राधिका का संघर्ष – भारती अनिल सोनी

राधिका आज बहुत खुश थी,, आज उसकी सालों की मेहनत सफल हुई थी।

उसके इतने सालों के संघर्ष का अब अंत करीब था ।

उसकी बेटी अनुभा का आज डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हो गया था ।

अनुभा पिछले 3 सालों से आई ए एस अधिकारी की परीक्षा दे रही थी

पर आज उसे सफलता मिल ही गई ।

आज राधिका के यहां सुबह से बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ था।

ओर राधिका ओर उसके पति गोविन्द के तो खुशी के मारे आंसू रुक ही नहीं रहे थे।

आखिर इतनी कड़ी मेहनत के बाद ये खुशियों भरा दिन आया था ।

राधिका की याद आया कि कैसे बेटी होने पर सबने उसको उलाहने दिए थे, कि अरे बेटी हुई हे, अब कुल का नाम कैसे रोशन होगा बेटियां तो वैसे भी पराई होती हे, उसी वक्त राधिका ओर गोविंद ने ये फैसला ले लिया था कि हमारी बेटी ही हमारें लिए बेटे से बढ़कर हे ।

जैसे जैसे अनुभा बड़ी होती गई तो उनके घर के खर्च भी बढ़ने लगे।

सभी परिवार वालों ने कहा कि अरे क्यों लड़की को इतना पढ़ाना हे इतनी महंगी पढ़ाई ओर कोचिंग क्यों लगवानी हे

पर अनुभा के मम्मी पापा दोनों ने किसी की नहीं सुनी।

इधर गोविन्द के ऑफिस में भी मंदी की वजह से गोविंद को नौकरी से निकाल दिया ।

तो परिवार के बाकी सदस्यों ने गोविंद से कहा कि ठीक है फिर अब हम इतना खर्च नहीं कर सकते तुम अपनी पत्नी ओर बेटी को साथ कही ओर गृहस्थी बसा लो।

ये वही परिजन थे जिनके लिए राधिका ओर गोविंद एक पैर पर खड़े रहते थे 

ओर आज इस मुश्किल घड़ी में इन्होंने ही अपने भाई ओर उसकी पत्नी का साथ छोड़ दिया।

गोविन्द ने एक बस्ती में किराए पर एक कमरा लिया ।

राधिका के पास जो गहने थे ओर जो थोड़ी गोविंद की बचत थी उससे उन लोगों ने उस एक कमरे में फिर से अपना जीवन शुरू किया ।

अब राधिका ने घर से ही टिफिन का काम शुरू किया ।

 बहुत से ऐसे व्यक्ति थे जो यहां भोपाल में अकेले रहते थे,

तो अब राधिका ने घर के खर्च ओर अनुभा की पढ़ाई के लिए टिफिन का काम शुरू किया।

शुरुआत में तो उसे उतना फायदा नहीं मिला पर उसने हिम्मत नहीं हारी।

वो रोज टिफिन में नए नए व्यंजन बना कर देती थी।

धीरे धीरे उसके हाथ का बना शुद्ध ओर सात्विक भोजन सभी को खूब पसंद आने लगा।

अब आस पास की औरते भी छोटी मोटी पार्टी के लिए राधिका को आर्डर देने लगी।

ओर इस तरह उसका अनुभा टिफीन सेंटर खूब अच्छे से चलने लगा।

इधर अनुभा भी पढ़ाई में खूब होशियार निकली और आज ये उसकी इतनी कठिन मेहनत का फल था कि वो आज डिप्टी कलेक्टर बन गई।

आज उसके दादा दादी ओर परिवारजन सभी अपने आप को शर्मिंदा महसूस कर रहे थे कि अनुभा ओर उसकी मां को हमने इतने कष्ट दिए फिर भी इसने अपने परिवार ओर कुल का नाम रोशन कर दिया ।।

भारती अनिल सोनी

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