Betiyan Team
सच्ची कमाई
साठ वर्षीय सुलोचना जी अपने दोनों हाथों में ताजी सब्जियों, फलों और कुछ घरेलू सामानों से भरे भारी थैले पकड़े, अपनी सोसायटी के मुख्य गेट से अंदर दाखिल हो रही थीं। उम्र के इस पड़ाव पर घुटनों में गठिया का दर्द अक्सर उन्हें परेशान करता था, लेकिन आज उनके चेहरे पर एक अजीब सी ऊर्जा … Read more
लाल सिल्क की साड़ी – सुनीता माथुर
सुष्मिता एकांत कमरे में बैठी हुई अपने बचपन के ख्यालों में खो जाती है कैसे अपनी मां से लाल “सिल्क की साड़ी” की मांग करती रहती थी! बचपन से ही सुष्मिता को अपनी मां की लाल “सिल्क की साड़ी” जिस पर सिल्वर की लेस लगी हुई थी बहुत ही प्यारी लगती थी और वह हमेशा … Read more
सिल्क की साड़ी – परमा दत्त झा
आज रामदयाल काफी दिनों के बाद खुलकर हंसा था।कारण बहू और पोती खुशी से भरी थी। बाबा मामा की शादी होने वाली है -वह खुशी से चहक रही थी। अच्छा कब?-यह भी प्रतिप्रश्न किया। अगले महीने,हल्दी,मेंहदी और सारी चीजें इसी बनारस में होगी। लड़की बनारस की है -बहू सारी बात खुशी से बता रही थी। … Read more
रेशम की साड़ी – लीनू अहलूवालिया
मैं घर की सबसे छोटी बेटी थी। उस समय मेरी उम्र लगभग नौ वर्ष थी। पिताजी को गुज़रे चार वर्ष हो चुके थे। उनके जाने के बाद माँ ने अकेले ही हम बहनों का पालन-पोषण किया। आर्थिक तंगी थी, जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी माँ ने कभी हमें प्रेम, संस्कार और आत्मसम्मान की … Read more
कलंकिनी या जीवन दायिनी – शिव कुमारी शुक्ला
दीप्ति सात साल की मासूम बच्ची हतप्रभ खडी थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एकाएक उसके घर में लोगों का आना-जाना क्यों शुरू हो गया। मम्मी पापा अभी कुछ समय पहले ही घर से गये थे कुछ काम करने के लिए उसे मैड के पास छोड़ कर। फिर ये पड़ोसी अंकल घबराए से … Read more
रिश्तो की जमा पूंजी – सीमा सिंघी
मम्मी जी जब आपका मन क्रोधित होता है तो उस वक्त आप मुझे कुछ भी सुनाने से पीछे नहीं हटती है। यह घर आपका है उतना ही मेरा भी है ।जब आप मुझे प्यार नहीं दे पा रही हो तो मुझसे आप सम्मान की उम्मीद कैसे कर सकती है मैं आपकी जितनी अनुभवी तो नहीं … Read more