स्वाभिमान मेरा भी – सीमा सिंघी
शंकर मेरे भाई कैसे हो?? आज बड़ी याद आ रही थी तुम्हारी?? मैं मानता हूं मैंने बहुत बड़ी भूल की है.. पाप किए हैं मैंने मेरे भाई….अपने हिस्से की जमीन के साथ साथ तुम्हारे हिस्से की जमीन भी बेचकर चुपचाप शहर चला आया। जो मुझे नहीं करना था क्योंकि शुरुआती दिन महीने तो मैं बड़ा … Read more