चमकता घर और वो उंगलियों के निशान

 आज रश्मि घर के हर कोने में जाकर उन निशानों को ढूंढती है जो कभी उसे चुभते थे। वह डाइनिंग टेबल के कांच को छूकर महसूस करने की कोशिश करती है कि शायद कहीं काव्या की उंगलियों की छाप छूट गई हो। वह अंश के कमरे में जाकर उस खाली बिस्तर को घंटों निहारती है … Read more

मज़बूत नींव की खुरदरी ईंट

निधि अपने माता-पिता की इकलौती और सबसे लाडली बेटी थी। उसके मायके का माहौल ऐसा था कि अगर वह सुबह के दस बजे तक भी सोती रहे, तो उसकी माँ दबे पाँव कमरे में आती और बहुत ही प्यार से उसके माथे पर हाथ फेरकर कहती, “बेटा उठ जा, चाय ठंडी हो रही है।” निधि … Read more

रिश्तों की चुभन और एक माँ का खोखला आदर्श

“अनन्या, सुन रही है? कल करवा चौथ है और तू जानती है कि रिया का यह पहला व्रत है। घर में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। तू आज ही बाज़ार जाकर सरगी का सारा सामान, फल, मेवे और मठरियाँ ले आ। और हाँ, कल सुबह रिया को भूल से भी जल्दी मत उठाना। बेचारी का … Read more

सोने की चेन – शुभ्रा बैनर्जी 

अब मां की तबीयत दिन ब दिन खराब ही होती जा रही है।कभी शुगर बिल्कुल कम हो जाता है,तो हाइपो में चली जाती हैं।अस्पताल में भर्ती करना उन्हें ,कोई कम टेढ़ी खीर नहीं।इस असंभव से काम को करने की जिम्मेदारी भी शुभा पर ही थी।इनके बेटे की भी यही आदत थी, इंजेक्शन लगवाने से और … Read more

सिंदूर की राख से जन्मी ‘माँ’

 माँ की आवाज में एक ऐसा खौफनाक ठहराव था जो किसी भी इंसान की रूह कंपा दे। उसने आगे कहा, “कान खोलकर सुन लो। तुम्हारी पत्नी कल्याणी आज इसी फर्श पर तुम्हारे इन जूतों के नीचे मर चुकी है। अब जो तुम्हारे सामने खड़ी है, वो सिर्फ और सिर्फ इस लड़के की ‘माँ’ है। और … Read more

न्याय की लाल माटी

“मालिक, ऐसा गज़ब मत बोलिए। वो आपकी भी बेटी जैसी है। अगले महीने उसके हाथ पीले होने वाले हैं। मैं खून-पसीना एक करके आपका एक-एक पैसा चुका दूँगा, बस मेरी बच्ची की तरफ आँख मत उठाइए।” लेकिन समर सिंह ने एक ज़ोरदार लात रामदीन के सीने पर मारी और अपने दोस्तों के साथ भद्दे ठहाके … Read more

स्वाभिमान की धार

 जाने से पहले रघुपति सुरभि के पास आया। उसने अपने दोनों हाथ जोड़कर सुरभि के सिर के ऊपर रखे और कांपती आवाज में बोला, “बिटिया, आज तुमने सिर्फ इस बूढ़े को काम नहीं दिया, तुमने मेरे स्वाभिमान को मरने से बचा लिया। आज मेरी बच्चियां पेट भर खाना खाएंगी और कल गर्व से स्कूल जाएंगी। … Read more

सपनों का घर

लखनऊ के गोमती नगर में रहने वाली कमला देवी का परिवार आस-पड़ोस में काफी प्रतिष्ठित माना जाता था। उनके पति दीनानाथ जी एक सरकारी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी थे। परिवार में एक बेटा था सौरभ, जिसकी शादी को अभी महज़ दो साल ही हुए थे, और घर में एक प्यारी सी बहू थी मेघा। सबसे … Read more

खौफ के पार एक उम्मीद

  रमा देवी बार-बार दरवाजे की ओट से बाहर झांकतीं और फिर निराश होकर आंगन में लौट आतीं। उनके माथे की लकीरें उनके भीतर चल रहे तूफान को साफ बयां कर रही थीं। उनके पति, जो कभी एक मिल में काम करते थे, पिछले तीन सालों से लकवे का शिकार होकर बिस्तर पर थे। घर में … Read more

रिश्तों की छांव

 “चुप कर मुर्ख!” दीदी ने माधव की बात बीच में ही काट दी। उन्होंने अपने पल्लू की गांठ खोली और उसमें से एक छोटी सी कपड़े की पोटली निकाली। वो पोटली उन्होंने माधव के हाथों में रख दी। “इसमें मेरी कुछ एफडी (Fixed Deposit) के कागज़ात हैं और मेरे कुछ पुराने गहने हैं जो मैंने … Read more

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