स्वाभिमान मेरा भी है – रेखा जैन

भोर का तारा चमकने के साथ ही कमला बिस्तर छोड़ कर उठ बैठी और अपने नित्य कर्म में लग गई। उसने घर की साफ सफाई की, बच्चों का नाश्ता बनाया, टिफिन बनाया, दोपहर का खाना बना कर रख दिया। सास ससुर को चाय दी और अपने दोनों छोटे बच्चों को उठा कर तैयार कर दिया। … Read more

मेरा भी स्वाभिमान – बिमला रावत जड़धारी

रजनी बैठी सोच रही थी। क्या ये मकान बेच दूॅं? जैसे बच्चें कह रहे हैं, तीन फ्लैट ले लेते हैं। तीनों भाइयों के नाम से तीन फ्लैट एक साथ ही ले लेते हैं। आपका जहॉं मन करे वहॉं रह लेना। जितने पैसे बचेंगे वो हम तीनों आपस में बांट लेंगे। आप पैसे का क्या करोगी? … Read more

*स्वाभिमान मेरा भी है* – तोषिका

आज बहुत गर्मी हो रही है मेरा तो आमरस पीने का मन कर रहा है, अपने पसीने पूछते हुए रज्जो बोली। तभी वहां खड़ी उनकी गाय जैसे बहु नेहा बोली “माजी मैं आपके लिए अभी आमरस बना देती हू” रज्जो ताने मारते हुए बोली “तुझे किसी ने कहा कुछ और ये क्या दूसरों की बातें … Read more

बड़े भाई हो, बाप मत बनो – वैशाली आडेसरा

बड़े भाई हो, बाप मत बनो… यह कहकर वृंदा ने किशोर के हाथ से मिठाई का डिब्बा लिया और अपनी भाभी को देते हुए बोली— “भाभी, लीजिए ये मिठाई… हमें किसी को बाँटनी नहीं है, हम ही खा लेंगे।” इतना कहकर वृंदा नम आँखों से अपने कमरे में चली गई। किशोर वहीं कुर्सी पर बैठ … Read more

प्रायश्चित – उषा भारद्वाज

   घर में शादी का माहौल था। रिया कुछ घंटे पहले ही दिल्ली से आई है। साथ में उसका 5 साल का बेटा मंटू भी है। अक्षांश रिया के पति को समय न मिल पाने के कारण वह नहीं आ सके। उनका मन तो बहुत था छोटी साली की शादी में सम्मिलित होने का, मगर नहीं … Read more

स्वाभिमान मेरा भी है। – संजय सिंह

रात के 10:00 बज रहे थे ।एक छोटा सा बिजली का बल्ब उम्मीद से ज्यादा कमरे में रोशनी कर रहा था। एक कमरा जिसमें दो कुर्सियां ,एक मेज जिनके ऊपर उथल-पुथल अवस्था में रखी हुई किताबें और कुछ कपड़े साथ ही एक तरफ एक नए जमाने का बिस्तर लगा हुआ था। जिसके ऊपर गोपाल प्रसाद … Read more

खुद से मुलाकात – उषा भारद्वाज

कितनी अजीब बात है ना… तुम जब दूर हो रहे थे, तब हम घबरा रहे थे। सब कुछ खाली-खाली सा लग रहा था। कितनी अजीब बात है ना… घर में सब थे, मगर हम अकेले हो रहे थे। कितनी अजीब बात है ना… दिल में डर, चिंता, थोड़ा-थोड़ा गुस्सा भी भर रहा था, मगर तुमसे … Read more

स्वाभिमान –  सुनीता माथुर 

माला भाभी को हर समय काम करता हुआ देखकर उनका देवर किशन को बहुत बुरा लगता था वैसे तो मां बाबूजी ने कृष्ण कुंज में खुशियां ही खुशियां बनाई थीं बाबूजी ने ईमानदारी का धन कमा कर और पूजा पाठ कर सारे परिवार के लिए ईमानदारी से घर बनाया था, जिसका नाम “कृष्ण कुंज” रखा … Read more

स्वाभिमानी अम्मा जी – गीता वाधवानी

 शिल्पी जब भी बाजार जाती थी, एक बूढी औरत को कुछ ना कुछ सामान बेचते हुए देखी थी। कभी कुछ सब्जियाँ, कभी धनिया मिर्च अदरक लहसुन, कभी कोई फल, कभी  आलू तो कभी टमाटर। उस अम्मा जी की उम्र लगभग 75 या 80 वर्ष की होगी।   अम्मा जी रोड की एक साइड में एक कपड़ा … Read more

स्वाभिमान – खुशी

नियति कहा हो तुम ? क्या हुआ क्यों चिल्ला रहे हैं? अरे मेरी टाई कहा है ब्लेजर कहा है? जनाब खुद भी कुछ ढूंढ लिया कीजिए।अरे क्या बहु लाये है जिसे ये चिंता नहीं की ससुर ने जाना है सुबह चाय नाश्ता छोड़ कमरे में घुस गई रात कम पड़तीं है।नियति आई बोली मां वो … Read more

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