गिरवी रखे कंगन – नम्रता सिंह
जेठ की तपती दुपहरी थी। सूरज आग उगल रहा था और गांव की पगडंडियों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। अमराइयों में छिपी कोयल भी गर्मी के मारे चुप थी। इसी सन्नाटे को चीरती हुई एक सफेद रंग की बड़ी गाड़ी धूल उड़ाती हुई ‘चौधरी विला’ के पुराने लेकिन भव्य लोहे के गेट पर आकर रुकी। … Read more