“भाई मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं” – सुनीता मलिक सोलंकी 

बागपत  की एक तंग सी गली में दो भाई रहते थे — बड़ा भाई मुकेश और छोटा अनिल । उम्र में पाँच साल का फासला, पर सोच में ज़मीन-आसमान का। उनके पिता जी की परचून की दुकान थी । पिता के बाद  मुकेश ने दुकान संभाल ली। अनिल पढ़ने में तेज़ था, सो पढ़ाई कर  … Read more

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