रिश्तों की कीमत – खुशी

आदित्य एक अनाथ लड़का था।जो अनाथाश्रम में रहता था।वही के जो मैनेजर थे वो ही वहां रह रहे बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते थे।कभी कोई रहीस आदमी आ जाता तो  ढंग से खाना पीना मिल जाता नहीं तो वही रुखा सुखा। एक अपमान भरा जीवन जिया था उसने कभी कोई प्यार करने वाला नहीं … Read more

रिश्तों की कीमत – माता-पिता और बेटी – सुदर्शन सचदेवा

“बेटियाँ घर की रौनक होती हैं” — यह बात शर्मा जी अक्सर कहा करते थे। उनकी इकलौती बेटी अन्वी उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी थी। घर में उसकी हँसी गूंजती तो लगता जैसे हर कोना मुस्कुरा उठा हो। अन्वी बचपन से ही बहुत चंचल थी। सुबह उठते ही सबसे पहले माँ के गले लगती … Read more

मां का अकेलापन – गीता वाधवानी

 “मम्मी, मैं चलती हूं कैब आ गई है।”   मम्मी( राधा देवी) ने कहा-” नैनसी, सुन तो बेटा, फिर कब आएगी, अबकी बार तो बहुत दिनों बाद आई है। इसी शहर में अपना ट्रांसफर क्यों नहीं करवा लेती। अब मैं और अकेली नहीं रह सकती। मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता तेरे बिन। देख लेना किसी दिन … Read more

खामोशी और झंकार: एक अनकहे अहसास की कहानी

रात के करीब आठ बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की फुहारें गिर रही थीं और बालकनी में बैठी अंजलि अपनी पड़ोसन विशाखा के साथ ठहाके लगाकर हंस रही थी। उनकी हंसी की आवाज़ बेडरूम तक आ रही थी, जहाँ समीर अपने लैपटॉप पर ऑफिस का कुछ ज़रूरी काम निपटाने की कोशिश कर रहा था। … Read more

बेड़ियों की उड़ान

“ये आप क्या कह रहे हैं? अवनि अभी अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करना चाहती है, उसका सपना एक सिविल सर्विस ऑफिसर बनने का है।” “अरे तो मैं कहाँ मना कर रहा हूँ। शादी के बाद अपने ससुराल में बैठकर जितनी मर्जी किताबें पढ़ ले। तुम अपना ये फालतू का ज्ञान देना बंद करो और … Read more

रिश्तों की असली वसीयत

शहनाई की गूंज और गेंदे के फूलों की महक से पूरा घर महक रहा था। घर के आंगन में शामियाना लगा हुआ था और मेहमानों की चहल-पहल से एक उत्सव का माहौल बना हुआ था। आज कावेरी जी की इकलौती बेटी शिखा की हल्दी की रस्म थी। कावेरी जी अपने माथे का पसीना पोंछते हुए … Read more

दौलत का भ्रम

दीपावली का समय था और पूरे घर में रौनक छाई हुई थी। घर की बड़ी बहू निर्मला हमेशा की तरह रसोई से लेकर मेहमानों के स्वागत तक की सारी जिम्मेदारियां चुपचाप निभा रही थी। वहीं छोटी बहू, राखी, अपने महंगे रेशमी कपड़ों और भारी गहनों से लदी, बस सोफे पर बैठकर अपनी बेटी तान्या के … Read more

जिंदगी की धूप और छाँव

 रेस्टोरेंट के एक कोने वाली टेबल पर दो लोग आमने-सामने बैठे थे। मेज पर रखी चाय से उठती भाप उन दोनों के बीच पसरी खामोशी को और भी गहरा कर रही थी। माधव, जिसकी उम्र पैंतीस के पार हो चुकी थी, अपनी चाय के कप को दोनों हाथों से पकड़े हुए कुछ सोच रहा था। … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – शशि नरूला

एक गाँव में नीलम नाम की एक लड़की रहती थी। उसके पिता बढ़ई थे और माँ सिलाई का काम करती थीं। उनका घर बहुत छोटा था। घर में केवल दो कमरे थे और सुविधाएँ भी बहुत कम थीं। लेकिन उस घर में प्रेम, सम्मान और अपनापन इतना था कि वहाँ आने वाला हर व्यक्ति खुश … Read more

रिश्तो की कीमत – एम पी सिंह ‘मोहि”

नीलम शादी करके ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में पति और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति आनंद की अच्छा पड़ा लिखा, सरकारी नौकरी मैं था. सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। नीलम से ससुर एक सेवानिवृत सरकारी अधिकारी थे. अच्छी सोसाइटी … Read more

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