दर्द – मधु वशिष्ठ

बहुत समय बाद हैदराबाद में जब दोनों सहेलियां मिलीं तो उनकी बातें ,हंसी ,खुशी कुछ भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी।  बहुत समय बाद मिली थी इसलिए अपने सारे दर्द और खुशियां भी साझा कर रही थी।

 डोमिनोस में जाने वह कब से बैठी थीं तभी हंसते हुए मीनल ने राखी से पूछा तू तो कह रही थी कि तेरे ससुराल वाले तुझे तेरे पति के साथ अकेले नहीं आने देंगे परन्तु तेरे में इतनी हिम्मत कहां से आ गई कि तूने अपने ससुराल में सबको ऐसे कह दिया, अगर मैं घर का काम नहीं करूं तो? हां—-!

 बिल्कुल अगर मैं ऐसा नहीं कहती तो आज भी मैं वहीं होती। हैदराबाद में मैं तभी तो आ पाई हूं वरना तो!!!

  पाठक गण आई आपको इन दोनों बात करने वाली सखियों से मिलाएं।      

 राखी की शादी हुए लगभग 10 महीने हो गए थे ससुराल में भरा पूरा परिवार था। जेठ जेठानी और दो ननदें। विनय हैदराबाद में रहता था और शादी करते समय विनय के घर वालों ने कहा था कि क्योंकि विनय के अलग रहने पर उन्हें बहुत चिंता रहती है इसीलिए वह शादी करके राखी को विनय के साथ भेजना चाहते हैं। सगाई के बाद से ही राखी मानसिक रूप से हैदराबाद में अपना घर बसाने के लिए पूर्णतया तैयार थी

लेकिन शादी के बाद सासु मां ने यह कहकर रोक दिया कि अभी पहले विनय थोड़ा बड़ा घर  ले ले उसके बाद राखी को भी भेज देंगे ‌। मन मारकर राखी को ससुराल में ही रहना पड़ा। उसको भी यही लगता था कि एक दिन तो उसे हैदराबाद चले ही जाना है, फिर तो ससुराल में मेहमान के जैसे ही आना होगा। इसलिए वह अच्छी बहू बनने का पूर्णतया प्रयत्न  करती थी। सुबह उठकर जेठानी के बच्चों का टिफिन पैक करवाना ,

कपड़े धोना वगैरा-वगैरा लगभग घरके सब काम उसने ही समेट  लिए थे। लगभग हर इतवार को ननद रानी को देखने वालों का भी आना जाना लगा ही रहता था। घर की सफाई और खाने-पीने का काम अक्सर बढ़ ही जाता था ।उसको पूरा यकीन था कि रक्षाबंधन पर जब विनय आएगा तो वह उसके साथ ही हैदराबाद चली जाएगी ।

फोन पर भी वह दोनों ऐसा ही कार्यक्रम बनाते थे। इसी कारण उसने सारा सामान बांधकर तैयारी भी कर ली थी। लेकिन जब रक्षाबंधन के बाद जाने का समय आया तो सासु मां ने विनय को राखी बहु को ले जाने के लिए साफ मना कर दिया था। उनका कहना था क्योंकि अभी बहन की शादी होनी है अगर बड़ा घर वहां पर ले लेगा तो बहन की शादी पर खर्चा कैसे कर पाएगा? सच बात तो यह थी कि उन्हें घर में काम करने के लिए राखी के रूप में एक बहुत अच्छा सेवक मिला हुआ था

तो वह उसे कैसे छोड़ देते। विनय के जाने के पश्चात वह सासू मां के कमरे के बाहर से जब निकल रही थी तो उसने सुना ससुर जी कह रहे थे विनय जब कह रहा था तो बहू को जाने देती , ललित रानी भी कमरे में ही थी, तब सासू मां ने कहा, अभी छोटी को देखने के लिए बहुत लोग आते हैं घर का सारा काम अभी तो यह समेट लेती है, सब कुछ आराम से चल रहा है तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा क्या? आखिर एक न एक दिन तो बहू नहीं जाना है कम से कम जब तक चोरी की शादी ना हो जाए तब तक यूं ही काम चलने दो। अभी विनय भी ज्यादा पैसे भेज पा रहा है और यहां भी कामवाली के पैसे बच रहे हैं।

     माता-पिता के अनुरोध करने पर अबके विनय जब अकेला ही वापस जा रहा था तो दोनों को ही बहुत बुरा महसूस हो रहा था। सासू मां की इस बात पर राखी को बहुत गुस्सा आया उन्हें विनय का बिल्कुल ख्याल नहीं है वह  विवाहित होकर भी अकेला ही रह रहा है। अपने स्वार्थ के कारण बहु को भी नहीं भेजना चाहते।

 हालांकि आज्ञाकारी विनय ने  राखी से कहा था वह दीपावली पर घर आएगा तो मांजी से उसे भी साथ ले जाने के लिए जोर देगा लेकिन—। यदि सब कुछ ऐसा ही शहर चला रहा तो उसे दिवाली पर भी नहीं जाने दिया जाएगा। 

विनय के जाने के बाद एक दिन तो राखी यूं ही उदास थी उसे शायद गुस्सा भी बहुत आ रहा था। दूसरे दिन वह बिस्तर से उठी ही नहीं और ना ही उसने कोई घर में काम किया। क्योंकि अब सबको काम ना करने की आदत पड़ गई थी इसलिए सबको भी बहुत बुरा लगा। ननद रानी ने जब उसे रसोई में आकर काम करने के लिए कहा तो उसने स्पष्ट रूप से मना कर दिया कि मेरी तबियत खराब हो रही है और अब मेरे से काम नहीं होता। उसके बाद उसने अपना यही नियम बना लिया था कि वह वही काम करती थी जो कि वह करना चाहती थी। अब वह सब के काम नहीं करती थी सिर्फ अपना ही काम करके बाकि समय कोई भी किताब पढ़ने या मोबाइल पर वीडियो देखने मैं ही लगी रहती थी। एक दिन ननद के यह कहने पर कि अगर आपसे काम नहीं हो रहा तो अपने मायके क्यों नहीं चली जाती हो? जाने इस बात में क्या था कि राखी बुरी तरह से भड़क गई और बोली मायके क्यों जाऊं? अपने ससुराल में बैठी हूं ,और मन नहीं लगेगा तो अपने पति के घर हैदराबाद में चली जाऊंगी।

 तब से काम काम काम के लिए कह रहे हो अगर मैं घर का कोई भी काम ना करूं तो? हमारे दर्द को कोई नहीं समझता, सबको अपने काम की लगी है।उसके बाद किसी ने कुछ नहीं कहा और दीपावली तक का टाइम आराम से कटा। 

       हंसते हंसते राखी ने बताया कि मुझे नहीं पता था कि मेरे पहली बार जवाब देने का असर यह होगा कि अबकी दीपावाली पर मुझे विनय के साथ आने के लिए किसी ने भी नहीं रोका। 

दोनों हंस पड़ी इतने में एक और कॉफी आ गई थी।      

    पाठकगण आप ही बताइए क्या राखी का ऐसा करना सही था?  या कि माता-पिता का राखी को रोकना सही था? 

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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