वह किताब जो उसने छीन ली – रमा साहू 

*दुनिया ने उसे एक क्रूर सौतेली माँ कहा जिसने अपने बेटे के हाथ से किताबें छीनकर उसे अनपढ़ बना दिया, लेकिन सालों बाद जब उस बेटे ने माइक थामकर सच बोला, तो हर आँख शर्म से झुक गई।* कमरे में दीवार घड़ी की टिक-टिक रात के सन्नाटे को चीर रही थी। रात के दो बज … Read more

वक्त की मार – गरिमा चौधरी

*”जब दौलत के नशे में चूर भाई ने चांदी के सिक्के को ‘भिखारी की भीख’ बताकर ठुकरा दिया, तब उसे नहीं पता था कि एक दिन वही ‘छोटा भाई’ अपनी पत्नी के गहने बेचकर उसकी सांसें खरीदेगा।”* हीरे की अंगूठी से सजी उंगलियों ने व्हिस्की का गिलास टेबल पर ऐसे पटका जैसे कोई फैसला सुनाया … Read more

*ऐसी किस्मत कहाँ* – तोषिका

मैं बस एक विकल्प ही हू और वो ही रहूंगी, मैं कभी किसी की प्राथमिकता नहीं बन सकती। मैं चाहे जितना भी कोशिश कर लू पर कुछ नहीं होता, मैने सपने में भी नहीं सोचा था ऐसी किस्मत होगी मेरी की कोई पूछने वाला ही नहीं है। शुरूआत में अब मीठे होते है बाद में … Read more

“राख से उजला आसमान”

“पिता के बनाए साम्राज्य को अपने घमंड में राख कर देने वाले बेटे को जब अपनी ही गर्भवती पत्नी की दवाइयों के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं, तो उसे वो सबक मिला जो दुनिया की कोई किताब नहीं सिखा सकती थी… पढ़िए एक घमंडी बेटे के टूटकर दोबारा खड़े होने की रोंगटे खड़े कर … Read more

रोशनी का कर्ज

“रिश्तेदारों ने ताना मारा कि ‘निकम्मा बेटा बुढ़ापे में क्या सहारा बनेगा, इसे तो खुद पालना पड़ रहा है’। लेकिन जब पिता की आँखों की रोशनी छिनने लगी और अपनों ने ही घर गिरवी रखने की शर्त रख दी, तब उस ‘निकम्मे’ बेटे ने जो किया, उसे देखकर पूरे खानदान की आँखें फटी रह गईं… … Read more

 वजूद की तलाश

“कहते हैं बुढ़ापे में इंसान को सिर्फ आराम चाहिए होता है, लेकिन जब आराम की कीमत आपका आत्मसम्मान हो, तो मखमल का बिस्तर भी कांटों जैसा चुभने लगता है। क्या एक माँ अपने ही बनाए घोंसले में सिर्फ एक ‘फालतू सामान’ बनकर रह सकती है, जिसे हर कोई अपनी सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करे?” … Read more

दौलत की चाबी

“जिस इंसान ने अपनी पूरी ज़िंदगी एक-एक पैसा जोड़ने में लगा दी, उसने अपने बुढ़ापे का इकलौता सहारा अपनी बहू के नाम क्यों कर दिया? यह कहानी उस ‘खाली हाथ’ की है, जिसने पूरी दुनिया की खुशियां समेट लीं।” लेकिन जब वकील ने कागज़ात पढ़े, तो पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। कैलाशनाथ जी ने … Read more

शक का कोहरा

 “एक छोटी सी गलतफहमी और पल भर का क्रोध कैसे सालों के विश्वास को राख कर देता है, और जब सच सामने आता है, तो इंसान अपनी ही नज़रों में कैसे गिर जाता है… यह कहानी उसी खौफनाक सच का आईना है।” “तुम मुझसे अब और झूठ मत बोलो समीर! मेरे पास सारे सबूत हैं। … Read more

ऐसी किस्मत कहॉ – संजय सिंह

राजीव घर पर अकेला था। रात के तकरीबन 10:00 बज रहे थे। नींद का नामों निशान नहीं था। चारों तरफ सन्नाटा था। कोई भी काम करने का राजीव का मन नहीं हो रहा था। आज वह बहुत ही परेशान था। राजीव का भला पूरा  परिवार था। जिसमें एक बेटा और एक बेटी थी। जिनका पालन … Read more

**मायके की वो “बेगानी” अलमारी और भाभी का प्रेम** – हर्षिता सिंह

*शादी के पांच साल बाद जब वह टूटे हुए स्वाभिमान के साथ भाई के चौखट पर लौटी, तो उसे लगा कि वह अब इस घर में सिर्फ एक ‘बोझ’ है। लेकिन एक दिन भाभी ने उसे घर की तिजोरी की चाबी थमाकर कुछ ऐसा कहा कि उसकी रूह तक कांप गई और आँखों से वर्षों … Read more

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