मेरे पास समय नहीं है – करुणा मलिक
शाम की धुंधली रोशनी खिड़की से छनकर ड्राइंग रूम में आ रही थी। 65 वर्षीय रमाकांत अपनी आराम कुर्सी पर बैठे दीवार घड़ी की टिक-टिक सुन रहे थे। टिक… टिक… टिक…। यह आवाज़ उन्हें हमेशा याद दिलाती थी कि समय कैसे रेत की तरह उनकी मुट्ठी से फिसलता जा रहा है। रमाकांत एक रिटायर्ड बैंक … Read more