पिता का स्वाभिमान – तोषिका

अपने *पिता का स्वाभिमान* हमेशा रखना बेटा। तुम्हारे पिताजी बोलेंगे कुछ नहीं, पर तुम उनका ध्यान रखना। अपने बेटे केशव के सर पर हाथ फेरती हुई हीना बोली। अगले दिन जब वो सुबह सुबह उठा और हॉस्पिटल जाने की तैयारी कर ही रहा था कि उसके पिताजी माधव का उसको कॉल आया। उस कॉल को … Read more

हाथ जुड़े पर बराबरी के लिए – लतिका श्रीवास्तव

यजमान को बुलाइए कन्यादान की रस्म करनी है पंडित त्रिभुवन प्रसाद की आवाज गूंज उठी और सबकी निगाहें वधू शिवांगी के पिता दिनकर जी को ढूंढने लगीं। विशाल शानदार शामियाना लंबी लंबी कनातें दूधिया रोशनी में सतरंगी आभा बिखेर रहीं थीं। पीले गुलाबी लाल सुर्ख गुलाब से लेकर बसंती गेंदे शुभ्र सेवंती की लटकने गुच्छों … Read more

स्वाभिमान – खुशी

राम कुमार एक दुकान पर मुनीम की नौकरी करते थे। उनका हिसाब इतना अचूक होता था कि सेठ कैलाश चंद्र कहते कि राम तेरे जैसा हिसाब जमाने वाला कोई नहीं कभी एक पैसे का भी हेर फेर नहीं।राम कुमार की इस ईमानदारी के कारण कैलाश चंद्र तो उन्हें बहुत मानते थे और राम कुमार के … Read more

अपराधबोध – उमा वर्मा

मै अनुज अस्पताल के बेड पर पड़ा हुआ हूँ ।डाक्टर ने जवाब दे दिया है ।कैन्सर का आखिरी सटेज है ।डाक्टर ने कहा है कि अपने नजदीकी से मिलने के लिए ।मेरे पास समय बहुत कम रह गया है ।मेरे पास अब है ही कौन?  सारे रिश्ते मैंने बहुत पहले खो दिया है ।माता पिता … Read more

“बुढ़ापा तो सबको आता है “। – उमा वर्मा

श्याम वर्ण श्यामा भले ही सांवली सलोनी थी पर चेहरे पर मासूमियत और सुन्दरता मे कोई कमी नहीं थी।तभी तो पिता ने श्यामा नाम धर दिया था बेटी का ।बहुत शांत और सुशील श्यामा ने मैट्रिक पास ही किया था कि पिता ने अच्छा घर वर देख कर उसकी शादी तय कर दी । बहुत … Read more

वक्त की मार । – उमा वर्मा

साँझ का उजाला छिपने को है।अंधेरा अपने पैर पसारने के लिए तैयार है।खिड़की के पास खड़ी गायत्री अपने बीते दिनों को याद कर रही है ।वक्त की मार से वह भी कहाँ बच पायी है।बेटा अपने ससुराल गया है प्रिया को लिवाने।कई साल पीछे लौटी है गायत्री ।कितनी सुखी गृहस्थी थी उसकी । अच्छे पति … Read more

बस बहुत हुआ – गीता वाधवानी

 अतुल  ने अपने पिता गिरधारी लाल से कहा-” पिताजी आप समझते क्यों नहीं है, एक तो शहर में खर्चा इतना ज्यादा होता है और ऊपर से छोटे-छोटे घर, भैया और मैं एक साथ मां का और आपका खर्चा नहीं उठा पाएंगे, इसीलिए आप मेरे साथ रहे और भैया के साथ मां रहने चली जाएगी, थोड़े-थोड़े … Read more

वक्त की मार बहुत गहरी होती है – मंजू ओमर 

इंसपेक्टर साहब इस आदमी ने मेरे साथ धोखा किया है। मुझसे शादी करके मेरी बेटी के साथ बलात्कार किया है।  इंस्पेक्टर हंसा अरे क्या कह रही है तू एक पिता अपनी बेटी के साथ बलात्कार करेगा‌ क्यों झूठा इल्जाम लगा रही है तू शरिफ इंसान पर। तुम लोग बस पैसे वाले इंसान को फांसती हो … Read more

खालीपन – करुणा मलिक 

निधि! सचमुच तुम बडे़ दिल वाली हो। मुझे तो तुम्हारे आने के बाद पता चला कि भाभी का सुख क्या होता है… बड़ी भाभी को तो कुछ नहीं पता कि ननदों का लेन- देन क्या होता है…  पर दीदी…. ऐसा कैसे हो सकता है कि  अमृता भाभी की मम्मी ने उन्हें कुछ भी नहीं सिखाया? … Read more

*जब एक भूल ने छीन लिया मायके का आंगन* – तोषिका

कई बार एक छोटी सी भूल भी, जन्मों के ज़ख्म दे जाती है, इसीलिए अपने और पराए में फर्क को परखना आना चाहिए। निडर आवाज में कामिनी अपनी बहु शिल्पी से बोली। जी मां बोल कर वह अपने कमरे में चली गई। शिल्पी अभी नई नई चोपड़ा खानदान की बहु बनी थी। चोपड़ा खानदान का … Read more

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