रिश्तों की कीमत – एम पी सिंह

नीलम शादी करके ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में पति और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति आनंद की अच्छा पड़ा लिखा, सरकारी नौकरी मैं था. सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। नीलम से ससुर एक सेवानिवृत सरकारी अधिकारी थे. अच्छी सोसाइटी … Read more

रिश्तों का सूती धागा

 उस दिन मीरा ने चाय की ट्रे जैसे-तैसे मेज पर रखी और बिना कुछ कहे वहां से अपने कमरे में चली गई। उसके दिल में एक अजीब सी खटास पैदा हो गई थी। जिस सास के साथ वह अपने दिल की हर बात साझा करती थी, अचानक वह उसे एक अजनबी और स्वार्थी औरत लगने … Read more

नयी सुबह की मीठी धूप और एक अनकही रीत

 “अरे मीरा बेटा, तुम इतनी जल्दी क्यों उठ गईं? अभी तो छह भी नहीं बजे हैं। आज तो रविवार है, तुम्हें आराम करना चाहिए था,” निर्मला देवी ने बहुत ही स्नेह से कहा। मीरा हड़बड़ा गई। उसे लगा कि शायद उसने कोई बहुत बड़ी गलती कर दी है या फिर उसकी सास उसे ताना मार … Read more

खोखली दीवारें

 अविनाश और सौरभ, जो लाखों रुपये महीने कमाते थे, जो बड़े-बड़े मैनेजमेंट के गुरु थे, आज एक अनपढ़ कामवाली के सामने बौने नज़र आ रहे थे। बाहर बरामदे में बैठे दीनानाथ जी ने कमला ताई की एक-एक बात सुनी थी। उनके कांपते होठों पर एक फीकी सी हंसी तैर गई। उन्होंने एक गहरी सांस ली … Read more

*बेटियां दो दो कुलों का नाम रोशन करती है* – तोषिका

“भाईसाहब आप बिलकुल सही थे कि *बेटियां दो दो कुलों का नाम रोशन करती है* और आपकी बेटियां ने आज मुझे गलत साबित कर दिया और मुझे इसकी खुशी भी है।” श्यामलाल ने अपने दोस्त हरि से बोला। तभी वहां पर हरि की बेटी राशि आई और उसने अपने पापा से पूछा “कैसी बात पापा?” … Read more

खोखली मर्यादाएं

रोहन ने अपनी बात जारी रखी, “बाबूजी, क्या अब भी आप भाभी को उसी चौखट पर बांधे रखना चाहते हैं जहाँ से कभी कोई नहीं गुज़रेगा? अगर यही सब हमारी बहन के साथ हुआ होता… अगर आपके दामाद ने हमारी बहन को ऐसे छोड़ दिया होता, तो क्या तब भी आप यही कहते कि ‘मर्द … Read more

स्वाभिमान मेरा भी। – मधु वशिष्ठ

  पूरा हॉल तालियों से गूंज रहा था। मुझे माल्यार्पण किया जा रहा था और बहुत सुंदर फ्रेम्ड सर्टिफिकेट से सम्मानित भी किया जा रहा था। और ऐसा हो भी क्यों ना आज मेरा सेवा निवृत्ति का दिन था।           पति और बच्चों के साथ जब मैंने घर वापस आने पर स्वयं को मिले हुए सारे उपहार … Read more

रिश्तों की उलझी डोर और एक मीठी पहल

 “देख बेटा, विशाखा अभी नादान है। नई-नई इस घर में आई है। तू उसकी जेठानी है, बड़ी बहन जैसी है। अगर वो कोई काम अच्छा करे, तो उसकी तारीफ कर दिया कर। मीठे बोल बोलने में हमारे पैसे तो खर्च नहीं होते, लेकिन सामने वाले का दिल जरूर जीत लिया जाता है। अगर तू उसकी … Read more

वजूद की लड़ाई

 रीमा  वहीं बुत बनकर खड़ी रह गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी गलती क्या है? क्या उसका विधवा होना उसका अपराध है? या उसका किसी के आगे हाथ न फैलाकर खुद कमाना उसका गुनाह है? क्यों पुरुष वर्ग उसे बस एक इस्तेमाल की वस्तु समझता है, और जब अपनी पत्नी के सामने … Read more

स्नेह के बदलते सांचे

कौशल्या देवी आज सुबह से ही अजीब सी खीझ से भरी हुई थीं। रसोई के बर्तन ऐसे खटक रहे थे जैसे वे भी उनकी झुंझलाहट में सुर मिला रहे हों। उनके कदमों की आहट और बड़बड़ाहट पूरे घर में गूंज रही थी। कभी वह दाल के डिब्बे को जोर से रखतीं तो कभी फ्रिज का … Read more

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