नेकी की पूंजी

 अनुपमा अस्पताल के उस ठंडे फर्श पर बैठकर अपनी किस्मत को कोसने लगी। उसके मन में आलोक पर भयानक गुस्सा और साथ ही बेइंतहा दर्द उमड़ रहा था। वह मन ही मन ईश्वर से लड़ने लगी, “हे भगवान! इसी दिन के लिए आलोक ने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों पर लुटा दी थी? जब किसी को … Read more

वटवृक्ष

अनिकेत ने रिया के सामने वह वीडियो चला दिया। उसने न कोई चीख-पुकार की, न हाथ उठाया, बस भरी आंखों से शांत स्वर में कहा, “रिया, मुझे तुम पर तरस आ रहा है। जिस मां ने छह महीने जागकर तुम्हारे बच्चे को अपनी छाती से लगाकर पाला, जिसने तुम्हारी हर सेवा को अपना सौभाग्य समझा, … Read more

कुल की रक्षक

कौशल्या जी ने प्यार से अंकिता के सिर पर हाथ फेरा और उसके आंसू पोंछते हुए बड़े वात्सल्य से कहा, “पगली, कर्ज कैसा? एक बात हमेशा गांठ बांध कर रख ले। एक घर तभी बिखरता है जब घर के लोग अपनों की बजाय गैरों की फुसफुसाहटों पर यकीन करने लगते हैं। जब तक सास अपनी … Read more

सास होने का झूठा दंभ

“नहीं बेटी, आज मुझे बोलने दे,” मनोरमा जी ने रुंधे गले से कहा। “तूने भूखे-प्यासे रहकर, अपनी दूधमुँही बच्ची को पीठ पर बाँधकर मेरी सेवा की, अस्पताल के चक्कर काटे, इस घर को मंदिर बनाया… और मैंने? मैंने अपने अहंकार में चूर होकर सिर्फ चार लड्डुओं और मठरियों के लिए तेरे आत्मसम्मान को पैरों तले … Read more

ममता की अग्निपरीक्षा

 देवकी जी के इस असीम स्नेह और अदम्य साहस ने नव्या के भीतर जीने की नई उम्मीद जगा दी। नव्या ने अदालत में खड़े होकर गवाही देने का फैसला किया। उधर, समर के रईस दोस्तों के परिवारों ने देवकी जी पर दबाव बनाने की हर मुमकिन कोशिश की। उन्हें पैसे की पेशकश की गई, धमकियां … Read more

मैली चादर का उजास

“अरे ओ पल्लवी! कहाँ कान में रुई ठूँसकर बैठी है? सुनती क्यों नहीं? रीना कब से अपने कमरे में बैठी है कि कोई आकर उसके बाल संवार दे, उसका श्रृंगार कर दे। पर बहुओं के तो नखरे ही नहीं खत्म होते! ज़रा सा काम क्या बोल दो, जैसे पहाड़ टूट पड़ता हो!” उस वक्त घर … Read more

“तुम्हारी कमाई, मेरी कमाई…

 नेहा ने अपने पिता को भी फ़ोन करके कहा, “पापा, आप चिंता मत कीजिए। मैं और विपुल जो बन पाएगा, मदद करेंगे। हम सब मिलकर इस मुश्किल से निकलेंगे।” मोहनलाल जी की आँखें भीग गईं। उन्होंने कहा, “बेटी, तूने आज मुझे बहुत बड़ा सहारा दिया है।” नेहा हर महीने अपनी तनख़्वाह का एक हिस्सा माता-पिता … Read more

संतान सुख – डॉ आभा माहेश्वरी

एक छोटे-से गाँव में सोमनाथ और सावित्री नाम के दंपती रहते थे। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। सोमनाथ गाँव के विद्यालय में अध्यापक थे और सावित्री घर सँभालने के साथ-साथ गाँव के बच्चों को पढ़ाया करती थी। उनके घर में धन-दौलत की कमी नहीं थी, लेकिन उनके जीवन में एक ऐसा खालीपन था, … Read more

काबिलियत की उड़ान: सिफ़ारिश नहीं, संघर्ष की जीत

 शिखा तुरंत कमरे में आई और पिता के पास बैठकर उनके हाथ पकड़ते हुए बोली, “नहीं पापा, बिल्कुल नहीं। आप किसी को फोन नहीं करेंगे। मुझे किसी की सिफ़ारिश की भीख नहीं चाहिए। तान्या को सिफ़ारिश से नौकरी मिली है, उसे हमेशा यह अहसास रहेगा कि वह उस जगह के काबिल नहीं थी। लेकिन मैं … Read more

मातृ-छाया

नमन ने आगे बढ़कर माँ के दोनों हाथ अपने हाथों में ले लिए। उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू छलक आए थे। “माँ, मुझे माफ कर दीजिए। हम दोनों अपनी झूठी प्रतिष्ठा और दिखावे के चक्कर में इतने अंधे हो गए थे कि हमें इस घर की कीमत केवल रुपयों में दिखाई दे रही थी। … Read more

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