शादी का डर
अंशुमन अब पूरी तरह से झुंझला चुका था। उसे लग रहा था कि उसकी माँ उसकी भावनाओं और उसके डर को समझने के बजाय सिर्फ समाज की रीतियों को महत्व दे रही हैं। उसने चिढ़कर कहा, “माँ, आप नहीं समझेंगी। मुझे ऐसे किसी विश्वास की ज़रूरत नहीं है जिसका टूटना मेरी और आपकी बर्बादी का … Read more