पक्की उम्र का प्यार – रमा शुक्ला 

 निहारिका के माता-पिता कमरे में आए। पिताजी के चेहरे पर एक ऐसी राहत और खुशी थी, जो निहारिका ने बहुत समय बाद देखी थी। उन्होंने निहारिका के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “बेटा, तुम्हारे लिए एक बहुत ही होनहार लड़के का रिश्ता आया है। नाम सुमेध है। एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर … Read more

कर्ज रोशनी का – गोविंद गुप्ता

राधिका उनके चरणों में गिर पड़ी और रोने लगी। उसने अपना परिचय दिया और अपनी पहली तनख्वाह का लिफाफा उनके हाथों में रख दिया। “मांजी, मैं राधिका। आपने मुझे जो जीवनदान दिया था, आज मैं आपका वह कर्ज चुकाने आई हूँ। यह मेरी पहली तनख्वाह है। आपकी उस रात की मदद ने एक गरीब की … Read more

उजले सवेरे की ओर – सपना बबेले

राधिका और सुमित की शादी को हुए अभी पाँच साल ही बीते थे। उनका एक प्यारा सा चार साल का बेटा था, जिसका नाम उन्होंने अनमोल रखा था। सुमित एक प्राइवेट कंपनी में अच्छे पद पर था और राधिका एक कुशल गृहिणी। उनकी जिंदगी किसी शांत नदी की तरह बह रही थी, जिसमें सुख-दुख की … Read more

रेत की तरह फिसलती जिंदगी – अनीता वर्मा 

 रजत की आँखें छत को घूर रही थीं। नींद उनकी आँखों से कोसों दूर जा चुकी थी। ऐसा नहीं था कि वह पहली बार इस बड़े से कमरे में अकेले सो रहे थे। अपने व्यापार के सिलसिले में, मीटिंग्स और विदेशी दौरों के कारण वह अक्सर हफ्तों तक घर से बाहर रहा करते थे। लेकिन … Read more

“संस्कारों की सौगात ” – कमलेश आहूजा

घर में आज सुबह कुछ अलग-सी हलचल थी।शब्द कम थे,मुस्कानें ज़्यादा थीं और इशारों में जैसे कोई छोटा-सा राज़ पल रहा था।रोहन और नेहा कभी धीमे स्वर में बातें करते,तो कभी एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देते।यह सब देखकर सरोज को लग रहा था,कि ज़रूर कोई ऐसी बात है जो उनसे छिपाई जा रही है। “क्या … Read more

*सिल्क की साड़ी* – तोषिका

मां ये *सिल्क की साड़ी* काफी पुरानी हो गयी है, इसको निकाल दे क्या? माया ने अपनी मां रोहिनी से पूछा। “नहीं बेटा, इसको मैं नहीं निकल सकती।” रोहिनी ने हल्का सा मुस्कुराते हुए बोला। “लेकिन क्यों मां? आप खुद ही कहती हो ना कि घर में पुराने कपड़े नहीं रखने चाहिए।” माया बोली उसकी … Read more

#सिल्क की साड़ी – डोली पाठक

रुचि जब भी मैके आती तो मां का पुराना एल्बम निकाल कर पुरानी तस्वीरें देखने बैठ जाती…  उसे उन ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरों में जीवन के सारे सुंदर रंग समाहित हुए मिल जाते थे…  मां पापा का यौवन और अपना बचपन उसे बड़ा हीं लुभावना सा लगता था…  उन पुरानी तस्वीरों में जीवन की हर … Read more

बेटियां सिर्फ़ मायके से लेने नहीं आती हैं

दोपहर के तीन बज चुके थे। रितिका ने अभी-अभी घर के सारे काम निपटाए थे और वह अपनी कमर सीधी करने के लिए बिस्तर पर लेटी ही थी कि दरवाजे की घंटी जोर से बज उठी। एक बार, दो बार और फिर लगातार बजती ही रही। ऐसा लग रहा था जैसे बाहर खड़े इंसान ने … Read more

अटूट धागा

अंजलि फूट-फूट कर रोने लगी। उसने स्नेहा को गले लगा लिया। रोहन की आँखों से भी अश्रुधारा बह निकली। स्नेहा ने रोहन का हाथ पकड़कर कहा, “भइया, दुनिया के लिए मैं कितनी भी बड़ी अफसर क्यों न बन जाऊं, लेकिन आपके बिना मेरी हर पहचान अधूरी है। मेरी शादी के मंडप में मेरा कन्यादान सिर्फ … Read more

सच्ची कमाई

साठ वर्षीय सुलोचना जी अपने दोनों हाथों में ताजी सब्जियों, फलों और कुछ घरेलू सामानों से भरे भारी थैले पकड़े, अपनी सोसायटी के मुख्य गेट से अंदर दाखिल हो रही थीं। उम्र के इस पड़ाव पर घुटनों में गठिया का दर्द अक्सर उन्हें परेशान करता था, लेकिन आज उनके चेहरे पर एक अजीब सी ऊर्जा … Read more

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