मां की ममता – खुशी

मां की ममता की कोई कीमत नहीं होती दीदी आपने मेरे बच्चों को सगी मां से बढ़कर प्यार दिया।ये तो बड़ी मामा करते नहीं थकते फिर आज ये बेरुखी क्यों ।भाभी मैं मानती हूं मेरी गलती है पर आपके प्रथम की शादी आपके बिना नहीं ही सकती आप नहीं आई तो ये रिश्ता टूट जाएगा।प्रथम शादी नहीं करेगा।

कैलाश बोले मीनल तुम रो मत मै नेहा से बात करूंगा।भैया हमे माफ कर दो हम बहुत स्वार्थी हो गए थे।नहीं रे राकेश ये सब परिस्थिति का खेल होता है।ये कहानी है नेहा की जो कपूर खानदान की बड़ी बहु और कैलाश की पत्नी थी।कैलाश के पिताजी की रस्क बनाने की फैक्ट्री थी

और उनकी पत्नी कांता गुस्से की तेज थी।नेहा नाज़ुक सी फूलों में पली बेटी थी जिसके पिता का साया बचपन मै ही छिन गया था परिवार में तीन भाई बहन और थे।मां ने पिताजी की फैक्ट्री अपने देवर को सौंप दी और देवर मंगेश ने भी ईमानदारी से अपने भाई के परिवार का साथ निभाया।

बच्चे बड़े हुए तो उन्हें काम सिखाया क्योंकि चाचाजी की भी दो बेटियां ही थी। सारा परिवार मिल कर रह रहा था।  चाचा जी ने देख भाल कर कैलाश की शादी नेहा से की। नेहा गृहकार्य में निपुण थी हर काम अच्छे से करती घर संभालती थी ।परंतु कांता किसी ना किसी बात पर नेहा से चिड़ी ही रहती।कैलाश सुबह निकलते अपने पिता जी के साथ नाश्ता खाना सब नेहा देखती।घर में छोटा देवर राकेश कॉलेज में पढ़ता था

उसकी भी नित नई फरमाइश सब नेहा खुशी खुशी करती।नेहा की शादी को दो साल हो गए पर उसकी गोद खाली थी ।डॉक्टर को दिखाया सब नॉर्मल था।कैलाश कहते जब ईश्वर चाहेंगे तब तुम्हारी  गोद भर जाएगी।पर कांता कहती इसी में कमी है तेरी दूसरी शादी करती हूं।मां आप ऐसी बाते मत किया करो कैलाश हमेशा कहते।

सुबह सबके जाते ही कांता शुरू हो जाती धुले हुए बर्तन फिर आटा लगवा कर मंजवाती।कभी अलमारियाँ खाली कर देती।की लगाओ।दिन में खाना फैक्ट्री जाता कांता को तवे से उतरी रोटी पसंद थी ।3 रोटी बनाने में एक घंटा लग जाता इधर राकेश की पढ़ाई पूरी हुई उसे बहुत बड़ी कंपनी में नौकरी लग गई लाखों में उसकी तनख्वाह थी ।उसकी शादी मीनल से हुई मीनल एक छोटे परिवार में आई थी

जहाँ बहुत तंगी थी। यहां आकर तो उसे सब मिल गया था।मीनल को देख राकेश पहली नज़र में अपना दिल हार गया वो सुंदर ही बहुत थी। कान्ता की बहन ये रिश्ता बताया था।कांता बहुत लड़ी थी उससे क्या कंगालों के घर रिश्ता करवा दिया तूने।दीदी मैने तो सिर्फ फोटो दिखाया था अब राकेश को लड़की पसंद आ गई तो मै क्या करूं।मीनल तेज़ स्वभाव की थी वो कांता की कोई बात नहीं सुनती थी क्योंकि उसे राकेश का पूरा समर्थन था।

शादी के तीसरे महीने ही मीनल गर्भवती हो गई पहले ही वो कोई काम नहीं करती थी अब तो वो नेहा से अपने लाड़ पूरे करवाती और नेहा भी खुशी खुशी करती।खाना डॉक्टर,उसकी सेहत खाने का ध्यान नेहा रखती।9 महीने बाद मीनल ने गोल मटोल से बेटे को जन्म दिया सबने कहा नेहा के कारण तेरा बेटा इतना गोल मटोल हुआ है। डिलीवरी के बाद भी नेहा बच्चे और मीनल का बराबर ध्यान रखती।

रात को भी वो मीनल को सोने देती और खुद प्रथम को संभालती।सारा दिन वो प्रथम का ध्यान रखती।मीनल किटी पार्टी और सब में बिजी रहती और प्रथम पूरी तरह अपनी बड़ी मां का हो गया। कांता बड़बड़ करती रहती इसी के पास अपना बच्चा छोड़ देती हैं।ये बेऔलाद है कही तेरे बेटे को भी ना खा जाये।पर अब नेहा प्रथम में खोई रहती।जल्द ही मीनल ने फिर खुशखबरी सुनाई ।

नेहा खुद को भूल सब का ध्यान रखती।मीनल सारा दिन आराम करती और नेहा काम।कैलाश बोलते भी जरा खुद पर भी ध्यान दो अभी टाइम नहीं है प्रथम को स्कूल भेजना है।उधर मीनल की डिलीवरी हुई ट्विन्स थे।राहुल और रश्मि अब तो मीनल के पैर जमीन नहीं छूते थे।कांता भी उसका गुणगान करती मेरी बहु ने घर को वारिस दे दिये।

आज बच्चों का नामकरण होना था।पहली बार मीनल की मां बहन बाप उसके घर आए थे।मीनल को सोने में लदी देख उसकी मां की आंखे फट गई।नेहा आगे आगे कर रही थी सब काम संभाल रही थी।प्रथम भी बड़ी मां बड़ी मां कर उसी के पास जा रहा था।सारे रिश्तेदार कह रहे थे लगता ही नहीं ये मीनल का बेटा है ये तो नेहा का बेटा है।सब अच्छे से हो गया।मीनल की मां कुछ दिन रुक गई की दो बच्चे संभालने है।

वो सारा दिन खाती या  मीनल का ब्रेन वाश करती।आज नेहा की तबीयत ठीक नहीं थी। सुबह का चाय नाश्ता और प्रथम का लंच जैसे तैसे बना वो लेट गई फिर प्रथम उसके पास आया मां रेडी कर दो।प्रथम गया है और नेहा को लूज़मोशन और विमिंट्स होने लगी।वो दवाई ले सो गई।कांता का शोर मचाना शुरू हो गया पता है मुझे गरम नाश्ता चाहिए। सो रही हैं दस बजे तक कैलाश बोले मां आज उसकी तबीयत खराब है इसलिए घर में इतने लोग हैं।

आज आप मीनल को बोल दो।उसे क्यों कहूँ आराम कर रही है नेहा का कौन सा कोई बाल बच्चा है।मां तुम भी ना बस कैलाश ने काम वाली माला को नेहा का ध्यान रखने का कह कैलाश दुकान गए।दिन तक नेहा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई उसने कैलाश को बुलाया और कैलाश उसे हॉस्पिटल ले गया।

नेहा को एडमिट किया गया तीन चार दिन वो अस्पताल में ही थी घर से कोई देखने नहीं आया कैलाश ने कहा भी तुम सबकी चिंता करती हो कोई देखने तो क्या हाल तक नहीं पूछा किसी ने? अरे मीनल बिचारी तो तीन बच्चों के साथ फंसी होगी।मम्मी जी तो वैसे किसी को नहीं पूछेंगी।शाम तक नेहा को डिस्चार्ज मिल गया। वो घर आई बहार कोई नहीं दिखा तो वो मीनल के कमरे की तरफ चल पड़ी। मीनल कह रही थी पता ये नेहा कब ठीक होगी बैठे बैठे सब मिल जाता था।मीनल की मां बोली पर तेरा बेटा सारा दिन उसी के पास रहता है।रहने दे तभी तो सारे काम हो रहे है वरना इन तीन को पालना कितना मुश्किल है बेवकूफ अपने पति को नजर अंदाज कर मेरे बेटे के कामों में लगी रहती हैं।बेटा तो मेरा है नौकर भी बच्चे पालते हैं तो क्या वो मां बाप बन जाते है।जब तक ये दोनों बड़े नहीं होते तभी तक ये प्यार का ड्रामा है।फिर क्या इसे अपने पास फटकने दूंगी।खाना कितना अच्छा बनाती हैं आज कल उस काम वाली के हाथ का खाना पड़ता हैं।जल्दी आए मेरे बच्चों की आया।

हा री रात भी जाग लेती हैं वो तभी तो मम्मी पैसे देकर इतनी एफिशिएंट काम वाली नहीं मिलती यहां तो फ्री में मिली है दोनों मां बेटी हस पड़ी।नेहा रोते हुए अपने कमरे में आ गई।वो कैलाश से बोली मुझे मां की बहुत याद आ रही है क्या आप मुझे कुछ दिन छोड़ देंगे।कैलाश बोले तुम कह रही हो।तुम्हारे भाई मां भाभी कब से बुला रहे हैं तुम ही नहीं जाती पर अब जाना चाहती हूं।उस दिन नेहा कमरे से बाहर नहीं आई।खाना भी माला ने ही बनाया। कांता मीनल और नेहा के नाम से चिल्ला रही थी।मीनल को उस दिन खाना परोसना पड़ा। वो रात को नेहा के कमरे में आई बोली दीदी अपनी जिम्मेदारी संभाले मै तो थक गई आज प्रथम ने इतना तंग किया बड़ी मां के पास जाना है।

छोटे भी दोनो आपके पास आना चाहते हैं।मां भी वापस जाएंगी आपके बच्चे आपको संभालने है।नहीं मीनल फिलहाल तो मै मां के पास जा रही हूं मेरी तबीयत अच्छी नहीं है तो प्लीज़ तुम अपनी मां को रोक लो। मीनल बोली आप ऐसे कैसे जा सकती है घर कौन संभालेगा।तुम तुम्हारा भी तो घर है आवाज सुन राकेश भी आ गया क्या हुआ? देखो तुम्हारी भाभी को अभी 4 दिन अस्पताल रह कर आई अब अपनी मां के घर जा रही है।इनका तो ना बाल ना बच्चा जरा मेरी मदद हो जाती थीं इसमें भी परेशानी हो गई।भाभी आप यही रह जाओ मीनल तीन बच्चें कैसे संभालेगी।नहीं राकेश मेरी तबियत ठीक नहीं है।तबियत ठीक नहीं है तो घूम क्यों रही है कांता बोली।अरे जाने दो बहु को बिचारी सारा दिन घर परिवार में लगी रहती थोड़ा आराम मिल जाएगा।ससुर जी बोले कांता बोली हा यहां तो आराम करती ही नहीं है सारा दिन सोती रहती है।ठीक है अब उसे जाने तो कुछ दिन में आ जाएगी।

कैलाश अगली सुबह नेहा को उसके माता पिता के यहां देहरादून छोड़ आए।इतने सालों बाद बेटी को आया देख मां बहुत खुश हुई।भाई रजत और उसकी पत्नी राधा भी खुश थें कि दीदी आई है।मां आज कल छोटे भाई रजत के पास थी क्योंकि बड़े भैया राघव और उनकी पत्नी परिवार सहित बाहर गए हुए थे।राधा जल्दी से चाय नाश्ता लाई।चाय पीकर नेहा बोली मै थोड़ा लेटना चाहती हूं मां।हा हा क्यों नहीं।रजत और कैलाश बाहर चले गए।फैक्ट्री चाचा जी के घर होते हुए

वो दोपहर को आए।दिन में चाची चाचा भी यही आ गए सबने मिलकर खाना खाया और कैलाश वापस जाने के लिए निकले उन्होंने सिर्फ नेहा से इतना कहा अपना ध्यान रखना किसी बात को दिल पर नहीं लगाना।जब कहेगी मैं लेने आ जाऊंगा।नेहा बहुत बेचैन थी शाम को सबके जाने के बाद मां आई क्या बात है मेरी बच्ची नेहा ने रोते रोते पूरी कहानी अपनी मां को सुना दी।मां औलाद देना ना देना ईश्वर के हाथ में है।सब मुझसे काम करवाते रहे और बदले में मुझे क्या दिया बाँझ का खिताब ।

सबके बच्चों को मैने अपने बच्चों सा प्यार किया सही नहीं किया मेरे साथ ईश्वर ने सबकी गोद हरि की फिर मेरे साथ ऐसा क्यों?दीदी आप परेशान मत होइए भगवान के घर देर है अन्धेर नहीं।नेहा को घर की बच्चों की याद आ रही थी पर इस बार उसकी आत्मा छलनी हो गई थी।नेहा दिन पर दिन कमजोर हो रही थी।इसलिए नेहा की मां दमयंती और भाभी  रागिनी उसे डॉक्टर के यहां ले गए। डाक्टर ने जो बताया उस पर किसी का विश्वास नहीं हुआ।

नेहा गर्भवती थी ये खबर कैलाश को मिली तो भागते हुए आए और नेहा को घर ले गए।माला को सख्त हिदायत थी सिर्फ नेहा के साथ रहे।नेहा के नखरे उठाते देख मीनल को गुस्सा आने लगा उसको लगता अब तक जो सब मेरे बच्चों का था वो इसमें और इसके बच्चों में भी बंटेगा अब तो वो नेहा से सीधे मुंह बात नहीं करती खाना भी टाइम पर नहीं बनाती अपने बच्चों को नेहा के पास भी नहीं जाने देती।नेहा कमजोर हो रही थी।डॉक्टर ने कहा इनका ध्यान रखो इसलिए कैलाश उसे मायके छोड़ आए।नियत समय पर चांद जैसी बेटी को जन्म दिया जिसका नाम चांदनी रखा गया।चांदनी को देख मीनल और चिढ़ती थी सब उसे प्यार करते और रश्मि को डाट देते थे उसकी शरारतों के लिए।मीनल ने एक दिन जलन में इतना बड़ा कदम उठाया कि जिसने परिवार को ही अलग कर दिया।इतना होने पर भी नेहा बच्चों का खाना नाश्ता सब करती सब भूल वो आगे बढ़ गई। गर्मियों की दोपहर थी सब सो रहे हैं।नेहा किसी काम से बाहर गई थी चांदनी को सुलाकर और माला से ध्यान रखने का कह ।माला को काम में लगा  मीनल ने चांदनी को उठाया और गर्म फर्श पर रख दिया।गैलरी में दरवाजा बंद होने से बच्ची के रोने की आवाज नहीं आई।

2 घंटे बच्ची धूप में पड़ी रही और रोती रही रोते रोते वो बेहोश हो गई जब नेहा आई तो उसने चांदनी को बिस्तर पर नहीं पाया सब तरफ देखा उसका ध्यान अचानक गैलरी की तरफ गया जहां चांदनी पड़ी थी उसने चांदनी को उठाया वो तप रही थीं सीधा वो डॉक्टर के पास भागी कैलाश पहुंचे डॉक्टर बोले बच्ची की पीठ जल गई है गर्मी के कारण वो बेहोश है तीन दिन चांदनी अस्पताल में रही और कैलाश ने घर आ कर माला की क्लास लगाई।माला बोली मै तो काम कर रही थी।चांदनी होने के बाद कैलाश ने अपने कमरे में एक सीसीटीवी लगवा दिया था ताकि वो इधर उधर हो तो नेहा और कैलाश बच्ची को देख सके उसमें पता चल गया कि किसका काम है।

मीनल मुकर गई और राकेश भी पत्नी का पक्ष ले कर लड़ने लगा।भाई को इतना जलील किया कि कैलाश ने घर छोड़ने का फैसला ले लिया। कांता और घनश्याम ने रोका पर वो नहीं रुके।वो वहां से दूसरे शहर आ गए वहां एक डिपार्टमेंटल स्टोर खोला अब वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ वहां रहने लगे राकेश ने घर प्राॅपर्टी सब अपने नाम करवा लिया दुकान भी किसी और को चलाने को दे दी।

मां बाप को मीनल ने रोटी का मोहताज कर दिया।इसी ग़म में घनश्याम की मौत हो गई तभी नेहा कैलाश और चांदनी आए थे। तब भी राकेश ने बहुत बदतमीज़ी की कांता को अब समझ आ रहा था कि मैने अपने राम जैसे बेटे की और बहु की कीमत नहीं समझी।नेहा को देख प्रथम आगे आया बड़ी मां आप कैसी हैं? उसने हाल चाल पूछा पर मीनल उसे वहां से ले गई।

फिर कुछ समय बाद सास चल बसी तो वहाँ जाने का जवास ही खत्म हो गया आज इतने सालों बाद इन लोगों को यहां देख नेहा हैरान थी। आज सुबह घंटी बजी एक सुदर्शन युवक खड़ा था अंदर आते ही उसने पैर छुए और बोला बड़ी मां कहा है।कैलाश उसे लाये वो नेहा के पैरो में गिर पड़ा मां आपने मुझे पाला प्यार दिया ये तो एक बच्चा भी समझता है कहा निस्वार्थ प्रेम  मिलता है। आपने मुझे प्यार दिया आपके जाते ही मै बड़ा भाई हो गया जो अपने भाई बहनों को सम्भेलता बस

मां किटी सहेलियों में व्यस्त उनके पास पैसा था पर प्यार नहीं जब मैं कॉलेज गया बहुत पता किया आप लोगों का पर नहीं पता चला अब रश्मि और राहुल इतना बिगड़ गए है कि उन्हें आईना दिखा रहे हैं।अब तक तो मै उन पर आश्रित था पर अब मै कमाता हूं मैने निशा से भी कह दिया है कि शादी तभी होगी जब बड़ी मां आएगी मां मै इंतजार करूंगा।शादी का दिन आ पहुंचा सब आ गए अभी तक नेहा नहीं आई थी

सब उसी का इंतजार कर रहे थे।राकेश बोले मुझे लगता है भाई भाभी नहीं आयेंगे क्यों नहीं आयेंगे मेरे बेटे की शादी है।नेहा पीछे से बोली बेटा मै सदैव तेरी मां रहूंगी।जी भाभी आप ही इसकी मां है शादी संपन्न हुई हर कोई आनंदित था सबसे ज्यादा प्रथम उसे बड़ी मां मिल गई थी।बेटा ममता की कोई कीमत नहीं होती हर मां सिर्फ अपने बच्चों से प्यार चाहती है तू भी आगे बढ़ कर अपनी मां को माफ कर उनका आशीर्वाद ले।प्रथम आगे बढ़ा राकेश और मीनल ने उसे गले लगा लिया।प्यार को और मां की ममता को एक ही भाषा समझ आती हैं वो है प्यार आप जितना दोगे उतना मिलेगा।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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