सिल्क की साड़ी पहनने की हसरत ही रह गई – मंजू ओमर

सपना आज बहुत खुश थी। आज उसे मुहल्ले मे उसके दो मकान छोड़ कर रहने वाली शांति जी के पोती का महिलाओं का संगीत कार्यक्रम था। शादी थी उसकी,,जो दूसरे शहर से हो रही थी। उसी के उपलक्ष्य मे ये प्रोग्राम रखा था। गाने बजाने के साथ खाने पीने का भी कार्यक्रम था। सपना ने … Read more

संदूक में रखा सपना सिल्क की प्लेन बॉर्डर वाली साड़ी… – लतिका श्रीवास्तव

मां कहां हो जोर से आवाज लगाती नंदिनी बैठक से होते हुए अंदर वाले कमरे तक पहुंच गई… लेकिन मां के कमरे के दरवाजे पर ही ठिठक गई उसने देखा मां अपना संदूक खोले बैठी है उसकी तरफ मां की पीठ थी नंदिनी की समझ में नहीं आया कि मां इस समय यहां बैठ कर … Read more

“संस्कारों की सौगात ” – कमलेश आहूजा

घर में आज सुबह कुछ अलग-सी हलचल थी।शब्द कम थे,मुस्कानें ज़्यादा थीं और इशारों में जैसे कोई छोटा-सा राज़ पल रहा था।रोहन और नेहा कभी धीमे स्वर में बातें करते,तो कभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते।यह सब देखकर सरोज को लग रहा था,कि ज़रूर कोई ऐसी बात है जो उनसे छिपाई जा रही है। “क्या … Read more

*सिल्क की साड़ी* – तोषिका

मां ये *सिल्क की साड़ी* काफी पुरानी हो गयी है, इसको निकाल दे क्या? माया ने अपनी मां रोहिनी से पूछा। “नहीं बेटा, इसको मैं नहीं निकल सकती।” रोहिनी ने हल्का सा मुस्कुराते हुए बोला। “लेकिन क्यों मां? आप खुद ही कहती हो ना कि घर में पुराने कपड़े नहीं रखने चाहिए।” माया बोली उसकी … Read more

#सिल्क की साड़ी – डोली पाठक

रुचि जब भी मैके आती तो मां का पुराना एल्बम निकाल कर पुरानी तस्वीरें देखने बैठ जाती…  उसे उन ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों में जीवन के सारे सुंदर रंग समाहित हुए मिल जाते थे…  मां पापा का यौवन और अपना बचपन उसे बड़ा हीं लुभावना सा लगता था…  उन पुरानी तस्वीरों में जीवन की हर … Read more

लाल सिल्क की साड़ी –  सुनीता माथुर 

सुष्मिता एकांत कमरे में बैठी हुई अपने बचपन के ख्यालों में खो जाती है कैसे अपनी मां से लाल “सिल्क की साड़ी” की मांग करती रहती थी! बचपन से ही सुष्मिता को अपनी मां की लाल “सिल्क की साड़ी” जिस पर सिल्वर की लेस लगी हुई थी बहुत ही प्यारी लगती थी और वह हमेशा … Read more

सिल्क की साड़ी – परमा दत्त झा

आज रामदयाल काफी दिनों के बाद खुलकर हंसा था।कारण बहू और पोती खुशी से भरी थी। बाबा मामा की शादी होने वाली है -वह खुशी से चहक रही थी। अच्छा कब?-यह भी प्रतिप्रश्न किया। अगले महीने,हल्दी,मेंहदी और सारी चीजें इसी बनारस में होगी। लड़की बनारस की है -बहू सारी बात खुशी से बता रही थी। … Read more

रेशम की साड़ी – लीनू अहलूवालिया

मैं घर की सबसे छोटी बेटी थी। उस समय मेरी उम्र लगभग नौ वर्ष थी। पिताजी को गुज़रे चार वर्ष हो चुके थे। उनके जाने के बाद माँ ने अकेले ही हम बहनों का पालन-पोषण किया। आर्थिक तंगी थी, जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी माँ ने कभी हमें प्रेम, संस्कार और आत्मसम्मान की … Read more

सिल्क की साड़ी – सीमा सिंघी

मम्मी मैं सुबह से देख रही हूं । आप आते-जाते इस अलमीरा में कुछ ढूंढ रही हैं। अगर मुझे भी पता चले तो,मैं शायद कोई आपकी मदद कर दूं कहते हुए नीति ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी। नीति को इस तरह पूछते देखकर मैं भी मुस्कुरा कर कहने लगी।  नीति मैं वह … Read more

रेशम की खुशबू – लक्ष्मी कानोडिया

अलमारी का सबसे ऊपर वाला खाना खोलते ही मीरा के हाथ ठिठक गए। सामने हल्के आसमानी रंग की बनारसी सिल्क साड़ी बड़े करीने से रखी थी। उसने साड़ी को धीरे से बाहर निकाला और हथेलियों पर फैला लिया। रेशम की मुलायम चमक जैसे वर्षों पुरानी यादों को फिर से जीवंत कर गई। “मम्मी, आप फिर … Read more

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