मुझे माफ कर दो नीरजा
फोन की घंटी बजी तो सुलोचना जी ने जल्दी से गैस की आंच धीमी की और पल्लू से हाथ पोंछते हुए फोन उठाया। स्क्रीन पर लंदन का नंबर चमक रहा था। सुलोचना जी के चेहरे पर एकाएक एक मीठी सी मुस्कान तैर गई। “हैलो विकास बेटा, जीते रहो! कैसे हो तुम? आज चार महीने बाद … Read more