की कलछी छूटते-छूटते बची। पिता जी ने नजरें झुका लीं। अवनि के हलक में निवाला अटक गया। उसकी आंखें डबडबा आईं। उसके आत्मसम्मान पर ऐसा गहरा वार हुआ था कि वह अंदर तक कांप गई। मां-बाप को दुख न पहुंचे, इसलिए उसने जैसे-तैसे दो घूंट पानी पिया, अपनी थाली किनारे … Read more

कंक्रीट के जंगल में खिली धूप

 सुजाता ने हाथ जोड़ लिए। उसकी आँखों से बेबसी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसने सिसकते हुए कहा, “अंकल जी, आप जो डांटेंगे, मैं सिर झुकाकर सुन लूंगी। लेकिन मेरी मजबूरी तो समझिए। मेरे पति एक निजी कंपनी में हैं और मैं एक बैंक में। इस महंगे शहर में घर का … Read more

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