*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* – तोषिका
“*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* समझा तू। जो तू मुझे पैसों का बोल रहा है ना, मैं सब जानती हू। मुझे ना तेरी सलाह की कोई जरूरत नहीं है।” मिहिर का सामान बाहर फेंकते हुए उसकी मां रानी बोली और अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया। बस उस बंद कमरे की … Read more