*बेटियां दो दो कुलों का नाम रोशन करती है* – तोषिका

“भाईसाहब आप बिलकुल सही थे कि *बेटियां दो दो कुलों का नाम रोशन करती है* और आपकी बेटियां ने आज मुझे गलत साबित कर दिया और मुझे इसकी खुशी भी है।” श्यामलाल ने अपने दोस्त हरि से बोला।

तभी वहां पर हरि की बेटी राशि आई और उसने अपने पापा से पूछा “कैसी बात पापा?” तभी नाम आँखों से हरि ने राशि के सर पर हाथ रखा और बोला “बेटा, तुमने जो मुझे गर्व महसूस कराया है उसी की ही बात हो रही थी।” तभी उधर खड़े श्यामलाल ने बोला “बेटा, पूरी बात मैं बताता हू, ये तो कुछ बोलेगा नहीं।”

“कैसी बात?” राशि ने माथे पर लकीरे लाते बोला

श्यामलाल ने शुरू किया बताना कि कैसे ये बात तब की है जब तुम्हे पैसा हुए बस १ हफ्ता हुआ था और मैं तुम्हारे पापा से मिलने आया था। तब मैने उनको बस एक ही बात बोली थी।

राशि से रहा ना गया और उसने तुरंत पूछा “क्या बात?”

श्यामलाल बोला “यही कि, हरि की दूसरा बच्चा भी बेटी हुई है और जब वो बूढ़े होंगे तो उनका ध्यान कौन रखेगा और फिर लड़की को पढ़ाना होगा और बाद में शादी, बहुत खर्चा होगा। पर पता है बेटी हरि का क्या जवाब था?”

उधर राशि ने अपना सर ना में हिलाया और श्यामलाल बोला “तुम्हारे पापा ने बोला था कि अगर दूसरी भी बेटी हुई तो क्या हुआ, ये तो फायदे की ही बात है, इसी बहाने मेरी बेटियां दो कुलों का नाम रोशन कर पाएंगी और मुझे पूरा पता है कि बड़े हो कर दोनों समझदार बनेगी।”

“फिर आगे क्या हुआ अंकल?” राशि ने अपनी नम वाली आंखों से पूछा। 

फिर क्या होना था बेटा “सबको लगा कि हरि की किस्मत खराब है पर उसने कभी भी दुनिया के लोगों की बातें अपने मन या दिमाग में नहीं लगने दी।”

श्यामलाल अपनी बात को आगे बढ़ाता हुआ बोला “आज जो भी है सब कुछ वो सब हरि के भरोसे और विश्वास की वजह से है जो उसने अपनी बेटियों पर दिखाया और आज देख लो तुम ने और तुम्हारी बहन ने साबित कर दिया कि बेटियां सब कर सकती है बस उनको एक हल्का था धक्का चाहिय होता है और एक भरोसा।”

तुम आज अपने कारोबार को, अपने दोनों परिवारों को संभाला है, मुझे पता है आगे भी संभालती रहोगी।

राशि के मन में आँसुओं की वर्षा हो रही थी तभी उसने पूछा ” अंकल, आप पापा के इतने अच्छे दोस्त है, फिर भी आपने बेटा बेटी में फर्क किया। ऐसा क्यों?”

श्यामलाल हल्का सा मुस्कुराया और बोला “मेरी वो दुनिया की सबसे बड़ी गलती थी कि मैं भी दुनिया के विचारों के साथ अपने विचार को भी उन्हीं के साथ भेज दिया था, पर मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था और उस से मुझे एक चीज सीखने को मिली कि जरूरी नहीं जहां सब जा रहे हो वो रास्ता सही ही होगा। इसीलिए कभी भी हार नहीं माननी चाहिए जैसे तुम्हारे पापा ने कभी नहीं मानी।”

राशि ने एक दम से जोर से दोनों को गले लगा लिया और बोला “धन्यवाद पापा, धन्यवाद हमारा इतना ख्याल रखने के लिए और हमें कभी कम ना समझने के लिए।”

उधर दोनों हरि और श्यामलाल ने राशि को कस कर गले लगा लिया।

लेखिका

तोषिका

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