अंतर्मन की आहट – मोहिनी मिश्रा

  “नंदिनी, उस दिन तुमसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा था, और आज भी तुम्हारे पास बैठकर जो सुकून मिलता है, वो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। सच कहूं तो सब कुछ है मेरे पास। एक बहुत अच्छा घर है, एक बेहतरीन करियर है, पैसा है, रुतबा है… बस वो एक दोस्त नहीं है, … Read more

एक खाली कोख – राजेन्दर सक्सेना

 “ये सज़ा नहीं है रोहन, ये मेरा चुनाव है,” काव्या ने रोते हुए उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा। “तुम्हें लगता है कि कोख से जन्म देने वाली ही माँ होती है? कबीर को जब चोट लगती है, तो दर्द मुझे यहाँ, मेरे सीने में होता है। जब वह मुझे ‘काव्या मम्मा’ कहता है, … Read more

**फ़र्ज़ की वेदी पर खिला प्रेम** – विजय सीकर

“सच बताऊं मयंक?” पल्लवी ने एक गहरी और हताशा भरी सांस ली। “एक तो अब उम्र बहुत हो गई है। पैंतीस की होने वाली हूँ मैं। इस उम्र में हमारे समाज में लड़कियों को सिर्फ समझौते मिलते हैं, जीवनसाथी नहीं। और दूसरा, अब इस उम्र में मुझे कौन ढूंढेगा? न मेरे सिर पर पिता का … Read more

घर की लक्ष्मी का सम्मान – विनीता सिंह

कर्नल रमेश जी आर्मी से रिटायर होने के बाद अपने परिवार के साथ रहने लगे। उनके पास धन दौलत किसी भी चीज की कमी नहीं थी उनका बेटा एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन था। उसका नाम समीर था। समीर और उसकी पत्नी मीरा दोनों साथ रहते थे समीर हर समय पैसे और ज्यादा से ज्यादा से … Read more

घर की लक्ष्मी – खुशी

चारु एक भरे पूरे घर की लड़की थी।मां शीला पापा  रमन शर्मा।चाचा विवेक और उनकी पत्नी रजनी।चारु एक भई बहन थे।चारु का भाई रजत ।चाचा के दो बेटे थे  नामित और सुमित सभी लोग बड़े प्यार से रहते।रमन जी बैंक में थे और विवेक का अपना हार्डवेयर स्टोर था।रजत mnc मे था।वही चारु ने इंटीरियर … Read more

क्या यह झूठ ही सही है – शुभ्रा बैनर्जी 

खोया तो शुभा ने भी बहुत कुछ था,छोटी उम्र से ही।दुख बर्दाश्त करने या समझ पाने की जब उम्र नहीं थी,तभी एक -एक करके उसे प्यार करने वाले दादा और दादी चले गए।यौवन अभी दहलीज लांघ भी ना पाया था,कि पापा की हार्ट अटेक से असमय मृत्यु हो गई।जिस उम्र में रंगीन सपने देखना भाता … Read more

घर के लक्ष्मी का सम्मान – डाॅ उर्मिला सिन्हा

     बड़ी सी हवेली कई-कई हवादार कमरे सुसज्जित। हवेली के पीछे बड़ा सा फलों का बाग सामने रंग-बिरंगे फूलों का बागीचा। चारदिवारी के भीतर ही स्वच्छ न निर्मल जल का पोखरा जिसमें तरह-तरह की मछलियां तैरती रहती। माली के साथ दो-चार सेवक बाहर-भीतर घर की साफ-सफाई देखभाल में लगे रहते। सुख-समृद्धि,रिद्धि -सिद्धि का वास था इस … Read more

आंसुओं का मोल – कमलेश आहूजा

चंदा रे मेरे भैया से कहना बहना याद करे..दूर कहीं रेडिओ में गाना बज रहा था और गाना सुनकर मेघा की आंखों से अश्रु की धारा बह रही थी।रक्षाबंधन का दिन था,उसे छोटे भाई रोहन की बहुत याद आ रही थी जो कुसंगति में पड़कर घर छोड़कर चला गया था।मेघा अपने भाई से बहुत प्यार … Read more

आंसुओं की कीमत – तोषिका

जल्दी जल्दी काम कर लेती हू, बुआ जी बस आने ही वाली होगी, अपने आप से बात करती हुई नेहा बोली। तभी वहां पर राजेश, उसका पति आया और उसको इतनी हड़बड़ाहट में देख कर बोला, नेहा कोई नहीं सारा काम हो जाएगा, तुम फिकर मत करो मैं सब संभाल लूंगा। नेहा बोली “आपको तो … Read more

ट्रेन सफर – एम. पी. सिंह

ये मेरे जीवन का पहला ट्रैन का सफर था जिसे मैं अकेला करने वाला था. इस सफर की ख़ास बात ये है कि सफर प्रारम्भ होने से पहले ही समाप्त हों गया.  पूरा किस्सा इस प्रकार है – मैं करोलबाग दिल्ली मैं रहता था और 10वी क्लास मैं पढ़ता था. मेरे भाई साब ने भोपाल … Read more

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