*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* – तोषिका

“*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* समझा तू। जो तू मुझे पैसों का बोल रहा है ना, मैं सब जानती हू। मुझे ना तेरी सलाह की कोई जरूरत नहीं है।” मिहिर का सामान बाहर फेंकते हुए उसकी मां रानी बोली और अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया। बस उस बंद कमरे की … Read more

घर सिर्फ ईंट पत्थरों से नहीं बनता – मंजू ओमर

बेटी की शादी के कार्ड छप चुके थे और वही कुर्सियों पर बैठा महेश कैलकुलेटर पर जोड़ घटाना कर रहा था।  सामने मेज पर रखे पेपर पंखे की हवा से फड़फड़ा कर महेश की दिमाग को और उलझा रहे थे। तभी वंदना ने चाय का कप रखते हुए महेश से कहा देखो महेश भूमिका की … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – बिमला रावत जड़धारी

कमली ने अपने ससुराल वालों के सहयोग से अपनी माॅंजी (भरोसी) का अंतिम संस्कार कर दिया। अब तेरहवीं की व्यवस्था के लिए सास बोली,;तुम दूसरे हिस्से में रह कर शांति से अपनी माॅं का बाकी का काम निपटा लो। सारे रीति-रिवाज पंडित जी तुम से करा देंगे। अभी पितृ भोज की व्यवस्था भी करनी है। … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिल से बनता है – शुभ्रा बैनर्जी 

रामेश्वरम ने अपनी पत्नी कमला से वादा किया था, एक सुंदर घर बनाकर कमला को उपहार देने का।हर महीने हार्ड वेयर की दुकान जाते, साथ में एक छोटी सी डायरी और पेन लेकर।दुकान में जाकर सीमेंट,और सरिया की कीमत पूछकर लिखते थे। दुकानदार ने पूछा एक दिन”दादा, पिछले बारह सालों से यही काम कर रहे … Read more

घर ईटों से नहीं दिलों से बनता है – खुशी

रामानंद एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे जो एक सरकारी अध्यापक थे।स्कूल के बाद दो तीन ट्यूशन पढ़ाते फिर शाम को घर लौट कर बच्चों को पढ़ाते ।उनकी पत्नी रजनी गृह लक्ष्मी थी जो घर संभालती बचत करती और अपने पति का सहयोग करती।रामानंद किराए के घर में रहते थे उनकी बहुत इच्छा थी कि … Read more

आत्मीयता – डॉ बीना कुण्डलिया

अरी शान्ति ओ शान्ति ऽऽऽ राह चलती शान्ति देवी को पीछे से लगी आवाज सुनकर रूकना पड़ा। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो शकुन बुआ उनकी ही तरफ दौड़ी चली आ रहीं थीं।  अरी, हुआ तेरे छोटे लडके का रिश्ता कहीं क्या ? शकुन बुआ बोली। पड़ोसी शकुन बुआ जो रिश्ते कराने का काम करती वो … Read more

घर में रौनक नहीं रही – करुणा मलिक

पूजा, सब ठीक तो है? बार-बार दरवाजे पर आ रही हो सुबह से…..मम्मी जी भी कह रही हैं कि आज पता नहीं, क्या बात है….पूजा कई बार दरवाजे पर दिख रही है। हाँ-हाँ सब ठीक है…..दरसल जोधपुर से दोनों ननदें आने वाली है, वैसे तरुण गए हैं रेलवे स्टेशन….. पर न जाने क्यों लेट हो … Read more

“घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है।” – अंशु कंसल

“मां, आज टिफिन में सूजी का हलवा थोड़ा ज्यादा रखना,” सोनल ने रसोई में काम करती मां से चहकते हुए कहा। मां ने प्यार से उसके बाल सहलाए और मुस्कुराते हुए बोलीं, “पता है मुझे, तुम्हारी सहेली रश्मि को मेरे हाथ का हलवा कितना प्रिय है। पर सोचती हूं, जब तुम दोनों की शादी हो … Read more

घर इंटों से नहीं , दिलों से बनता है | – सुदर्शन सचदेवा

दिल्ली की एक ऊँची सोसायटी के बारहवें माले पर स्थित फ्लैट नंबर 1204 बाहर से किसी सपनों के घर जैसा दिखता था। आधुनिक फर्नीचर, चमकदार इंटीरियर, हर कमरे में एसी, नवीनतम गैजेट्स और हर सुविधा मौजूद थी। सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें देखकर लोग कहते, “वाह! क्या शानदार घर है!” लेकिन उस फ्लैट के भीतर … Read more

*अस्ति कुटीर * – अनु माथुर

लखनऊ के कश्मीरी मोहल्ले की वो गली जानी जाती थी अपने आमने-सामने वाले दो मकानों से।   एक था “शांति कुटीर” – प्रोफेसर हरीश वर्मा का तीन मंज़िला, संगमरमर-वाला, बेल्जियम काँच की खिड़कियों वाला मकान। पर अंदर? सन्नाटा ऐसा कि घड़ी की टिक-टिक भी पहाड़ लगती। 72 साल के वर्मा जी। बीवी को गुज़रे 10 साल। … Read more

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