*बेटी ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है* – तोषिका

आज से मेरा एक नया सफ़र शुरू होगा मां, मैं बहुत खुश हू। मुस्कुराते हुए खुशी बोली तभी उसकी मां उसके पास आई और उसको गले लगाकर बोली “अपना ध्यान रखना, तू पहली बार मेरे से इतनी दूर जा रही है तो थोड़ी बेचैनी सी हो रही है।”

ओफ्फो मा इतनी टेंशन मत लिया करो, इसी फिक्र और जो माथे पर शिकन रहते है तुम अपनी जवानी को जल्दी खत्म कर रही हो। माथे पर हाथ रखते हुए खुशी बोली।

खुशी के लिए ये एक नया सफ़र था। वो पहली बार अपने घर से इतनी दूर जा रही थी अपनी नौकरी के लिए।

*नौकरी का नया सफ़र*

१ दिन की पूरी थकावट के बाद खुशी का अगले दिन उसकी कंपनी में पहला दिन था। वो अकाउंटिंग डिपार्टमेंट में थी।

आते ही उसने सबसे पहले अपने बॉस से मिली और उसके टीम लीडर से और उनको “गुड मॉर्निंग, सर. मैं खुशी हू और आज से मेरा पहला दिन है। आप लोगों के साथ काम करने के लिए मैं बहुत उत्सुक हूँ”। बोलकर अपना परिचय दिया। तभी उसके बॉस ने बोला “अगर तुम्हे कभी भी किसी भी चीज की तकलीफ हो तो तुम अपने टीम लीडर के पास आकर बता सकती हो।” खुशी ने दोनों को धन्यवाद किया और अपने काम की सारी जानकारी ली और बखूबी समझी।

शुरू के कुछ महीने सब कुछ अच्छा चल रहा था और खुशी को लग रहा था कि उसका सपना पूरा हो गया है और अब वो और आगे बढ़ेगी और अपने सारे शौक पूरे करेगी पर उसको ये नहीं पता था कि उसकी ये मुस्कान बस कुछ समय के लिए है। एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उसको समझ में ही नहीं आ रहा था

कि वो क्या करे तब उसने अपनी मां से सलाह लेने की सोची और सारी बात सुनने के बाद उसकी मां बस एक ही चीज बोली *बेटी ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है* और आगे तुम्हारा फैसला है।

*कुछ दिन पहले*

खुशी जब पैसों के ट्रांसफर फंड्स को देख रही थी तो उसको कुछ गड़बड़ी लगी, उसने तुरंत जाकर अपने टीम लीडर को बताया पर उसका जवाब सुनकर खुशी बिल्कुल हैरान रह गई क्योंकि उसने बोला “ये केस मैं देख लूंगा, इसकी फिक्र मत करो और दूसरे फाइल्स पर काम करो।”

खुशी को इसमें कुछ दाल में काला लगा तो उसने उसकी जड़ तक जाने का सोचा और जब वो उसकी जड़ तक पहुँची उसको पता लगा कि इस घपले में उसके टीम लीडर और बॉस दोनों ही शामिल है।

उसको इस झटके के बाद समझ नहीं आ रहा था कि वो चुप रहे या फिर सब सच बाहर ले आये क्योंकि अगर वो चुप रहेगी तो उसकी नौकरी को भी कोई खतरा नहीं होगा लेकिन अगर उसने बताया तो उसकी नौकरी भी जा सकती है।

इसी बीच उसको अपनी मां की याद आई और सब कुछ बताया और एक मां होने के नाते उन्होंने खुशी को बस यही बोला कि “ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है” और तुम जो भी फैसला लोगी सोच समझ कर ही लोगी।

पूरी रात सोचने के बाद उसने अगले दिन आकर ऑडिट टीम को कॉल किया और इस घपले के बारे में खबर दी। लेकिन जब इसकी खबर बॉस तक पहुंची तो उसने खुशी को अपने केबिन में बुलाया और बोला “जब ऑडिट टीम वाले आए तो अपनी बात से पलट जाना और फिर वो उसका प्रमोशन कर देंगे और साथ में पैसे भी ज्यादा मिलेंगे, नहीं तो वो बेघर हो जाएगी।”

लेकिन खुशी वहां बिल्कुल निडर बैठी थी और उसने हिम्मत से बोला “मुझे बेघर होना मंजूर है, लेकिन ना मैं झूठ बोलूंगी और ना ही मैं गलत का साथ दूंगी क्योंकि ये मेरे संस्कारों के खिलाफ है।” इतना बोलते ही वो वहां से चली गई।

कुछ देर में ऑडिट टीम आई और सारे कागजात जब्त कर लिए और फिर खुशी से पूछताछ की और उसने पूरे सबूतों के साथ अपनी बात रखी जिसके चलते उसके बॉस और टीम लीडर को वहां से ले गए और कुछ दिन बाद ये खबर पूरे जगह में आग की तरह फैल चुकी थी और सब खुशी की वाह कर रहे थे।

इसी के चलते खुशी के पास एक बहुत अच्छी नौकरी का प्रस्ताव आया और वो उसके घर के पास भी था और साथ में ज्यादा पैसे भी मिल रहे थे। उसने वहां से रिजाइन कर के दूसरी कंपनी को ज्वाइन किया और वो वहां और भी ज्यादा खुश थी और सबसे बड़ी बात वो अपने मां के पास थी।

लेखिका

तोषिका

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