नींव का मौन पत्थर
सरिता की आँखों से एक बूँद आँसू छलक कर गाल पर ढुलक गया। आज उसके भीतर बरसों से जमी बर्फ पिघलने लगी थी। उसने अपने काँपते होठों को संभाला और बहुत ही संयमित आवाज़ में कहा, “दिनेश जी, शादी के बाद इस घर को संभालना और अपना पूरा जीवन इस चौखट पर न्योछावर करना मेरी … Read more