रिश्तों की कीमत – करुणा मलिक

प्रकाश के पापा, मुझे लगता है कि वसीयत लिखकर वकील के पास रखने में ही ठीक रहेगा वरना प्रभात की बहू हमारे मरते ही तुरंत घर- जमीन के दो टुकड़े करवा देगी और औने-पौने दाम में बिकवा कर चलती बनेगी।  हाँ, कह तो तुम ठीक रही हो पर क्या दोनों बेटियाँ अपना हिस्सा लेंगी? वे  … Read more

रिश्तों की कीमत – डाॅ संजु झा

रिश्तों की कीमत व्यक्ति को कब,किस रूप में चुकानी पड़ जाऍं, कोई नहीं बता सकता है? मैं सीमा अपने व्यस्त जीवन में  उलझी हुई आज फिर  काॅलेज के लिए लेट हो गई।काॅलेज में गाड़ी से उतरते हुए मैं जल्दी -जल्दी अपने क्लास रूम की ओर बढ़ रही थी,तभी मेरी नजर अचानक से एक लड़की पर … Read more

रिश्तों की अहमियत – मंजू ओमर 

बहु यह तूने कैसी चाय बनाई है ना मीठी है ना कोई स्वाद है।  फीकी फीकी अदरक भी नहीं डालती । कल्याणी जी ने बहु रजनी को टोका ,क्या हुआ मां जी ठीक तो बनी है चाय डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए बेटा सुरेंद्र बोला। हां तू तो बीवी का ही पक्ष लेगा । नहीं … Read more

*बेटी ये तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा है* – तोषिका

आज से मेरा एक नया सफ़र शुरू होगा मां, मैं बहुत खुश हू। मुस्कुराते हुए खुशी बोली तभी उसकी मां उसके पास आई और उसको गले लगाकर बोली “अपना ध्यान रखना, तू पहली बार मेरे से इतनी दूर जा रही है तो थोड़ी बेचैनी सी हो रही है।” ओफ्फो मा इतनी टेंशन मत लिया करो, … Read more

धरोहर – शुभ्रा बैनर्जी

“मां,मैं कल आ रही हूं।रात ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगी।तुम जगी मत रहना।आज शाम की ट्रेन है।”  निधि का फोन आते ही सुधा चहक कर बातें करने को व्याकुल हो उठी।निधि ने तीन वाक्य में ही बातें खत्म करते हुए बाय कर दिया तो,सुधा ने टोका”अरे,रुक तो जरा।फ्लाइट में आने वाली थी ना?फिर ट्रेन से … Read more

समर्पण – मीनाक्षी गुप्ता

“बरसात की हल्की फुहारें पड़ रही थीं। गाँव की मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू वातावरण में घुल गई थी। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली गौरी अपने घर के आँगन में बैठी किताबों के पन्ने पलट रही थी। उसकी आँखों में बड़े सपने थे, लेकिन उन सपनों तक पहुँचने का रास्ता आसान नहीं था।” गौरी के … Read more

संस्कार – करुणा मलिक 

वाह! हर बार लड़की के ही संस्कारों की परीक्षा होती है, क्या लड़के किसी  विशेष कार्ड को लेकर पैदा होते हैं, मम्मी प्लीज….. आपकी इसी बात को सुनकर मैंने पूरे दो हफ्ते  गुजार दिया कि शायद केशव की मम्मी ने भी कुछ तो संस्कार दिए होंगे।  दीशू…. इतना आसान नहीं होता सब कुछ, सब आदमी … Read more

मुझे सज़ा दो माँ – सावित्री मल्होत्रा 

समर अपने घुटनों के बल ज़मीन पर गिर पड़ा और अपनी माँ के पैरों से लिपटकर दहाड़ें मारकर रोने लगा। “मुझे माफ़ कर दो माँ… मैं बहुत नीच हूँ। मैंने तुम्हें सिर्फ एक माँ के रूप में देखा, कभी एक इंसान और एक औरत के रूप में तुम्हारे दर्द को नहीं समझा। मैंने तुम पर … Read more

टूटी हुई उम्मीदें – सविता गर्ग

  शादी के कुछ महीनों बाद ही सौम्या को सुमित्रा जी का रहन-सहन, उनकी पुरानी आदतें और उनका आयुष से बात करना खटकने लगा। घर में रोज़-रोज़ क्लेश होने लगे। सौम्या को अपनी ‘प्राइवेसी’ में सास का दखल बिल्कुल पसंद नहीं था। आयुष जो कभी अपनी माँ की एक आह पर रो पड़ता था, अब पत्नी … Read more

ममता को जलील मत करो – सावित्री मल्होत्रा

आरोही मुझे अचरज से देखने लगी। मैंने बात जारी रखी, “बेटा, ब्रांड्स बाजार में मिलते हैं, लेकिन माँ का प्यार किसी शोरूम में नहीं बिकता। तुम्हारी माँ ने पिछले तीन सालों से अपने लिए एक नई चप्पल तक नहीं खरीदी है, ताकि वो तुम्हारे कॉलेज की फीस भर सकें। आज वो तुम्हारे जन्मदिन के लिए … Read more

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