रीचार्ज – शुभ्रा बैनर्जी 

पचासी साल पूरे कर चुकीं हैं सासू मां।सारे दांत निकलवा लिए है, दर्द से हार कर।अपनी जिंदगी में क्या कुछ नहीं सहा है उन्होंने? उन्हें देखकर तो शुभा खुद से ही लड़ती रहती है।जब मां इस उम्र में अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को खुश रख सकतीं हैं, तो वह क्यों नहीं?  आंखों की … Read more

एक माँ – एम. पी. सिंह

आशा और गोपाल दास के दो बेटे थे, राम और श्याम. दोनों मे 2 साल का अंतर था. घर के पास ही गोपाल जी का अपना किराना स्टोर था और काफ़ी अच्छा कमा लेते थे. सवेरे दुकान पर जाते तो रात को ही वापस आते. लंच नौकर घर से ले जाता था. माँ का प्यार … Read more

थोड़ा और कमा लूं – के आर अमित

ये कहानी एक मनोज की नही बल्कि हर उस आदमी की है जो हजारों सपने लेकर घर से बाहर निकलता है । स्कूल की पढ़ाई खत्म करके अभी जवानी में कदम रखा ही था कि नौकरी की फिक्र सताने लगी। कुछ छोटी मोटी नौकरी मिली भी तो सैलेरी इतनी कम थी कि अपना गुजारा करना … Read more

सोने की मोहर – शुभ्रा बैनर्जी 

“मैं अब नहीं रहने वाली यहां।सारा दिन खटती रहती हूं,फिर भी मन नहीं भरता आपके बेटे का।रोज -रोज खाने को लेकर चिक-चिक,हद है।हर बात में तैयार रहता है आपका बेटा लड़ने को।क्या कभी मैंने अपने दायित्वों से मुंह मोड़ा है?कभी भी आप लोगों के साथ बुरा बर्ताव किया है?ससुराल में सब अपनी सास से परेशान … Read more

पगडंडी -लतिका श्रीवास्तव

दिसम्बर का उत्साह पूरे उफान पर था।शायद अपनी बारी की प्रतीक्षा करते करते अंत में वहीं बचता है अकेला पूरे वर्ष का भर ढोने वाला।पूरे वर्ष सारे महीनों ने जो उम्मीदें पूरी नहीं की उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी का बोझ उठाता दिसंबर कभी निराश नहीं दिखता।मेरे साथ यह वर्ष खत्म हो जाएगा इसका दुख … Read more

अहंकार छोटा कर बहु – मधु वशिष्ठ

    घर बचाना है तो अहंकार छोटा कर बहु, माधवी जी मैं बड़ी बहू सुजाता को डांटते हुए बोला परंतु आज  सुजाता कुछ सुनना ही नहीं चाहती थी। उसने भी अपनी पूरी आवाज बढ़ाते हुए कहा यह अहंकार नहीं आत्मसम्मान है। आज आप केवल रीना की आए दहेज के सामान के कारण ही उसकी हर गलतियों … Read more

नई राहें – लतिका श्रीवास्तव

दिसम्बर का उत्साह पूरे उफान पर था।शायद अपनी बारी की प्रतीक्षा करते करते अंत में वहीं बचता है अकेला पूरे वर्ष का भर ढोने वाला।पूरे वर्ष सारे महीनों ने जो उम्मीदें पूरी नहीं की उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी का बोझ उठाता दिसंबर कभी निराश नहीं दिखता।मेरे साथ यह वर्ष खत्म हो जाएगा इसका दुख … Read more

अहंकार – खुशी

प्रिया एक पढ़ी लिखी लड़की थी जो आत्मविश्वासी थी ।एक बड़ी आईटी कंपनी में मैनेजर थी ।घर में मां आराधना और पापा मयंक थे।मयंक घर जमाई थे क्योंकि आराधना के पापा का बहुत बड़ा बिज़नेस था और आराधना उनकी इकलौती बेटी थी जो मयंक के साथ पढ़ती थी और वो मयंक को पसंद करती थी। … Read more

इंसानियत – सीमा सिंघी 

आज लाजवंती का सुबह से ही मन बहुत उदास था। वह करने को सुबह से चूल्हे में आग धरना, लाल चाय बनाना, साग बनाना सब कर तो रही थी मगर उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। वह बार-बार यही सोच रही थी ।  जब किसी के पास थोड़ा धन आ जाता … Read more

किस्मत वाली – के आर अमित

क़िस्मत के खेल की ऐसी कहानी जिसपर भरोसा करना  तो मुश्किल है मगर ये बिल्कुल हुआ एक छोटे से गांव में। कहते हैं न कि समय और किस्मत कब बदल जाए किसी को नही पता इसलिए किस्मत को आजमाते रहना चाहिए। हिमाचल की पहाड़ियों के बीच बसा है छोटा सा गांव धारकोट। चारों ओर देवदार … Read more

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