इंसपेक्टर साहब इस आदमी ने मेरे साथ धोखा किया है। मुझसे शादी करके मेरी बेटी के साथ बलात्कार किया है।
इंस्पेक्टर हंसा अरे क्या कह रही है तू एक पिता अपनी बेटी के साथ बलात्कार करेगा क्यों झूठा इल्जाम लगा रही है तू शरिफ इंसान पर। तुम लोग बस पैसे वाले इंसान को फांसती हो ऐसे झूठे इलज़ाम लगा कर कि कुछ पैसे वसूल ले इनसे। इसी चक्कर मे रहती हो तुम लोग।
नहीं साहब हम गरीब जरूर है लेकिन पैसे के लालची नहीं है। मेरी रिपोर्ट लिखे चल भाग यहाँ से आ जाती है हम लोगो का समय बरबाद करने और भी बहुत सारे काम होते है हमारे पास हवलदार निकालो यहाँ से इन माँ बेटी दोनों को और हाँ ये फिर यहाँ दिखाई नहीं देनी चाहिए समझे, जी साहब।
और उन दोनों माँ बेटी को हवलदार ने हाथ पकडकर बाहर निकाल दिया। वो बेचारी नीमा अपनी बेटी का हाथ पकडकर एक पेड की छांव मे खडी होकर रोने लगी। अब क्या करें बेटा हम लोगो का यहाँ कोई सुनने वाला नहीं है। उधर इंसपेक्टर के फोन की घंटी बजी,
हाँ साहब आई थी दोनों माँ बेटी आपके खिलाफ रिपोर्ट लिखाने पर मैने न लिखी रिपोर्ट भगा दिया दोनों को। आप निश्चित रहे। हाँ साहब मेरी बख्शीश, हाँ तुम्हे मिल जाएगा तुम्हारा इनाम। हाँ ध्यान रखना वो फिर से न आने पाए वहाँ। अरे नहीं नहीं साहब वो आस पास भी नहीं फटकेगी ध्यान रखेगें।
इधर एक किनारे खडी माँ बेटी आंसू बहा रही थी तभी उनके पास एक गाड़ी आकर रूकी और उनमें से एक महिला उतरी। नीमा के पास जाकर पूछने लगीं मै इधर से निकल रही थी तो आप दोनों को रोते देखा तै रूक गई आप दोनों क्यों रो रही है क्या बात है। नीमा घबरा रही थी वो महिला जिसका नाम आशा था
वो बोली देखो मेरा एक एन जीओ चलता है और हम लोग घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और किसी भी तरह से प्रताड़ित होने वाली मजलूम लोगों की मदद करते है तुम बताओ क्या हुआ है हम तुम्हारी पूरी तरह मदद करेगें। देखो पहले अपना और इसका नाम बताओ तुम दोनों कौन हो
और क्या हुआ है सब बातें बेझिझक बताओ घबराओ नहीं तुम्हे पूरा न्याय मिलेगा। मै माँ बेटी हू, मेरा नाम नीमा है और बेटी का नाम रेखा है। हम माँ बेटी वक्त की मारी हूँ मै घर घर चौका बरतन करती हूँ।
नीमा और पंद्रह साल की बेटी रेखा अपने पति श्याम के साथ रहती थी। मेहनत मजदूरी करके अपना और बेटी का पेट भरती थी। नीमा घरो मे झाड़ू पोछा और खाना बनाने का काम करती थी। पहले वो अपनी बेटी को काम पर अपने साथ ले जाती थी। लेकिन जब से बड़ी हुई मै उसको काम पर ले जाना बंद कर दी।
क्योंकि काम की जगह पर मालिकों की गंदी नजर बेटी पर पडती थी। नीमा का पति श्याम बेल्डिंग का काम करता था। पहले तो ठीक था लेकिन इधर कुछ समय से वो घर मे खर्च के पैसे नहीं देता था। मांगों तो मारपीट करता था। मै अकेले परेशान हो जाती थी।
मेरे पैसे और छीन ले जाता था। असल मे कुछ दिनों से श्याम जुआ खेलने लगा था और शराब भी पीने लगा था। पता नहीं कौन से लोगों से दोस्ती कर ली थी। पैसे मांगने पर मेरी पिटाई कर देता था ऐसे ही एक दिन पैसे न देने पर रेखा का हाथ पकडकर ले जाने लगा और बोला यदि तू पैसे नहीं देगी तो तेरी बेटी पैसे देगी मै इसी से अचछे पैसे कमाने लूंगा।
जैसे ही मैने देखा वो बेटी का हाथ पकडकर घसीट रहा है तो मै वही पर पड़ा हंसिया श्याम के सिर पर दे मारी। श्याम लडखडा कर गिर पडा और हम दोनों माँ बेटी एक थैले मे कुछ कपड़े डाले और बस स्टैंड आ गई।
वहाँ जो भी बस मिल गई उसी मे बैठ गई और दूसरे गाँव आ गई। कब न रहने का न खाने पीने का कोई ठिकाना था। कुछ पैसे थे उसी से रातभर विश्राम स्थल मे बिताया। फिर सुबह पास की सोसाइटी मे काम की तलाश मे गई और मुझे वहाँ काम मिल गया।
कोशिश करने पर काम तो मिल गया नीमा को फिर वही दो घरों मे काम मे काम करने लगी। वही सोसाइटी वालो से मिन्नते करके वही सर वेंट क्वाटर मे रहने की जगह भी मिल गई, बोली मै जल्दी ही अपने रहने के लिए कोई एक कमरा ले लूगीं तो यहाँ से चली जाऊंगी। काम पर लग गई नीमा बेटी को वही कमरे पर छोड जाती थी।
दो घरों मे काम मिला था। झाड़ू पोछा बरतन के साथ खाना भी बनाती थी। नीमा देखने सुनने मे अच्छी थी स वक्त की मारी थी।
और बेटी, बेटी तो अभी कम उम्र ही थी तो और भी आकर्षक लगती थी। बस वक्त की मार ने काम करने को मजबूर कर दिया था। इन दो घरों के कामों मे एक मे तो पूरा परिवार था और दूसरे घर मे नरेन्द्र अकेले ही रहता था। वहाँ नीमा सब काम के साथ चाय नाश्ता सब बनाती थी घर की देखभाल भी वही करती थी।
नरेन्द्र की उम्र करीब 40,45 साल की रही होगी। शादी तो उसकी हुई थी पर तलाक़ हो चुका था पत्नी से। अच्छे ओहदे पर नौकरी करता था नरेन्द्र। वैसे तो शरीफ था नीमा से बहुत अच्छे से बात चीत करता था।
हमदर्दी भी रखता था नीमा से। अक्सर नीमा से बातों बातों मे उसके परिवार के बारे मे पूछता था लेकिन नीमा टाल जाती थी। काम करने जाना है दूसरे घर जल्दी मे हू फिर कभी बताऊंगी। उसकी एक बेटी है ये भी नहीं बताया था उसने।
नीमा देखने सुनने मे अच्छी थी रहती भी साफ सुथरी थी और थोड़ी पढाई लिखाई भी की थी। इसलिए काम वाले घर पर मर्द उसपर बुरी नजर रखते थे। लेकिन नरेन्द्र के यहाँ ऐसा कुछ नहीं था वो हद मे रहकर बात करता था इसलिए नीमा उसपर ज्यादा भरोसा करती थी। वही जो दूसरे घर मे नीमा काम करती थी
मिस्टर अरोरा के यहाँ वहाँ अंजलि अरोरा के पति अक्सर मौका देखकर नीमा का हाथ पकड़ लेते थे और गंदे प्रस्ताव रखते थे उसके सामने। नीमा अक्सर उन्हें नकार देती थी। लेकिन आज सडक पर मिस्टर अरोरा ने नीमा को पैदल जाते देखा तो रोक लिया और पैसे का लालच देने लगे अपने प्रस्ताव को मानने की दम देने लगे।
और नहीं मानी तो तुमको सोसाइटी मे बदनाम कर देगे इल्जाम लगाकर। दूसरे दिन नीमा अंजलि अरोरा के घर गई और काम ंंन करने की बात कही,
कारण पूछने पर नीमा ने सही सही तो नहीं बताया लेकिन बात चीत के दौरान अंजलि के पति अरोरा साहब आ गए तो नीमा घबरा गई। अंजलि को सारा माजरा समझ आ गया । क्योंकि पहले भी अंजलि के घर का काम काम वालियों ने छोड दिया था फिलहाल,,,,,,,,,,।
दूसरे दिन नीमा नरेन्द्र के घर काम करने गई तो बड़ी चुपचाप उदास सी थी और काम करने की जल्दी भी नहीं थी। नरेन्द्र ने पूछ लिया कि क्या बात है तो नीमा ने सच सच बता दिया और बोली मै ऐसी वैसी नहीं हूँ
बाबू जी वो तो वक्त और हालात की मारी हूँ इसलिए करती हू ये काम। नरेन्द्र ने कहा अब तुम्हारा खर्चा कैसे चलेगा ये लो थोडे से पैसे रख लो। अरे नहीं बाबूजी रहने दिजिए। अरे नहीं रख लो तुम्हे जरूरत होगी तो नीमा ने रख लिए। नरेन्द्र के इस तरह के वयवहार से नीमा का विश्वास जम गया।
आज नीमा सुबह उठी नहीं तो बेटी ने जगाया अम्मा अभी तक उठी नहीं क्या काम पर नहीं जाना क्या अभी तक सो रही है। माँ का हाथ पकडा तो तेज बुखार था। अम्मा तू तो बुखार मे तप रही है मत जा काम करने आराम कर। अरे कहीं और नहीं जाऊँ तो ठीक है
लेकिन नरेन्द्र बाबूजी के यहाँ तो जाना ही पड़ेगा क्योंकि वहाँ कोई नहीं है और व़ो चाय भी नहीं बना पाते। अरे नहीं अम्मा तूझे तो इतनी तेज बुखार है आराम कर कहीं नहीं जाना। अच्छा बेटा सुन आज तू बाबूजी के यहाँ काम पर चली जा बता देना कि माँ की तबियत ठीक नहीं है अच्छा।
दरवाजे पर दस्तक हुई तो नरेन्द्र ने दरवाजा खोला तक एक पंदरह साल की सुन्दर सी लड़की खडी थी। कौन हो बेटा क्या काम है, मै नीमा की बेटी हू आज अम्मा की तबियत खराब है तो मै काम करने आई हूँ। नीमा की बेटी उसने तो कभी बताया नहीं कि उसकी बेटी भी है। इस कमसिन सी सुन्दर सी बेटी को नरेन्द्र एक टक देखता रहा।
शाम को बुखार की दवा और कुछ फल लेकर नरेंद्र नीमा के घर पहुँच गया। ये लो नीमा डाकटर से कहकर दवाई लाया हूँ और थोडे से फल है। अरे इसकी क्या जरूरत थी बाबूजी। जरूरत थी तभी तो लाया हूँ। तीन दिन बाद नीमा ठीक होने पर काम पर आई तो नरेन्द्र ने कहा नीमा तूने कभी बताया नहीं कि तेरी एक बेटी भी है।
और तेरा पति कहाँ है वो मर गया है। देख नीमा मै भी अकेला हू और तू भी अकेली है, जवान बेटी को लेकर कहाँ कहाँ भटकती फिरेगी। शादी करेगी मुझसे, तेरी बेटी को बाप मिल जाएगा और तूझे भी घर मिल जाएगा। कहाँ तक देखभाल करेगी जवान बेटी की।
दो तीन दिन सोच विचार करके शादी के लिए हां करद नीमा ने। एक अच्छे इंसान की छवि नरेन्द्र की नीमा के दिल मे बन गई थी। दो दिन बाद नरेन्द्र ने कुछ पैसे दिए नीमा को और बोला बाजार जाकर कुछ राशन पानी ले आओ, अब तो घर तुम्हे ही संभालना है तो तुम जाओ और ये सामान ले आओ। और फिर नरेन्द्र ने रेखा से चाय कमरे मे मंगाई। चाय लेकर आते ही रेखा को नरेन्द्र ने कमरे मे बंद कर लिया और रेखा के साथ बालात्कार कर डाला।
जब नीमा घर आई तो रेखा दौडकर अम्मा से लिपट गई, अम्मा अपने घर चलों। नीमा को सारा माजरा समझ आ गया। नीमा बड़ी जोर से चिल्लाई बाबूजी आप तो मेरी बेटी के पिता बनने चले थे
ये क्या कर डाला। शादी मुझसे की और,,,,,,,,। अरे तुममे ऐसा क्या था जो मै तुमसे शादी करता, वो तो तेरी बेटी को देखकर मैने ऐसा प्रस्ताव रखा था। नीमा ने सिर पीट लिया। थाने गई तो वहाँ उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गई नरेंद्र ने थाने मे पहले ही फोन कर दिया था जान पहचान से।
जब वापस आई बेटी के साथ घर तो एनजीओ वाली आशा बहन जी ने अपना मोबाइल रिकार्ड करने को खोल रखा था। नीमा जोर जोर से चिल्ला रही थी। नरेंद्र बोला क्या औकात है तुम लोगो की क्या हो गया शादी तुमसे की और सुहागरात तेरी बेटी के साथ मना लिया।
अरे तू तो उसका बाप बनने चला था न, अरे कोई भी इंसान दूसरे की औलाद का बाप नहीं बन सकता ये बात मै क्यों नहीं समझ पाई।
पीछे से आशा जी सबकुछ रिकॉर्ड कर रही थी। रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस नरेंद्र को गिरफ्तार कर ले गई। और आशा जी ने नीमा और रेखा को संस्था की तरफ से मदद कराई और उसके रहने और काम की वयस्था कराई एक अच्छी जगह काम पर लगाया।
दोस्तों ऐसा होता रहता है आज दिन किस्से सुनने क़ मिलते है। किसी पर विश्वास करने पर बहुत बड़ा धोखा मिलता है। इसलिए किसी पर भरोसा न करें वक्त की मार से तक कोई बच नही पाया है।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
23 अप्रैल