जीवनसाथी

कैलाश बाबू ने लैंडलाइन का रिसीवर जैसे ही क्रैडल पर रखा, उनके चेहरे पर एक पुरानी, जानी-पहचानी मुस्कान तैर गई। उनके मुंह से आदतन और बड़े ही उत्साह के साथ निकला, “अरे सावित्री, सुन रही हो? लखनऊ से अपने रमेश बाबू का फोन था, उनकी छोटी बेटी की शादी तय हो…” शब्द उनके होंठों पर … Read more

नियति

लाल जोड़े में सजी नव्या जब कार से उतरी, तो उसके कदमों में एक नई दुनिया की आहट थी। ढोल-नगाड़ों की थाप, रिश्तेदारों की भीड़ और औरतों के मंगलगीत से घर का कोना-कोना रोशनी से नहाया हुआ था। पूरे दिन की रस्मों और सफर की भारी थकान के बावजूद नव्या की आँखों में एक अजीब … Read more

लाल सिल्क की साड़ी –  सुनीता माथुर 

सुष्मिता एकांत कमरे में बैठी हुई अपने बचपन के ख्यालों में खो जाती है कैसे अपनी मां से लाल “सिल्क की साड़ी” की मांग करती रहती थी! बचपन से ही सुष्मिता को अपनी मां की लाल “सिल्क की साड़ी” जिस पर सिल्वर की लेस लगी हुई थी बहुत ही प्यारी लगती थी और वह हमेशा … Read more

मातृत्व

शहर की एक जानी-मानी एडवरटाइजिंग और डिजाइन एजेंसी की कांच वाली केबिन में आज सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। पच्चीस साल की नंदिनी अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर एक डिजिटल इलस्ट्रेशन और हिंदी सुविचार वाले पोस्टर को अंतिम रूप देने में पूरी तरह से मग्न थी। उसने हल्के पीले रंग का एक सादा सा … Read more

सिल्क की साड़ी – परमा दत्त झा

आज रामदयाल काफी दिनों के बाद खुलकर हंसा था।कारण बहू और पोती खुशी से भरी थी। बाबा मामा की शादी होने वाली है -वह खुशी से चहक रही थी। अच्छा कब?-यह भी प्रतिप्रश्न किया। अगले महीने,हल्दी,मेंहदी और सारी चीजें इसी बनारस में होगी। लड़की बनारस की है -बहू सारी बात खुशी से बता रही थी। … Read more

रेशम की साड़ी – लीनू अहलूवालिया

मैं घर की सबसे छोटी बेटी थी। उस समय मेरी उम्र लगभग नौ वर्ष थी। पिताजी को गुज़रे चार वर्ष हो चुके थे। उनके जाने के बाद माँ ने अकेले ही हम बहनों का पालन-पोषण किया। आर्थिक तंगी थी, जीवन संघर्षों से भरा था, फिर भी माँ ने कभी हमें प्रेम, संस्कार और आत्मसम्मान की … Read more

कलंकिनी या जीवन दायिनी – शिव कुमारी शुक्ला

दीप्ति सात साल की मासूम बच्ची हतप्रभ खडी थी।उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एकाएक उसके घर में लोगों का आना-जाना क्यों शुरू हो गया। मम्मी पापा अभी कुछ समय पहले ही घर से गये थे कुछ काम करने के लिए उसे मैड के पास छोड़ कर। फिर ये पड़ोसी अंकल घबराए से … Read more

रिश्तो की जमा पूंजी – सीमा सिंघी

मम्मी जी जब आपका मन क्रोधित होता है तो उस वक्त आप मुझे कुछ भी सुनाने से पीछे नहीं हटती है। यह घर आपका है उतना ही मेरा भी है ।जब आप मुझे प्यार नहीं दे पा रही हो तो मुझसे आप सम्मान की उम्मीद कैसे कर सकती है  मैं आपकी जितनी अनुभवी तो नहीं … Read more

कब तक आत्म सम्मान खोकर जिएगी – सीमा सिघी

अरे सौम्या यह बिखरी हुई रसोई तुमने अब तक समेटी नहीं??? मैं तुमसे कितनी बार कहा है… मुझे सफाई पसंद है। मुझे इस तरह बिखरी हुई रसोई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती है। तुम सब जानती हो…फिर भी तुम इन्हें अधूरा छोड़कर कमरे में चली गई कहते हुए निर्मला जी सौम्या के बिल्कुल करीब आकर खड़ी … Read more

सिल्क की साड़ी – सीमा सिंघी

मम्मी मैं सुबह से देख रही हूं । आप आते-जाते इस अलमीरा में कुछ ढूंढ रही हैं। अगर मुझे भी पता चले तो,मैं शायद कोई आपकी मदद कर दूं कहते हुए नीति ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी। नीति को इस तरह पूछते देखकर मैं भी मुस्कुरा कर कहने लगी।  नीति मैं वह … Read more

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