जीवनसाथी के आंसू  – गीता वाधवानी

 आज मैं तुम्हें अकेले में रोता तड़पता देख कर बहुत खुश हूं। आप लोग सो रहे होंगे कि मैं किसके लिए कह रही हूं और क्यों?   मैं हूं स्वर्गीय नंदिता और यह शब्द मैं  अपने पति के लिए कह रही हूं। अब आप सोचेंगे कि कैसी पत्नी है निर्दयी  और स्वार्थी, लेकिन जब आप मेरी … Read more

आंसू – खुशी

लक्ष्मी एक सीधी साधी महिला थी।जिसकी शादी केशव से हुई ।जो अपने माता पिता की इकलौती संतान था।घर की जमीन घर  ससुर राजीव की सरकारी नौकरी सास नीला देवी ससुर साहब के हाथों का छाला जरा सा आंख में बाल भी आ जाए तो पूरा डॉक्टर की टीम खड़ी करदे।केशव बचपन से ही गुस्से का … Read more

बडी बहन – श्रीप्रकाश श्रीवास्तव

आज सबसे छोटी बहन सीमा की हल्दी थी। दो साल पहले मंझली की शादी के बाद पापा को उसकी शादी की फिक्र लग गयी। संयोग से रिश्ते में ही एक लडका मिल गया तो शादी करके अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होकर बाकी जिदंगी चैन से काटना चाहते थे। सबसे छोटा भाई एम काम कर रहा … Read more

अपने वजूद का पता – अनंत मारवाड़ी

 सावित्री जी निहारिका की बात सुनकर सन्न रह गईं। उनके पास अपनी बेटी के इस कड़वे सच का कोई जवाब नहीं था। उन्होंने बस एक लंबी ठंडी आह भरी और कपड़ों की तह लगाने लगीं। लेकिन उस दिन निहारिका के अंदर एक चिंगारी सुलग उठी थी। उसे समझ आ गया था कि समाज ने औरतों … Read more

वह अजनबी, जो मेरी माँ से बढ़कर थी – नीतीश मिश्रा

 “मेरी प्यारी सुधा ताई, आज समझ में आता है कि आपने मेरे लिए क्या किया था। मेरी जन्म देने वाली माँ ने मुझे इस दुनिया में लाया जरूर था, लेकिन इस दुनिया में जिंदा कैसे रहना है, यह आपने सिखाया। जब मेरे अपनों ने ही मेरे लिए चक्रव्यूह रचा था, तब आप मेरे लिए कृष्ण … Read more

मौन की गूंज: एक अनकही दास्तान – राजेन्दर सक्सेना

सुबह के पांच बज रहे थे। अलार्म बजने से पहले ही वंदना की आँखें खुल गईं। यह उसके जीवन का वह अलिखित नियम था, जिसमें रविवार की कोई छुट्टी नहीं होती थी। बिस्तर से उठते ही उसने सबसे पहले अपनी सास सुमित्रा जी का गर्म पानी तैयार किया, फिर रसोई में जाकर बच्चों के टिफिन … Read more

अक्स: जब बेपरवाही को मिला ज़िम्मेदारी का सुकून – हर्षिता सिंह

शहर की भागदौड़ से दूर, एक पुरानी लेकिन बेहद खूबसूरत कॉलोनी में रहने वाली मानवी एक ऐसी लड़की थी, जो अपनी ही ख्यालों की दुनिया में मगन रहती थी। उसके लिए दुनिया का मतलब सिर्फ उसकी कैनवास, उसके रंग, कुछ पुरानी किताबें और अपने कानों में इयरफ़ोन लगाकर अपनी धुन में खोए रहना था। तेईस … Read more

अधूरी लकीरों का सफर – नमिता पंडित

“अगर, मगर और काश… इन शब्दों में जिंदगी नहीं जी जाती राघव। मैं मानती हूं कि हमने अपने सबसे अच्छे साल तकलीफों में गुजारे। मैंने अपने मायके का सुख हमेशा के लिए खो दिया और तुमने अपने शुरुआती संघर्षों में वो सुकून नहीं पाया जो एक नौजवान को मिलना चाहिए। लेकिन आज हम कहां हैं? … Read more

जड़ों की पुकार – मीरा महेश

अमन ऑफिस की फाइलें पलट तो रहा था, लेकिन उसका दिमाग उन पन्नों पर नहीं था। उसकी आँखों के सामने बार-बार अपनी माँ का वो उदास चेहरा आ रहा था, जो उन्होंने कल रात उसे खाना परोसते समय छुपाने की कोशिश की थी। शादी के तीन साल बाद ही उसके और उसकी पत्नी दिशा के … Read more

असीम प्रेम की अनूठी दास्तान – निधि सहाय

पार्टी के बीच में अचानक काव्या की नज़र एक ऐसे चेहरे पर पड़ी जिसे उसने पिछले कई सालों से नहीं देखा था। वह समीर था। समीर, काव्या के साथ कॉलेज में पढ़ता था। वह हमेशा शांत रहता था, क्लास में सबसे पीछे बैठता था और अपनी किताबों में खोया रहता था। लेकिन वह अक्सर छुप-छुप … Read more

error: Content is protected !!