आंगन की वह सफेद लकीर
“नाप ले नीरज, इस नीम के पेड़ से लेकर उस तुलसी के चौरे तक का हिस्सा आज से तेरा हुआ, और पूरब के वो दो कमरे मेरे। और हाँ, कल सुबह होते ही राजमिस्त्री आ जाएगा, इस आंगन के ठीक बीचों-बीच आठ फीट ऊँची पक्की दीवार उठ जाएगी। अब यह रोज-रोज का क्लेश और ताने-उलाहने … Read more