दहलीज के पार का उजाला
“मुझे माफ़ कर दो सुप्रिया… मुझे माफ़ कर दो,” कुणाल की आवाज़ कांप रही थी। “आज तुमने जब वो दरवाज़ा छोड़ा, तब पहली बार मुझे अपनी कायरता का अहसास हुआ। मैं घर पर बैठा रहा, लेकिन मेरा दम घुट रहा था। मिस्टर मल्होत्रा घर आए, माँ ने सब इंतज़ाम किए, लेकिन मैं डाइनिंग टेबल पर … Read more