उड़ान अभी बाकी है

 झूले को देखते ही कौशल्या का दिल मचल उठा। उनके भीतर छिपी वह दस साल की नटखट बच्ची अचानक जाग उठी। बचपन में सावन के झूले, जब वह सखियों के साथ आसमान छूने की होड़ लगाती थीं। उन्होंने इधर-उधर देखा। कोई उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रहा था। उनके होठों पर एक शरारती मुस्कान बिखर … Read more

वक्त का पहिया घूमता जरूर है – मंजू ओमर

सुनिए  जी दीपक को जरा फोन करिए बात करने का मन कर रहा है, किया था फोन अरविंद जी ने कहा ,पत्नी सुनीता से । तो क्या हुआ नहीं उठाया फोन कभी उठाता है वह मेरा । और ना कभी अपने आप  फोन करता है ।  अरे नहीं उठाता भाग्यवान मैं कितनी बार तुमसे बता … Read more

टूटी बेड़ियाँ, नया सवेरा

 यह जानकर राघव के मन में जानकी के प्रति सम्मान सौ गुना बढ़ गया। उसने सोचा कि क्या वह जीवन भर एक भगोड़े की तरह जिएगा? क्या वह केवल अपने दुर्भाग्य पर आँसू बहाता रहेगा? नहीं, यदि उसने गलती की थी, तो उस गलती को स्वीकार करने और क्षमा माँगने का साहस भी उसी को … Read more

विदाई की धूप

 सावित्री जी के होंठ थरथराए। अतीत की एक पूरी किताब उनकी आँखों के आगे खुल गई। चौबीस बरस पहले की वह सर्द रात याद आ गई, जब अनघा के पिता, स्वर्गीय रमेश जी, एक भयानक सड़क हादसे में उन्हें और छह महीने की नन्हीं अनघा को बेसहारा छोड़कर चले गए थे। उस समय सावित्री की … Read more

अस्तित्व की पहचान

आरव दबे कदमों से अंदर आया और मां की साड़ी का पल्लू पकड़कर बोला, “मां, तुम सुबह सबसे पहले जागती हो और रात को सबसे बाद में सोती हो। पूरे दिन तुम किसी न किसी के लिए कुछ न कुछ करती रहती हो। कभी झाड़ू, कभी खाना, कभी कपड़े… फिर भी दादाजी, दादी और पापा … Read more

स्वाभिमान का पहिया

 रामदीन का गला भर आया। उन्होंने अपनी कांपती आवाज को संभालते हुए कहा, “बाबूजी, हम अनपढ़ रहे, जिंदगी भर लोगों का बोझ ढोते-ढोते हमारी पीठ झुक गई। हम नहीं चाहते कि हमारे बेटे को भी समाज की यह जिल्लत और बेबसी देखनी पड़े। उसकी फीस, उसकी किताबें, रहने-खाने का खर्चा बहुत है। वह कहता है … Read more

मौन की दीवार

तुम्हारी आँखों से आँसू गिर रहे थे, पर तुम्हारे हाथ कांपते हुए आटे की थाली में चलते रहे। मैं दरवाज़े की ओट में खड़ा सब सुन रहा था। मेरे सीने में कुछ बुरी तरह टूटा, एक टीस उठी कि मैं आगे बढ़ूँ, माँ का हाथ थाम लूँ और कहूँ कि बस कीजिए। पर मेरे पाँव … Read more

स्वाभिमान की भोर

“मेरा नाम सोफिया है। सोफिया मिलर। मैं लंदन से बोल रही हूं… और मुझे नहीं पता कि मुझे यह बात कैसे कहनी चाहिए, लेकिन सच को छुपाना अब मेरे लिए मुमकिन नहीं है।” अनन्या का माथा ठनका। उसने काम बंद कर दिया। “किस बारे में बात कर रही हैं आप?” “विक्रम के बारे में। तुम्हारे … Read more

किस्मत की रेत और दोस्ती का हाथ

शालिनी समझ गई कि राघव के सामने ज्यादा कुरेदना उनके स्वाभिमान को और चोट पहुंचाएगा। उसने केवल सामान्य बातें कीं, बच्चों का हालचाल पूछा जो पास के एक सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, और रागिनी का फोन नंबर अपनी डायरी में लिख लिया। जाते समय उसने रागिनी के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “बस … Read more

अनकही सरगम

 बाबूजी की यह बात अवनि के सीने में तीर की तरह चुभी। ‘किसी अपने के लिए जज्बात…’ इसका मतलब राघव किसी और से प्यार करता था? अवनि को लगा जैसे उसकी पूरी दुनिया ही ढह गई हो। उसका एकतरफा प्रेम, जो बिना किसी उम्मीद के पनप रहा था, अब एक असहनीय दर्द बन चुका था। … Read more

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