जिसे उसने अपना सच समझा – लक्ष्मी कनोडिया ‘अनिका’
“माँ, आप मुझे पहचानती हैं?” सामने बैठी वृद्धा ने कुछ क्षण उस लड़की को देखा। फिर मुस्कराकर बोलीं— “बिल्कुल। तुम मेरी बेटी हो।” लड़की की आँखों में आँसू आ गए। “नहीं माँ… मैं आपकी बेटी नहीं हूँ।” वृद्धा चुप हो गईं। कमरे में कुछ देर तक सिर्फ दीवार पर लगी घड़ी की टिक-टिक सुनाई देती … Read more