परिवार – गीता अस्थाना

विवाहोत्सव समाप्त हुए एक महीना बीत चुका था। मेहमान तो विवाह संपन्न होने के तुरंत बाद ही चले गए थे। घर के आत्मीय सदस्य भी परिवार सहित धीरे धीरे अपने अपने कार्यस्थल पर चले गए। नई नवेली होने के बावजूद नमिता काफी व्यस्त रही। सबके जाने के बाद नमिता को कुछ सुकून महसूस हुआ। उसके … Read more

परिवार – करुणा मालिक 

शांति काकी……जरा देखना, बाहर गुड़िया को….बकरियों और भेड़ों की आवाज आ रही है, मेरी मीटिंग चल रही है। सौम्या ने अपने कंप्यूटर को म्यूट करके अपनी घरेलू सहायिका शांति को आवाज लगाते हुए कहा क्योंकि वह जानती थी कि उसकी दो साल की बेटी बकरियों की आवाज सुनकर बाहर की तरफ भागती है और अगर … Read more

राधिका का संघर्ष – भारती अनिल सोनी

राधिका आज बहुत खुश थी,, आज उसकी सालों की मेहनत सफल हुई थी। उसके इतने सालों के संघर्ष का अब अंत करीब था । उसकी बेटी अनुभा का आज डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हो गया था । अनुभा पिछले 3 सालों से आई ए एस अधिकारी की परीक्षा दे रही थी पर आज … Read more

*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* – तोषिका

“*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* समझा तू। जो तू मुझे पैसों का बोल रहा है ना, मैं सब जानती हू। मुझे ना तेरी सलाह की कोई जरूरत नहीं है।” मिहिर का सामान बाहर फेंकते हुए उसकी मां रानी बोली और अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया। बस उस बंद कमरे की … Read more

घर सिर्फ ईंट पत्थरों से नहीं बनता – मंजू ओमर

बेटी की शादी के कार्ड छप चुके थे और वही कुर्सियों पर बैठा महेश कैलकुलेटर पर जोड़ घटाना कर रहा था।  सामने मेज पर रखे पेपर पंखे की हवा से फड़फड़ा कर महेश की दिमाग को और उलझा रहे थे। तभी वंदना ने चाय का कप रखते हुए महेश से कहा देखो महेश भूमिका की … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – बिमला रावत जड़धारी

कमली ने अपने ससुराल वालों के सहयोग से अपनी माॅंजी (भरोसी) का अंतिम संस्कार कर दिया। अब तेरहवीं की व्यवस्था के लिए सास बोली,;तुम दूसरे हिस्से में रह कर शांति से अपनी माॅं का बाकी का काम निपटा लो। सारे रीति-रिवाज पंडित जी तुम से करा देंगे। अभी पितृ भोज की व्यवस्था भी करनी है। … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिल से बनता है – शुभ्रा बैनर्जी 

रामेश्वरम ने अपनी पत्नी कमला से वादा किया था, एक सुंदर घर बनाकर कमला को उपहार देने का।हर महीने हार्ड वेयर की दुकान जाते, साथ में एक छोटी सी डायरी और पेन लेकर।दुकान में जाकर सीमेंट,और सरिया की कीमत पूछकर लिखते थे। दुकानदार ने पूछा एक दिन”दादा, पिछले बारह सालों से यही काम कर रहे … Read more

घर ईटों से नहीं दिलों से बनता है – खुशी

रामानंद एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे जो एक सरकारी अध्यापक थे।स्कूल के बाद दो तीन ट्यूशन पढ़ाते फिर शाम को घर लौट कर बच्चों को पढ़ाते ।उनकी पत्नी रजनी गृह लक्ष्मी थी जो घर संभालती बचत करती और अपने पति का सहयोग करती।रामानंद किराए के घर में रहते थे उनकी बहुत इच्छा थी कि … Read more

परिवार – मधु वशिष्ठ

बड़ा सा बोर्ड लगा था और उस पर लिखा था बच्चों का अपना घर। उद्घाटन के बाद जब सब घर जाने को थे तो मिन्नी ने सविता मैडम को रोकते हुए कहा, आप कहीं नहीं जाएंगे आपका कमरा तो यहां ही बना हुआ है अब इस अपना घर का काम आपको ही संभालना है।  मैडम … Read more

एक कटोरी चीनी – प्रतिमा श्रीवास्तव

कुछ ही दिन आए हुए थे कविता को इस शहर में। सबकुछ नया – नया सा था। किसी को जानती नहीं थी, ऑफिस वालों से थोड़ी – थोड़ी जान-पहचान का सिलसिला शुरू हुआ था। कविता बहुत ही सुलझी, समझदार थी, बहुत जल्दी किसी से घुलती मिलती नहीं थी।उसे इंसानों की बहुत समझ थी जो उसे … Read more

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