शादी का डर

अंशुमन अब पूरी तरह से झुंझला चुका था। उसे लग रहा था कि उसकी माँ उसकी भावनाओं और उसके डर को समझने के बजाय सिर्फ समाज की रीतियों को महत्व दे रही हैं। उसने चिढ़कर कहा, “माँ, आप नहीं समझेंगी। मुझे ऐसे किसी विश्वास की ज़रूरत नहीं है जिसका टूटना मेरी और आपकी बर्बादी का … Read more

परवरिश

अभिनव ने पिता के आँसू पोंछते हुए कहा, “पिताजी, परेशानी तो तब होती है जब नीयत में खोट हो। आपने हमें जो संस्कार दिए हैं, जो ईमानदारी और बड़ों का सम्मान करना सिखाया है, क्या वो बस किताबी बातें थीं? आपने अपनी पूरी ज़िंदगी हमारी पढ़ाई और भविष्य के लिए कुर्बान कर दी, अब जब … Read more

 ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल

निहारिका को देखते ही वह अपनी कुर्सी से खड़ा हुआ और एक सौम्य मुस्कान के साथ बोला, “हेलो निहारिका, मैं शशांक। आपसे मिलकर अच्छा लगा।” निहारिका ने हाथ मिलाने की ज़हमत तक नहीं उठाई। वह कुर्सी खींचकर बैठी और अपने महंगे गॉगल्स टेबल पर पटकते हुए बोली, “देखिए शशांक, मैं यहाँ सिर्फ अपनी माँ की … Read more

परिवार के प्रति जिम्मेदारी

रोहन जैसे ही दफ्तर से थका-हारा घर लौटा, उसने देखा कि कमरे की लाइटें बंद हैं। उसने स्विच ऑन किया तो उसकी नजर सोफे के एक कोने में सिकुड़ कर बैठी अपनी पत्नी सौम्या पर पड़ी। सौम्या का चेहरा आँसुओं से भीगा हुआ था, आँखें रो-रोकर लाल हो चुकी थीं और उसके होंठ अभी भी … Read more

संस्कार कभी व्यर्थ नहीं जाते – निमिषा गोस्वामी

“सुहानी… ऐ सुहानी! अरे यार, जल्दी करो, देर हो रही है।” मनु अपनी पत्नी को तेज़ आवाज़ में बुला रहा था। “आ रही हूँ, बस दो मिनट और इंतज़ार करो।” सुहानी ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया। “उफ़! ये महिलाएँ भी…” कहते हुए मनु पास पड़े सोफे पर धम्म से बैठ गया। वह आँखें … Read more

अपनो का साथ – मंजू ओमर

तुम रो क्यों रही हो मुक्ता क्या हुआ है ,और यह किससे बातें कर रही थी अभी फोन पर । वह पापा से बात कर रही थी मैं ,,तो क्या हुआ पापा से बात कर रही थी तो रोने की क्या बात है मयंक बोला । वह मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है यूटरस का … Read more

दो कुलों का मान – आरती शिव टावरी

“बेटियाँ दो-दो कुलों का नाम रोशन करती हैं”—यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का सच्चा अनुभव है। इस बात को साबित किया नंदिनी ने। नंदिनी एक साधारण परिवार की बेटी थी। उसके माता-पिता ने उसे बचपन से ही अच्छे संस्कार, शिक्षा और आत्मविश्वास दिया। वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहती थी, लेकिन उसकी सबसे … Read more

अनपढ़ माँ

“क्या हुआ पापा? आप खुश नहीं हैं क्या? इतनी बड़ी कामयाबी मिली है मुझे,” समीर ने हैरानी से पूछा। रामनाथ जी ने गहरी साँस ली और बहुत ही शांत लेकिन चुभने वाले स्वर में कहा, “मैं बहुत खुश था समीर, लेकिन अभी कुछ ही पलों में तुमने मुझे यह अहसास दिला दिया कि मेरी और … Read more

मुक्कमल इश्क़

मेरा नाम लेते ही उसके हाथ कांप गए। उसने झटके से मेरी तरफ देखा। वो पत्थर जैसी दिखने वाली लड़की की आँखों में अचानक समंदर उमड़ पड़ा। वो कुछ बोल नहीं पा रही थी, बस मुझे एकटक देखे जा रही थी, जैसे यह यकीन करना चाहती हो कि यह कोई सपना तो नहीं है। वो … Read more

तीज की चुनरी, भारत का तिरंगा – लक्ष्मी कानोडिया ‘अनिका’

सावन जब धरती पर उतरता है, तब वह केवल वर्षा नहीं लाता; वह स्मृतियों की भीगी हुई पोटली, लोकगीतों की गूँज, मेहंदी की महक और भारतीय स्त्री के मन का अनंत उत्सव भी साथ लाता है। पीपल की डाल पर पड़ा झूला केवल रस्सियों का सहारा नहीं होता, वह पीढ़ियों से चली आती संस्कृति का … Read more

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