सहारा – आरती झा आद्या
“माँ, आज फिर देर हो जाएगी?” रसोई से आती हल्की-सी खनखनाहट के बीच श्रेयांश की आवाज़ में झुँझलाहट साफ़ थी। सावित्री ने पलटकर बेटे को देखा। चेहरे पर थकान थी, पर मुस्कान वैसे ही सजी थी जैसे बरसों से सजी रहती थी। “बस आधा घंटा और… तेरे पापा की दवा दे दूँ, फिर नाश्ता लगाती … Read more