एक नई सुबह की उम्मीद

शाम के साढ़े छह बज रहे थे। छह साल की मिस्टी अपनी छोटी सी गुड़िया लिए दरवाज़े की चौखट पर टकटकी लगाए बैठी थी। उसके पिता, सिद्धार्थ, पिछले एक महीने से अपने किसी ज़रूरी प्रोजेक्ट के सिलसिले में दूसरे शहर गए हुए थे और आज लौट रहे थे। मिस्टी ने पूरे घर को अपने छोटे-छोटे … Read more

सिल्क की साड़ी – मधु वशिष्ठ

मां को सिल्क की साड़ियां पहनने का बहुत शौक था और 2 अक्टूबर से पहले कनॉट प्लेस के खादी     ग्रामोद्योग भवन में खादी की सेल से वह बहुत साड़ियां लाती थी। मुझे आज भी याद है 2 अक्टूबर के आसपास  दिल्ली के कनॉट प्लेस के सिनेमा हॉल रीगल पर पिक्चर देखना और उधर … Read more

सम्मान और परवाह

शांति देवी के पैरों में पिछले पंद्रह दिनों से भयंकर सूजन थी। उम्र पचपन के पार हो चुकी थी और शरीर अब पहले की तरह फुर्तीला नहीं रहा था। लेकिन इकलौते बेटे रोहन की शादी थी, तो घर में बैठकर आराम करना भी मुमकिन नहीं था। हलवाई को राशन देने से लेकर रिश्तेदारों के सोने-बैठने … Read more

 आदर्शों का मुखौटा

  मेरी शादी को मुश्किल से एक साल हुआ था, जब मैं अपने पति रोहन के साथ इस नई कॉलोनी में रहने आई थी। नया शहर, नए लोग और एक बिल्कुल नया माहौल। शुरुआत में मुझे बहुत अकेलापन महसूस होता था। दिन भर घर के काम करने के बाद जब मैं शाम को बालकनी में बैठती, … Read more

कन्यादान

मास्टर दीनानाथ की बड़ी बेटी सुरभि की हल्दी थी। दीनानाथ जी पेशे से एक ईमानदार शिक्षक थे और जीवन भर की पूंजी लगाकर उन्होंने अपनी दोनों बेटियों, सुरभि और नव्या को उच्च शिक्षा दिलाई थी। सुरभि एक जानी-मानी आर्किटेक्ट थी, और नव्या अभी वकालत की पढ़ाई कर रही थी। दीनानाथ जी का हमेशा से यह … Read more

मुझे माफ कर दो नीरजा

फोन की घंटी बजी तो सुलोचना जी ने जल्दी से गैस की आंच धीमी की और पल्लू से हाथ पोंछते हुए फोन उठाया। स्क्रीन पर लंदन का नंबर चमक रहा था। सुलोचना जी के चेहरे पर एकाएक एक मीठी सी मुस्कान तैर गई। “हैलो विकास बेटा, जीते रहो! कैसे हो तुम? आज चार महीने बाद … Read more

अपनापन के आँसू

अपनापन के आँसू  लाल सुर्ख लहंगे में लिपटी, सोलह श्रृंगार किए मीरा जब गाड़ी से उतरी, तो उसके कदमों में एक अजीब सी झिझक थी। पायल की झंकार के साथ उसके दिल की धड़कनें भी तेज़ हो रही थीं। अपनी नम आँखों में मायके से विदाई का दुख और इस नई दुनिया को लेकर अनगिनत … Read more

बेटा नालायक, किसकी गलती?

सुना है राधा बहन? तुम्हारी बहू के कारनामे? शीतल जी अपनी पड़ोसन राधा जी के घर पर आकर हाफ्ते हुए स्वर में कहती है  राधा जी:  क्या सुना है बहन? साफ-साफ तो बताओ?  शीतल जी:  अरे तुम्हारी बहु जिसको रील्स बनाने का बड़ा शौक था, जिसकी वजह से उसकी कमाई होनी भी शुरू हो गई … Read more

*कुलकलंकिनी* – तोषिका

ये इस घर की *कुलकलंकिनी* नहीं है। साहिल ने रीमा का हाथ पकड़ते हुए बोला। तो फिर क्या है? उनकी मां ने गुस्से में बोला। साहिल बोला “आप लोग हर बार दीदी से ऐसे क्यों बात करते हो, और आखिर वेस्टर्न कपड़े पहन ने से कोई कुलकलंकिनी कैसे हो सकता है?” साहिल ने अपनी मां … Read more

कुलकलंकिनी – बीना शुक्ला अवस्थी

पूरे गांव में  हलचल मची थी। लोग डॉक्टर दामिनी को देखने दौड़े आ रहे थे। अस्पताल के बाहर काफी भीड़ जमा हो गई थी, सब एक झलक दामिनी को देखना चाहते थे लेकिन अस्पताल में पता नहीं क्यों आज पुलिस लगा दी गई थी और डॉक्टर दामिनी कुर्सी पर बैठी कई वर्ष पीछे जाकर गुम … Read more

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