*भाई, मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं* – तोषिका
“आज क्या बनाया है खाने में आपने मां?” पीछे से गले लगकर तारा ने अपनी मां सुषमा से पूछा।” तेरी मनपसंद कड़ी बनाई है, जल्दी से हाथ मुंह धो ले, मैं खाना गरम कर देती हू।” उधर तारा हाथ मुंह धो कर आई और खाना खाने बैठी और सुषमा से पूछा कि “मां, ये भाई … Read more
अनकहे जज़्बात
“तुम्हें बस अपनी माँ की फिक्र है! उन्होंने सुबह दलिया खाया या नहीं, उनकी बीपी की गोली खत्म तो नहीं हो गई, उनके घुटनों का दर्द कैसा है… बस यही सब चलता रहता है तुम्हारे दिमाग में! मेरी तो रत्ती भर भी चिंता नहीं है तुम्हें। मैं सुबह से भूखी-प्यासी ऑफिस के काम में उलझी … Read more
अनकहा प्यार
रागिनी ने गुस्से से अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बिस्तर पर धम्म से बैठ गई। उसकी आँखों में आँसू थे और मन में एक ही बात बार-बार गूँज रही थी— “आखिर मैं इस घर में अपनी मर्जी से साँस भी क्यों नहीं ले सकती?” शादी से पहले उसकी सहेलियों ने उसे चेताया था … Read more
सुकून के आँसू
“हां, तुम्हारी मम्मी तो महान है, सब कुछ कर लेती है, तुम तो उनके गुणगान करोगे ही, पर कान खोलकर सुन लो, मैं कोई मशीन नहीं हूँ!” शिखा के हाथों से सब्जियों की टोकरी स्लैब पर जोर से गिरी और उसकी आँखों से आंसुओं का बांध टूट पड़ा। रसोई में पसरा सन्नाटा इस बात का … Read more
दो परिवारों की इज्जत
कॉलेज की कैंटीन के उस शांत कोने में आज एक अजीब सी बेचैनी थी। मेज के दोनों तरफ बैठे शिवानी और विकास के बीच पिछले दस मिनट से कोई बात नहीं हुई थी। शिवानी की आँखें सूजी हुई थीं और वह लगातार अपने दुपट्टे के छोर को उंगलियों में लपेट रही थी। विकास ने गहरी … Read more
फुर्सत – प्रतिमा श्रीवास्तव
भाभी आप तो कभी हमारे साथ बैठतीं हीं नहीं है। आखिर हम ननदें हैं आपकी ,थोड़ा बहुत समय हमारे लिए भी निकाल लिया करें। संगीता जिसकी शादी को अभी कुछ ही समय हुए थे।पति रोहित की तीन बहनें और मां – पापा से भरा पुरा परिवार था। जूही बड़ी ननद एम .ए. कर रही थी, … Read more
रिश्तों की जमा-पूंजी – प्रतिमा श्रीवास्तव
पिता जी का देहांत हो गया था और इतनी भीड़ रिश्तेदारों और जान पहचान वालों की थी की गली खचाखच भरी हुई थी। हर किसी की आंखें नम थीं और सब के पास कोई ना कोई बात उनसे जुड़ी हुई थी। हम सब भाई बहन ये सब देखकर ताज्जुब कर रहे थे की पापा ने … Read more
अतिथि देवो भव – प्रतिमा श्रीवास्तव
इंसान दौलत भले ही कम कमाए पर परिवार का साथ हो तो हर तकलीफ से निकल ही जाता है। परिवार ऐसी पूंजी है जिसमें हमें बहुत कुछ लगाना होता है बेटा।सब कुछ सब का है, अपने से पहले अपने परिवार को अहमियत देना और अपनों की खुशी खुद से पहले सोचना, त्याग, धैर्य, सम्मान और … Read more
परिवार का हाथ पकडकर रखो – मंजू ओमर
चटाक एक जोर का थप्पड़ नन्हे गोलू पर पड़ा, और सोनल जोर से चिल्लाने लगी ये क्या किया तुमने, मेरी पूरी लिपस्टिक खराब कर दी। निकलो मेरे कमरे से बाहर। और गोलू रोता हुआ कमरे से बाहर आकर माँ से लिपट गया। क्या हो गया बेटा मामी ने मारा, मामी ने मारा मगर क्यों, चलो … Read more