कब तक चुप रहोगे – डॉ आभा माहेश्वरी
शहर के पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा घर था। घर की खिड़की पर बैठकर हर शाम सत्तर वर्षीय शारदा देवी सड़क को निहारती रहती थीं। उनके चेहरे पर उम्र की झुर्रियाँ थीं, लेकिन आँखों में अब भी किसी का इंतज़ार ठहरा हुआ था। उनका इकलौता बेटा निखिल शहर से दूर नौकरी करता था। महीने में … Read more