भरोसा – मंजू ओमर

ये क्या दीदी ये कैसा व्यवहार करते है आप लोग ज्योति के साथ। मैंने तो आपको और आपके व्यवहार को देखकर आपके बेटे पंकज के लिए ज्योति का रिश्ता दिया था। मुझे नहीं पता था आप मेरे भरोसे को इस तरह तोड देंगी। वो तो मै न आती आपके घर तो मुझे पता ही न … Read more

परवरिश की मर्यादा – शुभ्रा बैनर्जी 

बिस्तर से लग चुकीं थीं मां।छाती में कफ बैठ गया था।खांसी ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही थी।सुधा ने हर जतन किए, पर स्वास्थ्य में सुधार हो ही नहीं रहा था। होमियोपैथी की दवा भी खिलाई, जो कि उन्हें कभी पसंद नहीं थी। अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा, ऐसा डॉक्टर ने बोला।सुधा हर … Read more

भरोसा – खुशी

सुलेखा अमीर मां बाप की इकलौती बेटी थी।घर में लक्ष्मी पानी भरती थी।उसे माता पिता ने बैंगलोर जैसे शहर में पढ़ने भेजा ।पढ़ने में होशियार,सुंदर समझदार  ऐसी थी सुलेखा कॉलेज में आई तो उसकी पहचान जतिन से हुई।जतिन का परिवार बड़ा था। माता पिता श्याम लाल और रज्जो दो भाई बहन सुनील और पूजा । … Read more

भरोसा – मधु वशिष्ठ

ऑफिस में इतने साल बाद अचानक गिन्नी को देखकर मैं हैरान रह गई। आप!!!! नहीं तुम!!! गिन्नी?? हां जी , गिन्नी !!कह कर वह खिलखिला कर हंस दी। शायद हम 20 साल बाद मिल रहे थे। एक समय हम दोनों की ही नई नौकरी लगी थी, 3 साल बाद दोनों का तबादला अलग-अलग विभाग में … Read more

प्यार और भरोसा – संगीता त्रिपाठी 

   रीमा दो दिन से फोन नहीं उठा रही थी ,उसके बाद फोन स्विच ऑफ आने लगा ,मयंक ने सोचा शायद घर में व्यस्त होगी और फोन चार्ज नहीं कर पाई होगी ,लेकिन जब चार – पांच दिन बीत गए रीमा का फोन नहीं आया तो मयंक का माथा ठनका,रोज बात करने वाली रीमा का अचानक … Read more

*भरोसा* – तोषिका

तुम्हे मुझ पर *भरोसा* है ना? अपनी पत्नी रेखा का हाथ पकड़ते हुए अंकित बोला। खुद से भी ज्यादा। मुझे पता है, आप जो भी करोगे वो सही ही करोगे। तो फिर चलो यहां से, जल्दबाजी में अंकित बोला। रेखा बोली “कहा जाना है, अभी तक तो रिया भी स्कूल से नहीं आई है।” वो … Read more

इंसानियत का भरोसा – गीता वाधवानी

 नंदिनी अपने दोनों बच्चों के साथ अपने घर की दीवारों को देखकर लगातार रो रही थी। दोनों बच्चे उदास थे और उसकी तरफ देख रहे थे। उसका बेटा अमित लगभग 16 साल का था और बेटी कनक 10 साल की।   तीनों मिलकर घर का सामान पैक कर रहे थे और उठाकर आंगन में रखते जा … Read more

भरोसा – विनीता सिंह

गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था, जहाँ 14 साल की अनाया अपनी माँ के साथ रहती थी। उसके पिता कई साल पहले शहर कमाने गए थे,  फिर कभी लौटकर नहीं आए। माँ सिलाई करके घर चलाती थीं और अनाया पास के सरकारी स्कूल में पढ़ती थी। , माँ-बेटी के बीच बहुत प्यार और भरोसा … Read more

भरोसे की डोर – सुदर्शन सचदेवा

“मम्मी जी, आप आराम कर लीजिए… दुकान मैं संभाल लूंगी।” रिया ने धीरे से कहा तो सविता जी ने चश्मे के ऊपर से उसे देखा। चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन मन में सवाल भी था। आजकल की बहुएँ कहाँ घर और कारोबार दोनों संभालती हैं? दो दिन जोश दिखाती हैं, फिर अपने फोन और … Read more

भरोसा – संध्या सिन्हा 

हेलो जय! भैया की तबियत ठीक नहीं है.. किसी बड़े डॉक्टर को दिखा दो। ठीक है भा… भी, (जय पूरी बात भी ना कर पाया था कि… उसकी पत्नी नीता ने फ़ोन काट दिया और बोली  “क्या ठीक है.. तुम भी ना जय समझते नहीं हो… ये भाभी का शहर आने का बहाना है और … Read more

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