अमीरी – खुशी

मधु तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।पिता एक छोटी सी साड़ी की दुकान पर काम करते थे।मां घर में ब्लाउज सिलती पीको फॉल का काम करती। मधु कॉलेज के दूसरे वर्ष में थी वहां कॉलेज के एनुअल फंक्शन में रतिराम जी आएं थे जिनका कारखाना था समाज के प्रतिष्ठित लोगों में उनकी गिनती थी। … Read more

आजादी की चाह या बड़ो की सीख !! – स्वाती जैंन

इस घर में मुझे कभी शांती मिलेगी या नहीं , रोज रोज तुम सास- बहु का क्लेश सुनकर कान गर्म हो गए हैं मेरे , मानव अपना ऑफिस का बैग पटकते हुए बोला , ऑफिस से थककर घर आता हुं और यहां तुम दोनों की किचकिच सुनने को मिलती हैं ! मानव के पिता राजेश … Read more

अनोखा बंधन – पूजा अरोड़ा

बारात बड़ी धूमधाम से निकली थी, सब लोग बहुत मस्ती कर रहे थे, घोड़ी पर बैठा वेद बहुत खुश था, खुश होता भी क्यूँ ना आखिर एक लंबी लड़ाई जीतकर तो इस खुशी को प्राप्त करने में सफल हुआ था | सबसे अधिक खुशी उसे अपनी दादी को देखकर हो रही थी जो धीमी गति … Read more

इन आंखों में ही जिंदा है मेरा बेटा – डॉ बीना कुण्डलिया 

देख नहीं सकती, अरे अंधी है क्या ?  जाने कैसे कैसे लोग सड़क पर उतर आते हैं ?  तेज रफ्तार फराटे दार भागती गाड़ी में से गर्दन निकाल उस नवयुवक के बोल सुनकर उसकी गाड़ी के धक्के से नीचे गिरी कंचन ने खुद को तो बहुत ही मुश्किल से संभाला ।  कंचन बड़बड़ाई मैं तो … Read more

संतुलन – एम. पी. सिंह 

अशोक और आशा कि शादी को ज्यादा दिन भी नहीं हुए थे कि ननद भाभी मैं शीत युद्ध शुरू हो गया. ननद कोमल वैसे तो भाभी कि हमउम्र और पड़ी लिखी थी, पर माँ और भाई का आशा कि प्रति प्यार सहन नहीं हो रहा था. कोमल रोज़ शाम को भाई से भाभी कि शिकायत … Read more

बड़ी बहू – गरिमा चौधरी 

सुबह के आठ ही बजे थे, पर शर्मा हाउस की रसोई में पूरा युद्ध–सा माहौल था। गैस पर चाय चढ़ी थी, दूसरे बर्नर पर दूध उबलने को था, तवे पर पराठा सिक रहा था और बीच में घिरी खड़ी थी काव्या – घर की बड़ी बहू। तभी पीछे से तीखी आवाज़ आई –“भाभी! कितनी बार … Read more

कभी–कभी बहू की इज़्ज़त का बोझ भी पति के कंधों पर होना चाहिए – ममता  यादव

“आख़िर कब तक मैं ही इन सबकी ख़ुशी के लिए अपनी हर छोटी–बड़ी इच्छा कुर्बान करती रहूँगी, आदित्य? मेरी पसंद, मेरे मन का कोई मोल नहीं तुम्हारे लिए?”स्नेहा अलमारी से कपड़े निकालते–निकालते अचानक रुक गई। उसकी आवाज़ में रूका हुआ रोष और बरसों की थकान दोनों घुल गए थे। आदित्य लैपटॉप बंद करते हुए बोला,“फिर … Read more

मायका और ससुराल दो अलग दुनिया नहीं – मुकेश पटेल

 रीना को  ऑफिस की छुट्टियाँ मुश्किल से मिली थीं और उसने मन ही मन तय कर रखा था – “इस बार तो पूरा हफ्ता बस आराम… सीरियल, मोबाइल और चैन की  नींद… किसी रिश्तेदार, किसी पड़ोसी के चक्कर में नहीं पड़ना।” अंदर से उसकी सास सरोज की आवाज़ आई – “रीना बेटा, जरा इधर तो … Read more

 बेचारी नहीं हैं हम – विभा गुप्ता 

        आज सुबह से ही किशोरी के छोटे-से घर में लोगों का आना-जाना लगा हुआ था।सभी आकर उसे बधाई देते और कहते,” वाह किशोरी! तेरी बेटी ने तो कमाल कर दिया।” जवाब में वो सिर्फ़ मुस्कुरा देती क्योंकि वो जानती थी कि कल तक यही लोग तो मेरी बेटी को मर जाने की बद्दुआ देते रहे … Read more

जब मां की नसीहत बेटी पर पड़ी भारी – स्वाती जैंन

सोनी , तुम सास के पास गांव जाकर क्या करोगी ? उन्होंने वैसे भी वहां अपनी बेटी को बुला रखा हैं तो तुम भी यहां मायके दिवाली मनाने आ जाओ , सास – ससुर को कितना भी अपना बना लो वह कभी माँ- बाप नहीं बन सकते ! सोनी की मां ममता जी सोनी से … Read more

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