प्रायश्चित की भोर
थाली को मेज पर एक झटके से रखते हुए जब रीता ने कहा, “खाना रख दिया है, ठंडा होने से पहले निगल लेना,” तो कमरे की ठंडी और उदास हवा में एक असहज सन्नाटा पसर गया। खाट के कोने पर सिमटे बैठे पैंसठ वर्षीय विश्वंभर जी ने कंपकपाते हाथों से अपनी सफेद चादर को ठीक … Read more