बदलाव की शुरुआत

शाम का समय था। सुमित्रा जी रसोई में खड़ी अपने और अपने पति के लिए चाय छान रही थीं। घर में एक अजीब सी शांति थी, लेकिन यह शांति अचानक एक तेज़ और कर्कश आवाज़ से टूट गई। आवाज़ उनके बेटे विकास के कमरे से आ रही थी। “मैंने तुम्हें तीन बार कॉल किया! तुम्हारी … Read more

कुलकलंकिनी – सुनीता मलिक सोलंकी

दो शब्दों का मेल “कुल” और “कलंकिनी”।अर्थात्‌ परिवार पर कलंक हो जो …यह शब्द अक्सर समाज में महिलाओं पर लगाए जाने वाले दोहरे मानकों और उन पर रखी जाने वाली अपेक्षाओं को दर्शाता है। समाज महिलाओं को उनके परिवार की इज्जत का प्रतीक मानता है और उन पर कई तरह की जिम्मेदारियाँ डालता है । … Read more

कड़वी सच्चाई

अलमारी से कपड़े निकालकर तेज़ी से सूटकेस में ठूंसती हुई नीता के हाथ कांप रहे थे। उसकी आँखों से लगातार बहते गर्म आंसू उसके गालों को भिगो रहे थे, लेकिन इस वक्त उसे अपने आंसू पोंछने की भी फुर्सत नहीं थी। कुछ ही मिनटों पहले उसे अपनी माँ का फोन आया था कि उसके पिता, … Read more

रिश्ते और पैसा – खुशी

शालिनी जी एक सुलझी हुई महिला थी और उनके पति किशन जी भी सीधे साधे थे जिन्हें अपने परिवार और दुकान से ही लेना देना था हफ्ते के 6 दिन पर मंगलवार उनकी मार्केट बंद होतीं तो वो अपने दोस्तों को टाइम देते । परिवार में तीन बच्चे थे श्रुति , श्रवण और गगन ।तीनों … Read more

कुल कलंकिनी – अरुणा गर्ग

प्रिया मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता प्लीज़ अपने पापा से बात करो ना कि वे तुम्हारी शादी अभी न करें”  रोमिल उससे मिन्नतें करने लगा। “नहीं रोमिल मैं नहीं कह सकती, तुम मेरी मजबूरी समझो। मैं भी तुम्हें चाहती हूं पर पापा ने शादी की डेट राघव से तय कर दी है।कार्ड छप चुके … Read more

खुशी के आँसू

रिश्तेदारों ने खूब ताने दिए कि “दीनानाथ ने अपनी बेटियों को सिर पर चढ़ा रखा है।” लेकिन बापू टस से मस नहीं हुए। समय का पहिया घूमता रहा। दीदी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली और सिविल सर्विसेज़ की तैयारी शुरू कर दी। मैं भी कॉलेज पहुँच चुकी थी। लेकिन ज़िंदगी कभी भी एक सी … Read more

निस्वार्थ प्रेम

शहर के एक पुराने और शांत मोहल्ले में मास्टर शिवनारायण जी का मकान किसी समय अपनी रौनक के लिए जाना जाता था। मास्टर जी इलाके के सबसे सख्त और उसूलों वाले व्यक्ति माने जाते थे। उनका एक ही नियम था—जो उन्होंने कह दिया, वही पत्थर की लकीर है। इसी झूठे गुरूर के चलते आज से … Read more

 अनमोल खज़ाना

“राघव, पिछले कुछ दिनों से मेरी कमर और पैरों में बहुत तेज़ दर्द रहता है। सुबह उठते ही चक्कर भी आते हैं,” नीता ने आटा गूंथते हुए बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में अपने पति से कहा। राघव, जो आईने के सामने खड़े होकर अपनी टाई की गांठ ठीक कर रहा था, बिना … Read more

एक नया सवेरा

“मां जी, मेरी अपने घर पर तफ्सील से बात हो गई है। मेरे बाबूजी और परिवार वाले इस रिश्ते के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्हें कोई भी आपत्ति नहीं है। बस अब आप किसी तरह काव्या को समझा लीजिए…” अभिनव ने बहुत ही संकोच लेकिन एक गहरे विश्वास के साथ सुभद्रा जी से … Read more

डर – बालेश्वर गुप्ता

      पापा- पापा, अगले शुक्रवार को सुबह सुबह हम सब कश्मीर घूमने के लिए चल रहे हैं,आप वहां के हिसाब से कपड़े रख लेना।मैने वहां सब व्यवस्था कर दी है,यहां से फ्लाइट से श्रीनगर वहां कार बुक कर दी है,होटल बुक हो गये है।       एक सांस में मुन्ना ने बड़े ही उत्साहित रूप में सब कुछ … Read more

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